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Amethi News: जवाब पर विचार किए बिना प्रशासक को हटाने का आदेश निरस्त
Sat, 17 Oct 2026 12:45 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Sat, 17 Oct 2026 12:45 AM IST
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अमेठी सिटी। संग्रामपुर विकासखंड की ठेंगहा ग्राम पंचायत की प्रशासक सुदामा देवी को पद से हटाने और 1,61,198 रुपये की वसूली का आदेश इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने निरस्त कर दिया है। अदालत ने जवाब पर विचार किए बिना कार्रवाई को अनुचित मानते हुए जिलाधिकारी को चार सप्ताह में नया आदेश पारित करने का आदेश दिया है।
सुदामा देवी ने जिलाधिकारी के 19 सितंबर 2026 के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इसके तहत उन्हें पद से हटाने और 1,61,198 रुपये की वसूली भू-राजस्व के बकाये के रूप में करने का निर्देश दिया गया था। सुनवाई में प्रशासक के अधिवक्ताओं ने दलील दी कि सरकारी धन का गबन नहीं हुआ था और विकास कार्य भी कराए गए थे। आरोप निर्धारित स्थान के बजाय दूसरे स्थान पर कार्य कराने का था। अधिवक्ताओं ने कहा कि कारण बताओ नोटिस के जवाब पर विचार किए बिना कार्रवाई की गई।
राज्य सरकार के अधिवक्ता ने जिला पंचायत राज अधिकारी के लिखित निर्देश अदालत में प्रस्तुत किए। इनके अनुसार प्रशासक को 20 अगस्त 2026 को नोटिस जारी कर 15 दिन में जवाब देने का समय दिया गया था। नोटिस 23 अगस्त को मिला और प्रशासक का जवाब नौ सितंबर को जिलाधिकारी कार्यालय पहुंच गया था। विभागीय रिपोर्ट आठ सितंबर को तैयार कर भेज दी गई थी। विभाग ने दलील दी कि जवाब निर्धारित अवधि के बाद मिलने के कारण उस पर विचार जरूरी नहीं था।
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सुदामा देवी ने जिलाधिकारी के 19 सितंबर 2026 के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इसके तहत उन्हें पद से हटाने और 1,61,198 रुपये की वसूली भू-राजस्व के बकाये के रूप में करने का निर्देश दिया गया था। सुनवाई में प्रशासक के अधिवक्ताओं ने दलील दी कि सरकारी धन का गबन नहीं हुआ था और विकास कार्य भी कराए गए थे। आरोप निर्धारित स्थान के बजाय दूसरे स्थान पर कार्य कराने का था। अधिवक्ताओं ने कहा कि कारण बताओ नोटिस के जवाब पर विचार किए बिना कार्रवाई की गई।
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राज्य सरकार के अधिवक्ता ने जिला पंचायत राज अधिकारी के लिखित निर्देश अदालत में प्रस्तुत किए। इनके अनुसार प्रशासक को 20 अगस्त 2026 को नोटिस जारी कर 15 दिन में जवाब देने का समय दिया गया था। नोटिस 23 अगस्त को मिला और प्रशासक का जवाब नौ सितंबर को जिलाधिकारी कार्यालय पहुंच गया था। विभागीय रिपोर्ट आठ सितंबर को तैयार कर भेज दी गई थी। विभाग ने दलील दी कि जवाब निर्धारित अवधि के बाद मिलने के कारण उस पर विचार जरूरी नहीं था।
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