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Ayodhya News: जैविक खेती की राह पकड़कर आत्मनिर्भर बनीं आरती
Fri, 18 Sep 2026 11:44 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Fri, 18 Sep 2026 11:44 PM IST
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अयोध्या। बीकापुर के ज्वालापुर गांव की आरती मौर्य ने जैविक खेती को आय का जरिया बनाया है। प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने करीब दो बीघे में सहफसली खेती शुरू की। मौसम के अनुसार अलग-अलग सब्जियां उगाकर वह सालभर उत्पादन बनाए रखने का प्रयास करती हैं। इससे उन्हें हर माह करीब 15 हजार रुपये की आमदनी हो रही है।
आरती के खेत में तरोई, मूली, आलू, टमाटर, प्याज, लौकी, कद्दू, बैंगन, मिर्च, भिंडी और करेला समेत कई सब्जियां उगाई जाती हैं। एक साथ कई फसलें होने से किसी एक फसल पर निर्भरता कम रहती है। खेत की देखरेख और सब्जियों की तुड़ाई वह खुद करती हैं, जबकि तैयार उपज उनके पति मंडी में बेचते हैं।
आरती ने बताया कि पहले वह सामान्य तरीके से खेती करती थीं। जैविक खेती का प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने जैविक खाद समेत अन्य जैविक तरीके अपनाने शुरू किए। उनके अनुसार जैविक तरीके से उगाई गई सब्जियों का स्वाद अच्छा रहता है और मंडी में भी लोग इन्हें पसंद करते हैं।
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समूह की महिलाओं को भी सिखाती हैं खेती
आरती अपने समूह से जुड़ी करीब 10 से 12 महिलाओं को जैविक खेती के तरीके सिखाती हैं। वह उन्हें सब्जियों की खेती, जैविक खाद के इस्तेमाल और बीज तैयार करने की जानकारी देती हैं। खेती उनके परिवार की आय का मुख्य जरिया है।
फसलों के साथ बीज भी करती हैं तैयार
सब्जियों के अलावा आरती गेहूं, धान समेत अन्य फसलें भी उगाती हैं। वह जैविक तरीके से बीज तैयार कर अगली फसल में इस्तेमाल करती हैं। इससे बीज खरीदने का खर्च बचता है। जरूरत से अधिक बीज होने पर वह इसे बेचकर अतिरिक्त आमदनी भी करती हैं।
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आरती के खेत में तरोई, मूली, आलू, टमाटर, प्याज, लौकी, कद्दू, बैंगन, मिर्च, भिंडी और करेला समेत कई सब्जियां उगाई जाती हैं। एक साथ कई फसलें होने से किसी एक फसल पर निर्भरता कम रहती है। खेत की देखरेख और सब्जियों की तुड़ाई वह खुद करती हैं, जबकि तैयार उपज उनके पति मंडी में बेचते हैं।
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आरती ने बताया कि पहले वह सामान्य तरीके से खेती करती थीं। जैविक खेती का प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने जैविक खाद समेत अन्य जैविक तरीके अपनाने शुरू किए। उनके अनुसार जैविक तरीके से उगाई गई सब्जियों का स्वाद अच्छा रहता है और मंडी में भी लोग इन्हें पसंद करते हैं।
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समूह की महिलाओं को भी सिखाती हैं खेती
आरती अपने समूह से जुड़ी करीब 10 से 12 महिलाओं को जैविक खेती के तरीके सिखाती हैं। वह उन्हें सब्जियों की खेती, जैविक खाद के इस्तेमाल और बीज तैयार करने की जानकारी देती हैं। खेती उनके परिवार की आय का मुख्य जरिया है।
फसलों के साथ बीज भी करती हैं तैयार
सब्जियों के अलावा आरती गेहूं, धान समेत अन्य फसलें भी उगाती हैं। वह जैविक तरीके से बीज तैयार कर अगली फसल में इस्तेमाल करती हैं। इससे बीज खरीदने का खर्च बचता है। जरूरत से अधिक बीज होने पर वह इसे बेचकर अतिरिक्त आमदनी भी करती हैं।