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ओपीडी में ताला, इंतजार में मरीज बेहाल
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03 : गौरीगंज : जिला अस्पताल मेें सुबह 8:52 बजे बंद पड़ा महिला चिकित्सक कक्ष।
- फोटो : AMETHI
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गौरीगंज (अमेठी)। संक्रामक बीमारियों को फैलने से रोकने के लिए शासन-प्रशासन भले ही सक्रिय हो लेकिन जिला अस्पताल में कार्यरत डॉक्टर व स्वास्थ्य कर्मी बेपरवाह हैं। आलम यह है कि सुबह आठ बजे से अपराह्न दो बजे तक संचालित जिला अस्पताल में दस बजे से पहले कोई भी डॉक्टर पहुंचने को तैयार नहीं हैं। चिकित्सकों की मनमानी से जहां ओपीडी समय से संचालित नहीं हो पा रही है वहीं मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
कोविड संक्रमण की संभावित तीसरी लहर के बीच फैल रहे वायरल फीवर, डेंगू व मलेरिया से बचाव के लिए डोर-टू-डोर सर्वे कर बचाव कार्य संचालित कर लोगों को सुरक्षित करने में जुटा है। वहीं असैदापुर स्थित मलिक मोहम्मद जायसी संयुक्त जिला चिकित्सालय में कार्यरत चिकित्सक व स्वास्थ्य कर्मी लापरवाही की हद पार कर रहे हैं।
लगातार चिकित्सकों के दस बजे पहुंचे की बात सामने आने के बाद सोमवार को ‘अमर उजाला’ टीम 8:50 बजे जिला अस्पताल पहुंची। अस्पताल में दवा वितरण कक्ष समेत सभी चिकित्सकों के कक्ष में ताला बंद मिला। टीम इमरजेंसी वार्ड पहुंची तो वहां पर फार्मासिस्ट जितेंद्र कुमार व एएन पांडेय मौजूद मिले।
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चिकित्सक के बारे में पहुंचे पर फार्मासिस्ट ने बताया कि रात्रि ड्यूटी के बाद सुबह आठ बजे डॉ. अनूप आर्या घर जा चुके हैं तो दिन की ड्यूटी में कार्यरत डॉ. शुभम पांडेय वार्ड में भर्ती मरीजों का उपचार करने वार्ड गए हैं। ओपीडी परिसर में बने कक्ष में फार्मासिस्ट मनीष कुमार के साथ पर्चा निर्माण काउंटर पर दो स्वास्थ्य कर्मी मौजूद थे।
परिसर के अंदर व बाहर मरीज चिकित्सकों का इंतजार करते दिखे। कई मरीजों ने बताया कि प्रतिदिन अस्पताल में सुबह दस बजे से पहले कोई चिकित्सक नहीं आता है। इतना ही नहीं अस्पताल के सीएमएस कक्ष में भी 9:00 बजे तक ताला बंद रहा।
कई बार हो चुका बवाल
आकस्मिक ड्यूटी में चिकित्सकों ने नहीं रहने से कई बार जिला अस्पताल में मरीज के तीमारदारों व स्वास्थ्य कर्मियों के बीच बवाल हो चुका है। बवाल के बाद विभाग सिर्फ मरीजों के तीमारदारों पर केस दर्ज कराकर अपना पल्ला झाड़ लेता है। जिम्मेदार चिकित्सकों पर कोई कार्रवाई नहीं होती। ऐसे में डॉक्टरों की मनमानी बढ़ती जा रही है।
होगी कार्रवाई : सीएमएस
सीएमएस डॉ. ब्रदी प्रसाद अग्रवाल से फोन पर संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि वे अभी जल्दी ही आए हैं। नौ बजे अस्पताल में नहीं होने पर उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। बताया कि चिकित्सकों के समय से अस्पताल नहीं पहुंचने की जानकारी नहीं है। यदि ऐसा है तो पूरे मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
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कोविड संक्रमण की संभावित तीसरी लहर के बीच फैल रहे वायरल फीवर, डेंगू व मलेरिया से बचाव के लिए डोर-टू-डोर सर्वे कर बचाव कार्य संचालित कर लोगों को सुरक्षित करने में जुटा है। वहीं असैदापुर स्थित मलिक मोहम्मद जायसी संयुक्त जिला चिकित्सालय में कार्यरत चिकित्सक व स्वास्थ्य कर्मी लापरवाही की हद पार कर रहे हैं।
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लगातार चिकित्सकों के दस बजे पहुंचे की बात सामने आने के बाद सोमवार को ‘अमर उजाला’ टीम 8:50 बजे जिला अस्पताल पहुंची। अस्पताल में दवा वितरण कक्ष समेत सभी चिकित्सकों के कक्ष में ताला बंद मिला। टीम इमरजेंसी वार्ड पहुंची तो वहां पर फार्मासिस्ट जितेंद्र कुमार व एएन पांडेय मौजूद मिले।
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चिकित्सक के बारे में पहुंचे पर फार्मासिस्ट ने बताया कि रात्रि ड्यूटी के बाद सुबह आठ बजे डॉ. अनूप आर्या घर जा चुके हैं तो दिन की ड्यूटी में कार्यरत डॉ. शुभम पांडेय वार्ड में भर्ती मरीजों का उपचार करने वार्ड गए हैं। ओपीडी परिसर में बने कक्ष में फार्मासिस्ट मनीष कुमार के साथ पर्चा निर्माण काउंटर पर दो स्वास्थ्य कर्मी मौजूद थे।
परिसर के अंदर व बाहर मरीज चिकित्सकों का इंतजार करते दिखे। कई मरीजों ने बताया कि प्रतिदिन अस्पताल में सुबह दस बजे से पहले कोई चिकित्सक नहीं आता है। इतना ही नहीं अस्पताल के सीएमएस कक्ष में भी 9:00 बजे तक ताला बंद रहा।
कई बार हो चुका बवाल
आकस्मिक ड्यूटी में चिकित्सकों ने नहीं रहने से कई बार जिला अस्पताल में मरीज के तीमारदारों व स्वास्थ्य कर्मियों के बीच बवाल हो चुका है। बवाल के बाद विभाग सिर्फ मरीजों के तीमारदारों पर केस दर्ज कराकर अपना पल्ला झाड़ लेता है। जिम्मेदार चिकित्सकों पर कोई कार्रवाई नहीं होती। ऐसे में डॉक्टरों की मनमानी बढ़ती जा रही है।
होगी कार्रवाई : सीएमएस
सीएमएस डॉ. ब्रदी प्रसाद अग्रवाल से फोन पर संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि वे अभी जल्दी ही आए हैं। नौ बजे अस्पताल में नहीं होने पर उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। बताया कि चिकित्सकों के समय से अस्पताल नहीं पहुंचने की जानकारी नहीं है। यदि ऐसा है तो पूरे मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।