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Ayodhya News: जिले भर में 90 हजार महिलाओं को साक्षर बनाने की तैयारी
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अयोध्या। जिले भर में 90 हजार महिलाओं को साक्षर बनाने की तैयारी है। इसके लिए जिला प्रशासन की आरे से विद्या शक्ति प्रोजेक्ट के तहत पहले चरण में 11 ब्लॉकों की 55 ग्राम पंचायतों में 'समूह की पाठशाला' की शुरुआत कर दी गई है। इस बड़ी मुहिम के लिए फिलहाल 20 लाख रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है। आने वाले समय में जन सहभागिता और सीएसआर के माध्यम से इस प्रोजेक्ट को सभी 772 ग्राम पंचायतों में विस्तार दिया जाएगा।
अयोध्या में स्वयं सहायता समूहों से 1.40 लाख महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इनमें से 90 हजार महिलाएं निरक्षर हैं। यह न तो पढ़ पाती हैं और न ही लिख पाती हैं। ऐसी ही परिस्थितियों में पिछली जनगणना में जिले की महिला साक्षरता दर 59 फीसदी रही। वर्ष 2027 में संभावित अगली जनगणना में इसमें सुधार करने की भी जिला प्रशासन की मंशा है। इसीलिए प्रौढ़ शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अपने तरह के अनूठे इस अभियान की शुरुआत की गई है।
इसके लिए पहले चरण में 55 ग्राम पंचायतों को चिह्नित करते हुए स्वयं सहायता समूहों की 15-15 निरक्षर महिलाओं के समूह बनाए गए हैं। इन्हे पढ़ाने के लिए भी समूहों से ही साक्षर महिलाओं का चयन करते हुए उन्हें जिम्मेदारी सौंपी गई है। अध्यापन कार्य करने वाली महिलाओं को प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया है। निरक्षर महिलाओं के लिए स्लेट और चाक समेत अन्य शिक्षण सामग्री की भी व्यवस्था की गई है। मौजूद समय में हर गांव में समूह की पाठशाला में 90 तक की अधिकतम संख्या में महिलाएं पढ़ना और लिखना सीख रही हैं।
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बेसिक शिक्षा विभाग के सहयोग से उपलब्ध कराई शिक्षण सामग्री
समूह की हर पाठशाला के लिए बेसिक शिक्षा विभाग के सहयोग से शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई गई है। मसौधा की पांच ग्राम पंचायतों से इस प्रोजेक्ट का शुभारंभ करने के बाद इस समय जिले के हर ब्लॉक की पांच ग्राम पंचायतों में पाठशाला का संचालन हो रहा है। प्रयास यह है कि निरक्षर महिलाएं दुकानों के बोर्ड पढ़ना और अपना नाम लिखने के साथ अंकों का जुड़ाव और घटाव सीख जाएं। आखिरी चरण में अखबार पढ़ने का परीक्षण किया जाएगा।
मुख्य विकास अधिकारी के कृष्ण कुमार सिंह ने बताया कि विद्या शक्ति प्रोजेक्ट के तहत फरवरी माह में जिले की सभी ग्राम पंचायतों में समूह की पाठशाला की शुरुआत कर दी जाएगी। पहले चरण का अच्छा रिस्पांस आ रहा है। बड़ी संख्या में गांवों की महिलाएं जीवन में पहली बार अपना नाम लिख पा रही हैं। ऐसा कर पाने वाली महिलाओं की खुशी देखने लायक होती है। इस प्रोजेक्ट का लक्ष्य अगली जनगणना तक जिले की महिला साक्षरता दर में 10 फीसदी तक की बढ़ोत्तरी करना है।
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अयोध्या में स्वयं सहायता समूहों से 1.40 लाख महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इनमें से 90 हजार महिलाएं निरक्षर हैं। यह न तो पढ़ पाती हैं और न ही लिख पाती हैं। ऐसी ही परिस्थितियों में पिछली जनगणना में जिले की महिला साक्षरता दर 59 फीसदी रही। वर्ष 2027 में संभावित अगली जनगणना में इसमें सुधार करने की भी जिला प्रशासन की मंशा है। इसीलिए प्रौढ़ शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अपने तरह के अनूठे इस अभियान की शुरुआत की गई है।
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इसके लिए पहले चरण में 55 ग्राम पंचायतों को चिह्नित करते हुए स्वयं सहायता समूहों की 15-15 निरक्षर महिलाओं के समूह बनाए गए हैं। इन्हे पढ़ाने के लिए भी समूहों से ही साक्षर महिलाओं का चयन करते हुए उन्हें जिम्मेदारी सौंपी गई है। अध्यापन कार्य करने वाली महिलाओं को प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया है। निरक्षर महिलाओं के लिए स्लेट और चाक समेत अन्य शिक्षण सामग्री की भी व्यवस्था की गई है। मौजूद समय में हर गांव में समूह की पाठशाला में 90 तक की अधिकतम संख्या में महिलाएं पढ़ना और लिखना सीख रही हैं।
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बेसिक शिक्षा विभाग के सहयोग से उपलब्ध कराई शिक्षण सामग्री
समूह की हर पाठशाला के लिए बेसिक शिक्षा विभाग के सहयोग से शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई गई है। मसौधा की पांच ग्राम पंचायतों से इस प्रोजेक्ट का शुभारंभ करने के बाद इस समय जिले के हर ब्लॉक की पांच ग्राम पंचायतों में पाठशाला का संचालन हो रहा है। प्रयास यह है कि निरक्षर महिलाएं दुकानों के बोर्ड पढ़ना और अपना नाम लिखने के साथ अंकों का जुड़ाव और घटाव सीख जाएं। आखिरी चरण में अखबार पढ़ने का परीक्षण किया जाएगा।
मुख्य विकास अधिकारी के कृष्ण कुमार सिंह ने बताया कि विद्या शक्ति प्रोजेक्ट के तहत फरवरी माह में जिले की सभी ग्राम पंचायतों में समूह की पाठशाला की शुरुआत कर दी जाएगी। पहले चरण का अच्छा रिस्पांस आ रहा है। बड़ी संख्या में गांवों की महिलाएं जीवन में पहली बार अपना नाम लिख पा रही हैं। ऐसा कर पाने वाली महिलाओं की खुशी देखने लायक होती है। इस प्रोजेक्ट का लक्ष्य अगली जनगणना तक जिले की महिला साक्षरता दर में 10 फीसदी तक की बढ़ोत्तरी करना है।