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Ayodhya News: अयोध्या के अस्पतालों की नालियों में मिले खतरनाक सुपरबग
Fri, 21 Aug 2026 12:29 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Fri, 21 Aug 2026 12:29 AM IST
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अयोध्या। अस्पतालों से निकलने वाला गंदा पानी अब सिर्फ पर्यावरण के लिए ही नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य के लिए भी गंभीर चिंता का कारण बन सकता है। अवध विश्वविद्यालय के माइक्रोबायोलॉजी विभाग की एक रिसर्च में शहर के नौ अस्पतालों की नालियों के पानी में बड़ी संख्या में खतरनाक सुपरबग मिले हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि जांचे गए बैक्टीरिया में करीब 91.6 फीसदी मल्टी-ड्रग रेजिस्टेंट (एमडीआर) पाए गए।
रिसर्च के दौरान अस्पतालों की नालियों से लिए गए नमूनों में कुल 179 तरह के बैक्टीरिया मिले। इनमें 31 बैक्टीरिया एक्सटेंसिवली ड्रग रेजिस्टेंट (एक्सडीआर) श्रेणी के पाए गए, यानी कई प्रमुख एंटीबायोटिक दवाएं इन पर असर नहीं कर रही थीं। इससे भी गंभीर स्थिति तीन बैक्टीरिया में मिली, जिन्हें पैन-ड्रग रेजिस्टेंट (पीडीआर) पाया गया। इनमें ई-कोलाई, शिगेला और प्रोटियस के एक-एक बैक्टीरिया शामिल हैं।
नौ अस्पतालों के नमूनों की जांच
रिसर्च के लिए दर्शननगर स्थित मेडिकल कॉलेज की दो जगहों समेत जिला अस्पताल, महिला जिला अस्पताल, चिरंजीवी हॉस्पिटल, किशन हॉस्पिटल, संजीवनी हॉस्पिटल, श्रीराम हॉस्पिटल और लेप्रोसी मिशन हॉस्पिटल की नालियों से पानी के नमूने लिए गए थे। अलग-अलग बैक्टीरिया पर दवाओं के असर की जांच में भी स्थिति चिंताजनक रही। स्यूडोमोनास के सभी 13 नमूने दवा-प्रतिरोधी मिले। वहीं क्लेबसिएला के 96.87 फीसदी और ई-कोलाई के 95.23 फीसदी नमूने एमडीआर पाए गए। पेनिसिलिन, एरिथ्रोमाइसिन और क्लिंडामाइसिन के खिलाफ सबसे ज्यादा प्रतिरोध दर्ज किया गया।
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एंटीबायोटिक के अंधाधुंध इस्तेमाल का संकेत
यह रिसर्च अवध विश्वविद्यालय के माइक्रोबायोलॉजी विभाग से जुड़े एम. गौतम, पी. चौबे, एसके यादव और प्रो. शैलेंद्र कुमार ने किया है।रिसर्च में एमएआर इंडेक्स 0.2 से अधिक पाया गया। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह ऐसे वातावरण की ओर संकेत करता है जहां लंबे समय से कई तरह की एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल होता रहा है। अस्पतालों के अपशिष्ट जल में मौजूद दवा-रोधी बैक्टीरिया अगर बिना पर्याप्त उपचार के पर्यावरण में पहुंचते हैं तो वे पानी और मिट्टी में फैल सकते हैं।
नाली से नल तक पहुंचने का खतरा
अस्पतालों का नाली का पानी बड़े नालों और सीवर नेटवर्क में पहुंचता है। कई इलाकों में सीवर और पेयजल पाइपलाइन आसपास से गुजरती हैं। ऐसे में पाइपलाइन में रिसाव होने पर दूषित पानी के पेयजल स्रोत तक पहुंचने का खतरा पैदा हो सकता है। हालांकि, अब तक किसी पेयजल पाइपलाइन में पीडीआर बैक्टीरिया मिलने या लोगों के संक्रमित होने की पुष्टि नहीं हुई है।
घर तक पहुंचा तो किसे सबसे ज्यादा खतरा
अगर दवारोधी बैक्टीरिया दूषित पानी के जरिये घरों तक पहुंचते हैं तो पीने और खाना बनाने के पानी को लेकर सबसे बड़ी चिंता पैदा होगी। दूषित पानी से पेट और आंत से जुड़े संक्रमण हो सकते हैं। कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि संक्रमण होने पर सामान्य एंटीबायोटिक दवाएं प्रभावी न रहें। (संवाद)
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रिसर्च के दौरान अस्पतालों की नालियों से लिए गए नमूनों में कुल 179 तरह के बैक्टीरिया मिले। इनमें 31 बैक्टीरिया एक्सटेंसिवली ड्रग रेजिस्टेंट (एक्सडीआर) श्रेणी के पाए गए, यानी कई प्रमुख एंटीबायोटिक दवाएं इन पर असर नहीं कर रही थीं। इससे भी गंभीर स्थिति तीन बैक्टीरिया में मिली, जिन्हें पैन-ड्रग रेजिस्टेंट (पीडीआर) पाया गया। इनमें ई-कोलाई, शिगेला और प्रोटियस के एक-एक बैक्टीरिया शामिल हैं।
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नौ अस्पतालों के नमूनों की जांच
रिसर्च के लिए दर्शननगर स्थित मेडिकल कॉलेज की दो जगहों समेत जिला अस्पताल, महिला जिला अस्पताल, चिरंजीवी हॉस्पिटल, किशन हॉस्पिटल, संजीवनी हॉस्पिटल, श्रीराम हॉस्पिटल और लेप्रोसी मिशन हॉस्पिटल की नालियों से पानी के नमूने लिए गए थे। अलग-अलग बैक्टीरिया पर दवाओं के असर की जांच में भी स्थिति चिंताजनक रही। स्यूडोमोनास के सभी 13 नमूने दवा-प्रतिरोधी मिले। वहीं क्लेबसिएला के 96.87 फीसदी और ई-कोलाई के 95.23 फीसदी नमूने एमडीआर पाए गए। पेनिसिलिन, एरिथ्रोमाइसिन और क्लिंडामाइसिन के खिलाफ सबसे ज्यादा प्रतिरोध दर्ज किया गया।
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एंटीबायोटिक के अंधाधुंध इस्तेमाल का संकेत
यह रिसर्च अवध विश्वविद्यालय के माइक्रोबायोलॉजी विभाग से जुड़े एम. गौतम, पी. चौबे, एसके यादव और प्रो. शैलेंद्र कुमार ने किया है।रिसर्च में एमएआर इंडेक्स 0.2 से अधिक पाया गया। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह ऐसे वातावरण की ओर संकेत करता है जहां लंबे समय से कई तरह की एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल होता रहा है। अस्पतालों के अपशिष्ट जल में मौजूद दवा-रोधी बैक्टीरिया अगर बिना पर्याप्त उपचार के पर्यावरण में पहुंचते हैं तो वे पानी और मिट्टी में फैल सकते हैं।
नाली से नल तक पहुंचने का खतरा
अस्पतालों का नाली का पानी बड़े नालों और सीवर नेटवर्क में पहुंचता है। कई इलाकों में सीवर और पेयजल पाइपलाइन आसपास से गुजरती हैं। ऐसे में पाइपलाइन में रिसाव होने पर दूषित पानी के पेयजल स्रोत तक पहुंचने का खतरा पैदा हो सकता है। हालांकि, अब तक किसी पेयजल पाइपलाइन में पीडीआर बैक्टीरिया मिलने या लोगों के संक्रमित होने की पुष्टि नहीं हुई है।
घर तक पहुंचा तो किसे सबसे ज्यादा खतरा
अगर दवारोधी बैक्टीरिया दूषित पानी के जरिये घरों तक पहुंचते हैं तो पीने और खाना बनाने के पानी को लेकर सबसे बड़ी चिंता पैदा होगी। दूषित पानी से पेट और आंत से जुड़े संक्रमण हो सकते हैं। कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि संक्रमण होने पर सामान्य एंटीबायोटिक दवाएं प्रभावी न रहें। (संवाद)