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Ayodhya News: 51 लाख राम नाम लेखन से तैयार की चित्रमय रामायण
Tue, 05 Mar 2024 12:06 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Tue, 05 Mar 2024 12:06 AM IST
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अयोध्या। अक्षरात्मक लिपि में रामचरित मानस के एक ऐसे संस्करण का पुनर्लेखन किया गया है, जिसमें 51 लाख बार राम नाम अंकित है। दिल्ली के मशहूर उद्यमी मृदुहरि डालमिया और अयोध्या शोध संस्थान के सहयोग से तैयार रामनाम अंकित रामकथा की इस पुस्तक का जल्द ही प्रकाशन करने की तैयारी है। इसी संदर्भ में रामनगरी आए दिल्ली के रामानुरागी संदीप ने राममंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से मुलाकात कर पुस्तक दिखाई। उन्होंने इसकी मुक्तकंठ से प्रशंसा की।
संदीप ने बताया कि रामनाम अंकित रामचरित मानस के लेखन के पीछे भी अनोखी कहानी है। संदीप इस अनूठी मानस के लेखक डॉ़ रुद्र का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज कराना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश के पन्ना जिला निवासी रुद्र सिंह यादव सेवानिवृत्त शिक्षक हैं। 1990 में एक दुर्घटना में उनकी रीढ़ में चोट लग गई थी। वे बिस्तर पर पड़ गए। अवसाद से ग्रसित डॉ़ रुद्र के मन में अचानक रामनाम लेखन का विचार आया। बिस्तर पर पड़े-पड़े उन्होंने रामनाम लेखन शुरू कर दिया।
उनके जीवन में चमत्कार हुआ। दो महीने के बाद वे चलने-फिरने लगे तो रामनाम के लेखन में उनका अनुराग बढ़ता गया। धीरे-धीरे वे ठीक होते चले गए। इसके बाद उन्होंने राम नाम लेखन में ढले तीन सौ चित्रों के माध्यम से संपूर्ण रामकथा का अंकन किया, जिसे चित्रमय रामायण नाम दिया गया है।
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संदीप ने बताया कि रामनाम अंकित रामचरित मानस के लेखन के पीछे भी अनोखी कहानी है। संदीप इस अनूठी मानस के लेखक डॉ़ रुद्र का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज कराना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश के पन्ना जिला निवासी रुद्र सिंह यादव सेवानिवृत्त शिक्षक हैं। 1990 में एक दुर्घटना में उनकी रीढ़ में चोट लग गई थी। वे बिस्तर पर पड़ गए। अवसाद से ग्रसित डॉ़ रुद्र के मन में अचानक रामनाम लेखन का विचार आया। बिस्तर पर पड़े-पड़े उन्होंने रामनाम लेखन शुरू कर दिया।
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उनके जीवन में चमत्कार हुआ। दो महीने के बाद वे चलने-फिरने लगे तो रामनाम के लेखन में उनका अनुराग बढ़ता गया। धीरे-धीरे वे ठीक होते चले गए। इसके बाद उन्होंने राम नाम लेखन में ढले तीन सौ चित्रों के माध्यम से संपूर्ण रामकथा का अंकन किया, जिसे चित्रमय रामायण नाम दिया गया है।
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