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Ayodhya News: रामपथ से स्वर्गद्वार और दिल्ली दरवाजा तक खतरनाक इमारतों का जाल
Tue, 15 Sep 2026 12:18 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Tue, 15 Sep 2026 12:18 AM IST
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जर्जर भवन में रहता परिवार।
अयोध्या। रामनगरी में विकास की चमक बढ़ रही है, लेकिन इसी चमक के पीछे जर्जर भवनों का खतरा जस का तस खड़ा है। रामपथ-धाम से लेकर स्वर्गद्वार, लक्ष्मण घाट, बड़ी देवकाली और दिल्ली दरवाजा तक कई खतरनाक भवन आबादी और श्रद्धालुओं की आवाजाही के बीच मौजूद हैं। कहीं जर्जर इमारतों में लोग रह रहे हैं तो कहीं उन्हीं के भीतर दुकानें चल रही हैं। कुछ भवन खाली हैं, लेकिन उनके आसपास आबादी होने से खतरा बना हुआ है। नगर निगम के रिकॉर्ड में करीब 80 जर्जर भवन चिह्नित हैं। मानसून से पहले हर साल नोटिस भी जारी किए जाते हैं, लेकिन मामला नोटिस से आगे नहीं बढ़ता। शहर से गांव तक जर्जर मकान और दुकानों की संख्या 80 नहीं, बल्कि करीब 800 है।
रामपथ-धाम : सामने चमक, पीछे खतरा
रामपथ और धाम क्षेत्र में करीब 12 जर्जर भवनों में दुकानें संचालित हो रही हैं। मुख्य सड़क से रंग-रोगन के कारण भवन भले ही ठीक नजर आएं, लेकिन पीछे की तरफ उनकी जर्जर हालत साफ दिखाई देती है। इन इमारतों में कमजोर दीवारों और हिस्सों के बीच कारोबार चल रहा है। किसी दिन भवन का कोई हिस्सा भरभराकर गिरा तो दुकानदार ही नहीं, खरीदारी करने पहुंचे श्रद्धालु और राहगीर भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।
स्वर्गद्वार-लक्ष्मण घाट : जर्जर भवनों में जिंदगी
स्वर्गद्वार और लक्ष्मण घाट क्षेत्र में करीब 20 जर्जर भवन और मंदिर हैं। इनमें कई जगह लोग रह रहे हैं। आसपास भी घनी आबादी है। ऐसे में कमजोर भवन का कोई हिस्सा गिरने पर सिर्फ उसमें रहने वाले परिवार ही नहीं, पड़ोसी मकान भी प्रभावित हो सकते हैं। इसी इलाके में करीब 10 जर्जर भवन और मंदिर ऐसे हैं, जिनमें फिलहाल कोई नहीं रहता। आसपास मकान और आबादी है। भवन का मलबा या कोई हिस्सा गिरने पर आसपास रहने वाले लोगों के लिए दुर्घटना का कारण बन सकता है। बड़ी देवकाली मंदिर के पास जर्जर मकान का एक हिस्सा पहले ही गिर चुका है। इसके बाद भी लोग बचे हुए कमजोर हिस्से में रह रहे हैं।
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दिल्ली दरवाजा : चार भवन, 15 घरों पर सीधा खतरा
दिल्ली दरवाजा में एक कतार में बने चार जर्जर भवन किसी बड़े हादसे की आशंका को खुला निमंत्रण दे रहे हैं। दीवारों में दरारें हैं। छज्जे, खिड़की-दरवाजे और लोहे की छड़ें बाहर लटक रही हैं। एक भवन के भीतर पीपल का पेड़ तक उग आया है। भवन खाली हैं, लेकिन उनके आसपास लोग रह रहे हैं। एक जर्जर भवन के छज्जे के नीचे से गली का रास्ता गुजरता है, जिसका इस्तेमाल करीब आठ घरों के लोग करते हैं। आसपास के करीब 15 घर सीधे प्रभावित हो सकते हैं।
नगर आयुक्त जयेंद्र कुमार ने बताया कि जर्जर भवनों को नोटिस दिया गया है। निजी संपत्ति होने के कारण निगम को इन्हें गिराने का अधिकार नहीं है। किसी सरकारी कार्यालय का संचालन जर्जर भवन में नहीं हो रहा है।
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रामपथ-धाम : सामने चमक, पीछे खतरा
रामपथ और धाम क्षेत्र में करीब 12 जर्जर भवनों में दुकानें संचालित हो रही हैं। मुख्य सड़क से रंग-रोगन के कारण भवन भले ही ठीक नजर आएं, लेकिन पीछे की तरफ उनकी जर्जर हालत साफ दिखाई देती है। इन इमारतों में कमजोर दीवारों और हिस्सों के बीच कारोबार चल रहा है। किसी दिन भवन का कोई हिस्सा भरभराकर गिरा तो दुकानदार ही नहीं, खरीदारी करने पहुंचे श्रद्धालु और राहगीर भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।
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स्वर्गद्वार-लक्ष्मण घाट : जर्जर भवनों में जिंदगी
स्वर्गद्वार और लक्ष्मण घाट क्षेत्र में करीब 20 जर्जर भवन और मंदिर हैं। इनमें कई जगह लोग रह रहे हैं। आसपास भी घनी आबादी है। ऐसे में कमजोर भवन का कोई हिस्सा गिरने पर सिर्फ उसमें रहने वाले परिवार ही नहीं, पड़ोसी मकान भी प्रभावित हो सकते हैं। इसी इलाके में करीब 10 जर्जर भवन और मंदिर ऐसे हैं, जिनमें फिलहाल कोई नहीं रहता। आसपास मकान और आबादी है। भवन का मलबा या कोई हिस्सा गिरने पर आसपास रहने वाले लोगों के लिए दुर्घटना का कारण बन सकता है। बड़ी देवकाली मंदिर के पास जर्जर मकान का एक हिस्सा पहले ही गिर चुका है। इसके बाद भी लोग बचे हुए कमजोर हिस्से में रह रहे हैं।
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दिल्ली दरवाजा : चार भवन, 15 घरों पर सीधा खतरा
दिल्ली दरवाजा में एक कतार में बने चार जर्जर भवन किसी बड़े हादसे की आशंका को खुला निमंत्रण दे रहे हैं। दीवारों में दरारें हैं। छज्जे, खिड़की-दरवाजे और लोहे की छड़ें बाहर लटक रही हैं। एक भवन के भीतर पीपल का पेड़ तक उग आया है। भवन खाली हैं, लेकिन उनके आसपास लोग रह रहे हैं। एक जर्जर भवन के छज्जे के नीचे से गली का रास्ता गुजरता है, जिसका इस्तेमाल करीब आठ घरों के लोग करते हैं। आसपास के करीब 15 घर सीधे प्रभावित हो सकते हैं।
नगर आयुक्त जयेंद्र कुमार ने बताया कि जर्जर भवनों को नोटिस दिया गया है। निजी संपत्ति होने के कारण निगम को इन्हें गिराने का अधिकार नहीं है। किसी सरकारी कार्यालय का संचालन जर्जर भवन में नहीं हो रहा है।