अयोध्या: राम मंदिर में तैनात सुरक्षाकर्मियों को जमा करना होगा मोबाइल, आपातकालीन स्थिति के लिए नई व्यवस्था बनी
सुरक्षा कर्मचारियों के परिवार में किसी की तबीयत खराब हो, बच्चे को कोई परेशानी हो या घर से कोई जरूरी सूचना देनी हो तो सीधे निजी मोबाइल पर संपर्क नहीं किया जा सकेगा। ऐसी स्थिति में परिजन सेवा केंद्र के आधिकारिक नंबर पर फोन कर सकते हैं।
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राम मंदिर की सुरक्षा में तैनात करीब 440 निजी सुरक्षाकर्मियों के लिए ड्यूटी के आठ घंटे मोबाइल से पूरी तरह दूरी वाले होंगे। ड्यूटी शुरू होने से पहले मोबाइल जमा होगा और शिफ्ट पूरी होने के बाद ही वापस मिलेगा। ऐसे में सवाल उठता है कि इस दौरान घर से कोई जरूरी खबर आए तो परिवार सुरक्षा कर्मी तक कैसे पहुंचेगा। इसके लिए मंदिर परिसर में आधिकारिक संपर्क व्यवस्था रखी गई है। कर्मियों ने अपने परिजनों को यात्री सेवा केंद्र का नंबर दे रखा है।
परिवार में किसी की तबीयत खराब हो, बच्चे को कोई परेशानी हो या घर से कोई जरूरी सूचना देनी हो तो सीधे निजी मोबाइल पर संपर्क नहीं किया जा सकेगा। ऐसी स्थिति में परिजन सेवा केंद्र के आधिकारिक नंबर पर फोन कर सकते हैं। वहां से संबंधित सुरक्षा कर्मी तक सूचना पहुंचाई जा सकेगी। राम मंदिर के नए सीईओ जितेंद्र मिश्र ने मंदिर में नई व्यवस्था लागू की है।
राम मंदिर परिसर में एसआईएस के करीब 350 और बीपीआईएस सुरक्षा एजेंसी के करीब 90 सुरक्षाकर्मी तैनात हैं। यात्री सुविधा केंद्र, सेवा केंद्र, दर्शन मार्ग समेत अलग-अलग महत्वपूर्ण स्थानों पर उनकी ड्यूटी लगाई गई है। सभी की आठ-आठ घंटे की शिफ्ट है। सुरक्षा व्यवस्था में मोबाइल प्रतिबंध का मकसद ड्यूटी के दौरान किसी तरह का ध्यान भटकाव रोकना है।
कर्मचारियों का सत्यापन भी कराया जा रहा
सुरक्षा कर्मियों को आठ घंटे तक अपने निर्धारित प्वाइंट पर पूरी सतर्कता के साथ तैनात रहना होगा। साथ ही ड्यूटी पर आने और जाने की फेस रीडिंग से हाजिरी दर्ज हो रही है। इससे यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि कर्मचारी निर्धारित समय पर ड्यूटी पर पहुंचा और पूरी शिफ्ट तक तैनात रहा। यही नहीं सीईओ ने राममंदिर में तैनात कर्मियों की स्क्रीनिंग भी शुरू कराई है। कर्मचारियों का सत्यापन और पुलिस वेरीफिकेशन भी कराया जा रहा है।
निगरानी में ढिलाई बरतने की मिली थी शिकायत
नई व्यवस्था का मकसद ड्यूटी के दौरान ध्यान भटकने की आशंका को खत्म करना है। सुरक्षाकर्मी मोबाइल में व्यस्त रहते थे, श्रद्धालुओं की मदद भी नहीं करते थे, खराब व्यवहार की भी शिकायत मिली थी, निगरानी में भी ढिलाई बरती जा रही थी। सुरक्षा प्वाइंट पर तैनात कर्मियों को लगातार अपने आसपास की गतिविधियों पर नजर रखनी होती है। ऐसे में मोबाइल का इस्तेमाल सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी चुनौती बन सकता है। शिकायत के बाद यह नई व्यवस्था लागू की गई है।