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Ayodhya News: 1992 में बने थे पुजारी, मिलता था 100 रुपये वेतन

Wed, 12 Feb 2025 10:20 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या Updated Wed, 12 Feb 2025 10:20 PM IST
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Became a priest in 1992, used to get a salary of Rs 100
अयोध्या। आचार्य सत्येंद्र दास एक मार्च 1992 को रामलला के मुख्य पुजारी पर नियुक्त हुए थे। अशोक सिंहल की सहमति के बाद उनके मुख्य पुजारी बनने का मार्ग प्रशस्त हुआ था। जब वे मुख्य पुजारी बनाए गए तो उन्हें 100 रुपये प्रतिमाह वेतन मिलता था। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद उनका वेतन बढ़कर 38500 रुपये हो गया था। राम मंदिर ट्रस्ट ने रामलला के प्रति उनकी निष्ठा को देखते हुए उन्हें आजीवन वेतन देने का ऐलान कर रखा है।
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आचार्य सत्येंद्र दास से पहले रामलला के पुजारी लालदास थे। उस समय रिसीवर की जिम्मेदारी रिटायर जज पर हुआ करती थी। जेपी सिंह बतौर रिसीवर नियुक्त थे। फरवरी 1992 में उनकी मौत हो गई तो राम जन्मभूमि की व्यवस्था का जिम्मा जिला प्रशासन को दिया गया। तब पुजारी लालदास को हटाने की बात हुई। उस समय तत्कालीन भाजपा सांसद विनय कटियार, विहिप के नेताओं और कई संत जो विहिप नेताओं के संपर्क में थे, सबने पुजारी सत्येंद्र दास के नाम पर फैसला किया। तत्कालीन विहिप अध्यक्ष अशोक सिंघल की भी सहमति मिल गई। जिला प्रशासन को सबने अवगत कराया और इस तरह एक मार्च 1992 को उनकी नियुक्ति हो गई। उन्हें अधिकार दिया गया कि वह अपने चार सहायक पुजारी भी रख सकते हैं।
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मुख्य पुजारी चूंकि सहायता प्राप्त स्कूल में पढ़ाते थे, ऐसे में मंदिर में बतौर पुजारी सिर्फ 100 रुपये वेतन मिलता था। जब 30 जून 2007 को वे अध्यापक के पद से रिटायर हाे गए तो 13 हजार रुपये तनख्वाह मिलने लगी। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद उनका वेतन बढ़कर 38500 रुपये हो गया।
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सत्येंद्र दास संत कबीरनगर के रहने वाले थे। वे बचपन में ही अयोध्या आ गए थे। इसलिए उन्हें अपने आस-पास धार्मिक माहौल मिला था। अभिरामदास जिन्होंने 1949 में रामजन्म भूमि के गर्भगृह में मूर्तियां रखी थी,उनसे काफी प्रभावित हुए। अभिरामदास जी का सत्येंद्र दास के पिता से संपर्क अच्छा था। सत्येंद्र दास जी पर धर्म व अध्यात्म का गहरा प्रभाव पड़ा और उन्होंने पिता के समक्ष संन्यासी बनने की इच्छा जताई। पिताजी ने भी कोई विरोध नहीं किया बल्कि उन्हें बहुत खुशी हुई। इसके बाद सत्येंद्र दास जी भगवान की सेवा के लिए चले गए।
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