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Ayodhya News: बाढ़ से उजड़े 1200 परिवार, सिर से नहीं उतरा लगान

Wed, 16 Sep 2026 12:30 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या Updated Wed, 16 Sep 2026 12:30 AM IST
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1,200 families devastated by floods
घर के पास कटान करती सरयू।
अयोध्या। सोहावल की कोटसराय ग्राम पंचायत के मांझा कला गांव में करीब 1200 परिवार आज भी लगान चुका रहे हैं। एक बीघे जमीन के लिए सालाना तीन हजार रुपये जमा करने पड़ते हैं। वर्ष 2012 की बाढ़ में कई परिवारों के घर और जमीन नदी में समा गए। जिनके पास रहने और खेती करने के लिए अपनी जमीन तक नहीं बची, वे अब दूसरे लोगों की जमीन पर रहने को मजबूर हैं।
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लगान के लिए जेवर और मवेशी तक बेचने की नौबत : सबसे दर्दनाक तस्वीर उन परिवारों की है, जिनके पास लगान चुकाने के लिए नकद पैसा नहीं होता। लगान दे रहे ग्रामीणों- मुरली यादव, राम अनुग्रह, मंजीत, मल्हू, प्रेम, ओता देवी, अनुज कुमार, मुन्ना लाल, सुक्खा देवी के मुताबिक, कई बार महिलाओं को अपने जेवर बेचने पड़ते हैं। कुछ परिवार मजबूरी में गाय और भैंस तक बेचकर लगान चुकाते हैं।
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2001 की ‘लगान’ और 2026 का मांझा कला : साल 2001 में रिलीज हुई फिल्म ‘लगान’ में 1893 के ब्रिटिश शासनकाल की कहानी दिखाई गई थी। वहां किसान सूखे और अंग्रेजी हुकूमत के कर से जूझ रहे थे जबकि मांझा कला के किसान बाढ़ में घर और अपनी जमीन गंवा चुके हैं। दूसरे की जमीन पर रहने को मजबूर हैं। सालाना लगान चुकाने की जिम्मेदारी उनके सिर पर है। ग्रामीण शिवप्रसाद, रमेश, विजय यादव, मंजीत और विजय कुमार बताते हैं कि मांझा कला में बाढ़ हर साल आती है और करीब तीन महीने तक ग्रामीणों की जिंदगी पटरी से उतरी रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि सुरक्षा के लिए बंधा बनाया जाए।
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बाढ़ ने बदल दी अंतिम संस्कार की जगह भी : मांझा कला में बाढ़ का असर जिंदगी के साथ मौत पर भी पड़ा है। नदी किनारे पारंपरिक अंतिम संस्कार स्थल तक पहुंचना पानी बढ़ने के बाद जोखिम भरा हो जाता है। ग्रामीण गोपीचंद बताते हैं कि ऐसे हालात में लोगों को गांव के एक छोर पर ही अंतिम संस्कार करना पड़ता है।


6.15 एकड़ तक किसानों का लगान माफ है। हो सकता है कुछ किसान इससे ऊपर के भूमिधर हो। ऐसी कोई शिकायत मिलेगी तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
- आदित्य विक्रम अग्रवाल, एसडीएम सोहावल




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