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Ayodhya News: तीन को आएंगे राजनाथ सिंह व सीएम योगी
Thu, 01 Oct 2026 12:31 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Thu, 01 Oct 2026 12:31 AM IST
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अयोध्या। रामनगरी के पश्चिमी-दक्षिणी छोर पर बसा रानोपाली का उदासीन ऋषि संगत आश्रम इतिहास, आस्था और लोककथाओं की ऐसी परतें समेटे है, जहां हर पत्थर किसी पुरानी कथा का साक्षी जान पड़ता है। इन दिनों यहां गुरु पर्व की धूम है। तीन अक्तूबर को आयोजित मुख्य पर्व पर यहां रक्षामंत्री राजनाथ सिंह व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी आ रहे हैं। इस अवसर पर रानोपाली आश्रम की विरासत की चर्चा करना मौजूं हो उठता है। यहां त्रेता युग की स्मृतियों से लेकर नवाबी दौर की किंवदंतियां तक एक-दूसरे में घुली हुई हैं।
राष्ट्रपति की मां भी परंपरा से जुड़ी रही
बाबा संगत बख्श के बाद बाबा माधवराम और बाबा नारायण राम ने देश के अलग-अलग हिस्सों में आश्रम की शाखाएं स्थापित कीं। आश्रम की परंपरा के अनुसार तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की मां भी इस परंपरा से जुड़ी और उनकी शिष्या थीं। सन् 1912 में बाबा केशव राम आश्रम के महंत बने और 1923 तक इसकी जिम्मेदारी संभाली।
कल्याण दास ने बदला आश्रम का स्वरूप
महंत डॉक्टर भरत दास बताते हैं कि वर्ष 2005 में अमरकंटक के प्रसिद्ध संत तपस्वी कल्याण दास को आश्रम के महंत दामोदर दास ने महंती सौंपी। बाबा कल्याण दास ने आश्रम का पुनर्निर्माण कराया और उसे भव्य स्वरूप प्रदान किया। वर्ष 2016 में उन्हें आश्रम का महंत नियुक्त किया। महंत डॉ. भरत दास के अनुसार आश्रम परिसर में गुरुसर नाम का एक तालाब भी है। मान्यता है कि वनगमन से पहले भगवान श्रीराम ने इसी तालाब में स्नान किया था। यही मान्यता इस स्थान की आध्यात्मिक आभा को और गहरा करती है।
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राष्ट्रपति की मां भी परंपरा से जुड़ी रही
बाबा संगत बख्श के बाद बाबा माधवराम और बाबा नारायण राम ने देश के अलग-अलग हिस्सों में आश्रम की शाखाएं स्थापित कीं। आश्रम की परंपरा के अनुसार तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की मां भी इस परंपरा से जुड़ी और उनकी शिष्या थीं। सन् 1912 में बाबा केशव राम आश्रम के महंत बने और 1923 तक इसकी जिम्मेदारी संभाली।
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कल्याण दास ने बदला आश्रम का स्वरूप
महंत डॉक्टर भरत दास बताते हैं कि वर्ष 2005 में अमरकंटक के प्रसिद्ध संत तपस्वी कल्याण दास को आश्रम के महंत दामोदर दास ने महंती सौंपी। बाबा कल्याण दास ने आश्रम का पुनर्निर्माण कराया और उसे भव्य स्वरूप प्रदान किया। वर्ष 2016 में उन्हें आश्रम का महंत नियुक्त किया। महंत डॉ. भरत दास के अनुसार आश्रम परिसर में गुरुसर नाम का एक तालाब भी है। मान्यता है कि वनगमन से पहले भगवान श्रीराम ने इसी तालाब में स्नान किया था। यही मान्यता इस स्थान की आध्यात्मिक आभा को और गहरा करती है।
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