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Ayodhya News: क्रॉप कैफेटेरिया से सूरन की खेती की दी जा रही जानकारी
Tue, 26 May 2026 09:26 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Tue, 26 May 2026 09:26 PM IST
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जिमीकंद की खेती के बारे में जानकारी देते केवीके के वैज्ञानिक।
अयोध्या। जिमीकंद (सूरन) की खेती किसानों के लिए एक लाभकारी विकल्प है। इसमें कम लागत और कम मेहनत में प्रति एकड़ तीन से पांच लाख रुपये तक का मुनाफा कमाया जा सकता है। कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) ने अपने क्रॉप कैफेटेरिया में सूरन लगाया है, जिससे किसानों को उन्नत तकनीकों की जानकारी दी जा रहा है।
केवीके के अध्यक्ष डॉ. बीपी शाही ने बताया कि सूरन का उपयोग आयुर्वेदिक औषधियों में भी होता है। इसे बवासीर, पेचिश, ट्यूमर और दमा जैसी बीमारियों में उपयोगी बताया गया है। स्थानीय मिट्टी और मौसम सूरन की खेती के लिए अनुकूल हैं। गजेंद्र (एन-15), श्री पद्मा और संतरा गाची इसकी उन्नत किस्में हैं। एक एकड़ में बोआई के लिए लगभग 20 से 30 क्विंटल कंद बीज की आवश्यकता होती है। बोआई का उत्तम समय फरवरी के अंत से अप्रैल तक का है। इस अवधि में बीज पहली बारिश से पहले अच्छे से अंकुरित हो जाते हैं।
फसल छह से आठ महीने में पककरउन्होंने बताया कि कतार से कतार की दूरी तीन से चार फीट और कंद से कंद की दूरी लगभग डेढ़ फीट रखनी चाहिए। खेत की तैयारी के समय प्रति एकड़ 10-15 टन अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद डालना फायदेमंद होता है। शुरुआती तीन महीनों तक खेत में नमी बनाए रखना आवश्यक है, जिसके बाद यह बारिश के पानी पर निर्भर करता है। फसल छह से आठ महीने में पककर तैयार हो जाती है और प्रति एकड़ 200 से 300 क्विंटल तक की उपज देती है। मंडियों में इसका भाव 3000 से 5000 रुपये प्रति क्विंटल तक होता है, जिससे किसानों को मुनाफा होता है।
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केवीके के अध्यक्ष डॉ. बीपी शाही ने बताया कि सूरन का उपयोग आयुर्वेदिक औषधियों में भी होता है। इसे बवासीर, पेचिश, ट्यूमर और दमा जैसी बीमारियों में उपयोगी बताया गया है। स्थानीय मिट्टी और मौसम सूरन की खेती के लिए अनुकूल हैं। गजेंद्र (एन-15), श्री पद्मा और संतरा गाची इसकी उन्नत किस्में हैं। एक एकड़ में बोआई के लिए लगभग 20 से 30 क्विंटल कंद बीज की आवश्यकता होती है। बोआई का उत्तम समय फरवरी के अंत से अप्रैल तक का है। इस अवधि में बीज पहली बारिश से पहले अच्छे से अंकुरित हो जाते हैं।
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फसल छह से आठ महीने में पककरउन्होंने बताया कि कतार से कतार की दूरी तीन से चार फीट और कंद से कंद की दूरी लगभग डेढ़ फीट रखनी चाहिए। खेत की तैयारी के समय प्रति एकड़ 10-15 टन अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद डालना फायदेमंद होता है। शुरुआती तीन महीनों तक खेत में नमी बनाए रखना आवश्यक है, जिसके बाद यह बारिश के पानी पर निर्भर करता है। फसल छह से आठ महीने में पककर तैयार हो जाती है और प्रति एकड़ 200 से 300 क्विंटल तक की उपज देती है। मंडियों में इसका भाव 3000 से 5000 रुपये प्रति क्विंटल तक होता है, जिससे किसानों को मुनाफा होता है।
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