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सीता खोज प्रसंग की सुन भावुक हुए श्रोता
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35 : गौरीगंज : मऊ गांव में श्रीरामकथा सुनते श्रोता। -संवाद
- फोटो : AMETHI
गौरीगंज (अमेठी)। निष्ठा, लगन व भक्ति से किया गया कोई कार्य कभी व्यर्थ नहीं होता। प्रभु को निष्ठवान लोग अतिप्रिय हैं। यह बातें मऊ गांव में चल रही श्रीराम कथा के आठवें दिन प्रवचक ने कहीं। प्रवचक ने आठवें दिन सुंदरकांड को विस्तार रूप से बताते हुए सीता खोज व अशोक वाटिका प्रसंग की कथा सुनाई। जिसे सुन श्रोता भावुक हो गए।
मऊ गांव स्थित विधायक राकेश प्रताप सिंह के यहां चल रही श्रीराम कथा के आठवें दिन सोमवार को कथावाचक स्वामी प्रणव पुरी महाराज ने सुंदरकांड की कथा सुनाई। प्रवचक ने हनुमान जी के कार्य निष्ठा लगन भक्ति की व्याख्या विस्तार से करते हुए कहा कि प्रभु को निष्ठावान व्यक्ति अतिप्रिय है।
‘जिमि अमोघ रघुपति कर बाना, एही भांति चलेउ हनुमाना’। बताया कि जैसे श्रीरघुनाथ जी के बाण अमोघ हैं वैसे हनुमान जी के कार्य और लक्ष्य की प्राप्ति की दिशा में प्रयत्न भी अमोघ होता है। हनुमान जी ने सीता जी की खोज ही नहीं की बल्कि वानर-भालू के प्राणों की रक्षा भी की। प्रवचक ने कथा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि वनवास के दौरान लंका का राजा रावण माता सीता का हरण कर ले गया। सुग्रीव की सहायता से माता सीता की खोज में वानर दल चारों दिशाओं में भेजे गए।
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दक्षिण की ओर जामवंत हनुमान जी और अंगद को भेजा गया। समुद्र को लांघने में कोई समर्थ नहीं रहा तो यह कार्य हनुमान ने किया। लंका में पहुंचकर विभीषण से भेंट, माता सीता के पास अशोक वाटिका पहुंचना, वाटिका विध्वंस, अक्षय कुमार का वध। लंका दहन समेत अन्य प्रसंग को विस्तार पूर्वक सुनाया। माता सीता से निशानी लेकर भगवान राम के पास पहुंचकर सीता का संदेश प्रभु को हनुमानजी महाराज ने सुनाया। कथा सुन बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। आठवें दिन की कथा में मृगांकेश्वर शरण सिंह, प्रेम बहादुर, दिनेश सिंह, शेर बहादुर सिंह, विकास सिंह, उर्मिला सिंह व फतेह बहादुर सिंह समेत बड़ी संख्या में महिला व पुरुष श्रोता मौजूद रहे।
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मऊ गांव स्थित विधायक राकेश प्रताप सिंह के यहां चल रही श्रीराम कथा के आठवें दिन सोमवार को कथावाचक स्वामी प्रणव पुरी महाराज ने सुंदरकांड की कथा सुनाई। प्रवचक ने हनुमान जी के कार्य निष्ठा लगन भक्ति की व्याख्या विस्तार से करते हुए कहा कि प्रभु को निष्ठावान व्यक्ति अतिप्रिय है।
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‘जिमि अमोघ रघुपति कर बाना, एही भांति चलेउ हनुमाना’। बताया कि जैसे श्रीरघुनाथ जी के बाण अमोघ हैं वैसे हनुमान जी के कार्य और लक्ष्य की प्राप्ति की दिशा में प्रयत्न भी अमोघ होता है। हनुमान जी ने सीता जी की खोज ही नहीं की बल्कि वानर-भालू के प्राणों की रक्षा भी की। प्रवचक ने कथा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि वनवास के दौरान लंका का राजा रावण माता सीता का हरण कर ले गया। सुग्रीव की सहायता से माता सीता की खोज में वानर दल चारों दिशाओं में भेजे गए।
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दक्षिण की ओर जामवंत हनुमान जी और अंगद को भेजा गया। समुद्र को लांघने में कोई समर्थ नहीं रहा तो यह कार्य हनुमान ने किया। लंका में पहुंचकर विभीषण से भेंट, माता सीता के पास अशोक वाटिका पहुंचना, वाटिका विध्वंस, अक्षय कुमार का वध। लंका दहन समेत अन्य प्रसंग को विस्तार पूर्वक सुनाया। माता सीता से निशानी लेकर भगवान राम के पास पहुंचकर सीता का संदेश प्रभु को हनुमानजी महाराज ने सुनाया। कथा सुन बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। आठवें दिन की कथा में मृगांकेश्वर शरण सिंह, प्रेम बहादुर, दिनेश सिंह, शेर बहादुर सिंह, विकास सिंह, उर्मिला सिंह व फतेह बहादुर सिंह समेत बड़ी संख्या में महिला व पुरुष श्रोता मौजूद रहे।