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राम मंदिर दान चोरी: कब से उड़ रहा था चढ़ावा? 45 दिन से पीछे नहीं पहुंच पा रही जांच; सच की तलाश में एजेंसियां

Sat, 27 Jun 2026 08:02 PM IST
Bhupendra Singh अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या Published by: Bhupendra Singh Updated Sat, 27 Jun 2026 08:02 PM IST
सार

राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर कब से चढ़ावा उड़ रहा था? जांच 45 दिन से पीछे नहीं पहुंच पा रही है। सीसीटीवी फुटेज सीमित होने से पुराने दावों की पुष्टि नहीं हो पा रही है। दस्तावेजों और गवाहों के सहारे  पूरी टाइमलाइन खंगाली जा रही है। आगे पढ़ें पूरी खबर...

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biggest question in Ram Mandir offering theft case is just when did pilfering of offerings actually begin
राम मंदिर चढ़ावा चोरी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रामनगरी अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में एफआईआर दर्ज होने के बाद सबसे बड़ा सवाल अब भी अनुत्तरित है, कि आखिर चढ़ावा कब से उड़ाया जा रहा था। पुलिस जांच फिलहाल इसका सटीक जवाब देने की स्थिति में नहीं है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि मंदिर परिसर की केवल 45 दिन की ही सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध हो सकी है।
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राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया से लेकर धार्मिक और राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर चर्चा तेज है कि यह गड़बड़ी आखिर कब से चल रही थी? कोई इसे प्राण प्रतिष्ठा के समय से जोड़ रहा है तो कोई मंदिर निर्माण के दौरान से ही अनियमितताओं की आशंका जता रहा है। हालांकि, इन दावों की पुष्टि अभी तक किसी जांच एजेंसी ने नहीं की है। ऐसे में अब पूरी जांच उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही आगे बढ़ रही है।
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बढ़ सकता है जांच का दायरा

जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, उपलब्ध फुटेज के आधार पर ही घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। इससे पहले की रिकॉर्डिंग उपलब्ध न होने के कारण जांच अब दस्तावेजों, कर्मचारियों के बयानों, लेखा-जोखा और अन्य साक्ष्यों पर केंद्रित है। यदि पुराने वित्तीय रिकॉर्ड, दान रजिस्टर या अन्य ठोस साक्ष्य मिलते हैं तो जांच का दायरा बढ़ सकता है।

टिन्नू और अनुकल्प को बताया जा रहा मास्टरमाइंड

सूत्रों के अनुसार, चढ़ावा चोरी के मामले में अनुकल्प मिश्रा और टिन्नू को ही मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। यह दावा किया जा रहा है कि चोरी की स्क्रिप्ट इन्होंने लिखी। दोनों ही चंपत राय के करीबियों में गिने जाते थे। इनमें टिन्नू के पास दान पेटिकाओं की चाबी रहती थी। 
 
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हाल ही में उसने अपने भतीजे मनीष को भी भर्ती करवाया था, जिसके माध्यम से भी उसके हिस्से की धनराशि उस तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। इसके अलावा अन्य सभी आरोपी मौका मिलने पर हाथ साफ कर देते थे। जो जिस अवधि से भी गणना कार्य में शामिल हुआ, थोड़े समय में ही चोरी के लिए ट्रेंड हो गया। 

बड़ी मात्रा में धनराशि चोरी होने का दावा

ऐसे में लोग लंबे समय से चोरी की आशंका जता रहे हैं और बड़ी मात्रा में धनराशि चोरी होने का दावा कर रहे हैं। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि किसी भी निष्कर्ष पर केवल साक्ष्यों के आधार पर ही पहुंचा जाएगा। इसलिए 45 दिन से पहले की अवधि को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक दावा नहीं किया जा सकता।
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