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Amethi News: मां ब्रह्मचारिणी की आराधना कर मांगी सुख-समृद्धि
Tue, 13 Oct 2026 12:12 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Tue, 13 Oct 2026 12:12 AM IST
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अमेठी सिटी। शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन सोमवार को भक्तगण मां ब्रह्मचारिणी की आराधना में श्रद्धालु लीन रहे। जिले के देवी मंदिरों और पूजा पंडालों में सुबह से शुरू हुआ दर्शन-पूजन का सिलसिला देर शाम तक चलता रहा। इस दौरान भक्तों ने मां को पुष्प, नारियल और चुनरी अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। सुबह और शाम हुई आरती में श्रद्धालुओं ने शामिल होकर मां के जयकारे लगाए।
संग्रामपुर स्थित मां कालिकन धाम में सुबह से ही भक्त दर्शन के लिए पहुंचे। श्रद्धालुओं ने कतार में लगकर मां कालिका के दर्शन किए और प्रसाद चढ़ाया। मंदिर परिसर में साफ-सफाई और दर्शन व्यवस्था का ध्यान रखा गया। पुलिस बल की मौजूदगी में भक्तों ने पूजा-अर्चना की। गौरीगंज स्थित दुर्गन धाम और सिंहपुर क्षेत्र के अहोरवा भवानी मंदिर में भी श्रद्धालुओं ने मां के दर्शन कर आरती में भाग लिया।
देवीपाटन मंदिर, गायत्री मंदिर और हिंगलाज मंदिर में भी भक्तों ने पूजा-अर्चना की। ग्रामीण क्षेत्रों के देवी मंदिरों में भी श्रद्धालु पहुंचे। पूजा के बाद कई स्थानों पर प्रसाद वितरित किया गया। नवरात्र का व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं ने घरों में भी मां ब्रह्मचारिणी की विधि-विधान से पूजा की। पुष्प, फल और प्रसाद अर्पित करने के बाद दुर्गा सप्तशती और दुर्गा चालीसा का पाठ किया। शाम को परिवार के सदस्यों ने एक साथ मां की आरती की।
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तप और संयम की प्रतीक हैं मां ब्रह्मचारिणी
आचार्य हेमंत पांडेय ने बताया कि मां ब्रह्मचारिणी दुर्गा का दूसरा स्वरूप हैं। उन्हें तप, संयम और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। उनके दाएं हाथ में जपमाला और बाएं हाथ में कमंडल रहता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए उन्होंने कठोर तपस्या की थी। नवरात्र के दूसरे दिन श्रद्धालु उनकी पूजा कर आत्मबल, धैर्य और सुख-शांति की कामना करते हैं।
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संग्रामपुर स्थित मां कालिकन धाम में सुबह से ही भक्त दर्शन के लिए पहुंचे। श्रद्धालुओं ने कतार में लगकर मां कालिका के दर्शन किए और प्रसाद चढ़ाया। मंदिर परिसर में साफ-सफाई और दर्शन व्यवस्था का ध्यान रखा गया। पुलिस बल की मौजूदगी में भक्तों ने पूजा-अर्चना की। गौरीगंज स्थित दुर्गन धाम और सिंहपुर क्षेत्र के अहोरवा भवानी मंदिर में भी श्रद्धालुओं ने मां के दर्शन कर आरती में भाग लिया।
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देवीपाटन मंदिर, गायत्री मंदिर और हिंगलाज मंदिर में भी भक्तों ने पूजा-अर्चना की। ग्रामीण क्षेत्रों के देवी मंदिरों में भी श्रद्धालु पहुंचे। पूजा के बाद कई स्थानों पर प्रसाद वितरित किया गया। नवरात्र का व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं ने घरों में भी मां ब्रह्मचारिणी की विधि-विधान से पूजा की। पुष्प, फल और प्रसाद अर्पित करने के बाद दुर्गा सप्तशती और दुर्गा चालीसा का पाठ किया। शाम को परिवार के सदस्यों ने एक साथ मां की आरती की।
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तप और संयम की प्रतीक हैं मां ब्रह्मचारिणी
आचार्य हेमंत पांडेय ने बताया कि मां ब्रह्मचारिणी दुर्गा का दूसरा स्वरूप हैं। उन्हें तप, संयम और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। उनके दाएं हाथ में जपमाला और बाएं हाथ में कमंडल रहता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए उन्होंने कठोर तपस्या की थी। नवरात्र के दूसरे दिन श्रद्धालु उनकी पूजा कर आत्मबल, धैर्य और सुख-शांति की कामना करते हैं।