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शोषण के खिलाफ सामूहिक संघर्ष आवश्यक है: प्रो. बजरंग बिहारी तिवारी
Sun, 14 Jun 2026 11:12 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Sun, 14 Jun 2026 11:12 PM IST
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गोष्ठी को संबोधित करते प्रो. बजरंग बिहारी तिवारी।
अयोध्या। अलग-अलग संघर्ष लड़ने से व्यवस्था या सत्ता पर अपेक्षित प्रभाव नहीं पड़ता, इसलिए विभिन्न प्रकार के शोषण के खिलाफ सामूहिक संघर्ष आवश्यक है। जातिगत हिंसा को समझे बिना दलित लेखन को समझना संभव नहीं है। दलित आंदोलन एक अखिल भारतीय आंदोलन है और महात्मा ज्योतिराव फुले व डॉ. भीमराव अंबेडकर इसके प्रमुख नायक हैं। ये बातें दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर बजरंग बिहारी तिवारी ने जनवादी लेखक संघ की जिला इकाई की ओर से आयोजित व्याख्यान में कहीं। वह दक्षिण और उत्तर का दलित साहित्य : एक तुलनात्मक अंतर्दृष्टि विषय पर अपने विचार व्यक्त कर रहे थे।
प्रो. तिवारी ने कहा कि दक्षिण भारत के दलित साहित्य में बसवन्ना, अय्यंकाली और श्री नारायण गुरु जैसे स्थानीय नायकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। बताया कि दलित साहित्य बांग्ला, गुजराती, पंजाबी, मराठी, तमिल, कन्नड़ समेत अनेक भारतीय भाषाओं में समृद्ध रूप से विकसित हुआ है।
प्रो. तिवारी ने कहा कि नई सदी में दलित लेखन में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी एक महत्वपूर्ण परिघटना के रूप में सामने आई है। कार्यक्रम में डॉ. रघुवंशमणि ने कहा कि दलित आंदोलन उन सामाजिक प्रश्नों को सामने लाता है जो लंबे समय तक उपेक्षित रहे हैं। विशाल श्रीवास्तव ने प्रो. तिवारी के शोधपरक कार्यों की सराहना की। इस मौके पर सत्यभान सिंह जनवादी, स्वप्निल श्रीवास्तव, प्रो. परेश कुमार पांडेय, वरिष्ठ कवि आशाराम जागरथ, अखिलेश सिंह, ओमप्रकाश राय, रवींद्र कबीर, बार एसोसिएशन फैजाबाद के पूर्व मंत्री गिरीश चंद्र तिवारी, प्रेरणा, अर्चना सिंह, पूजा श्रीवास्तव, वैदिक द्विवेदी, ऋषिक द्विवेदी, संतोष अकेला, मालती तिवारी, नीलम शुक्ला, शिवांगी शर्मा, योगेश पांडेय और रीता शर्मा सहित कई लोग मौजूद रहे।
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प्रो. तिवारी ने कहा कि दक्षिण भारत के दलित साहित्य में बसवन्ना, अय्यंकाली और श्री नारायण गुरु जैसे स्थानीय नायकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। बताया कि दलित साहित्य बांग्ला, गुजराती, पंजाबी, मराठी, तमिल, कन्नड़ समेत अनेक भारतीय भाषाओं में समृद्ध रूप से विकसित हुआ है।
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प्रो. तिवारी ने कहा कि नई सदी में दलित लेखन में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी एक महत्वपूर्ण परिघटना के रूप में सामने आई है। कार्यक्रम में डॉ. रघुवंशमणि ने कहा कि दलित आंदोलन उन सामाजिक प्रश्नों को सामने लाता है जो लंबे समय तक उपेक्षित रहे हैं। विशाल श्रीवास्तव ने प्रो. तिवारी के शोधपरक कार्यों की सराहना की। इस मौके पर सत्यभान सिंह जनवादी, स्वप्निल श्रीवास्तव, प्रो. परेश कुमार पांडेय, वरिष्ठ कवि आशाराम जागरथ, अखिलेश सिंह, ओमप्रकाश राय, रवींद्र कबीर, बार एसोसिएशन फैजाबाद के पूर्व मंत्री गिरीश चंद्र तिवारी, प्रेरणा, अर्चना सिंह, पूजा श्रीवास्तव, वैदिक द्विवेदी, ऋषिक द्विवेदी, संतोष अकेला, मालती तिवारी, नीलम शुक्ला, शिवांगी शर्मा, योगेश पांडेय और रीता शर्मा सहित कई लोग मौजूद रहे।
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