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Amethi News: हुनर सीख आशा बनीं आत्मनिर्भर
Sat, 17 Oct 2026 01:08 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Sat, 17 Oct 2026 01:08 AM IST
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मुंशीगंज के परसावायं गांव में हार्पिक पैक करती समूह की महिलाएं। स्रोत: स्वयं
अमेठी सिटी। सीमित पूंजी और आर्थिक परेशानियों के बीच परसावां की आशा देवी ने हार नहीं मानी। स्वयं सहायता समूह के प्रशिक्षण से हार्पिक और फिनाइल बनाने का हुनर सीखा और अपनी बचत के 30 हजार रुपये लगाकर कारोबार शुरू किया। पूंजी कम पड़ी तो समूह से 50 हजार रुपये का ऋण लेकर काम आगे बढ़ाया। आज उनके साथ चार अन्य महिलाएं भी जुड़ी हैं।
आशा देवी ने बताया कि गौरीगंज में स्वयं सहायता समूह के प्रशिक्षण कार्यक्रम में उन्हें हार्पिक और फिनाइल बनाने का प्रशिक्षण मिला था। इसके बाद उन्होंने अपनी बचत से कारोबार शुरू किया। शुरुआती दौर में पूंजी की कमी और उत्पादों की बिक्री को लेकर चिंता थी। समूह से ऋण मिलने पर कारोबार बढ़ाने में मदद मिली।
कानपुर से कच्चा माल मंगाकर उत्पाद तैयार किए जाते हैं। निर्माण से लेकर बोतलों में भरने, पैकिंग और बिक्री तक की जिम्मेदारी महिलाएं मिलकर संभालती हैं। अब उनके साथ गीत, संजू, गिरजा और सीमा भी काम कर रही हैं। पांचों महिलाएं मिलकर हर महीने करीब 3000 लीटर उत्पाद तैयार करती हैं।
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सभी खर्च निकालने के बाद कारोबार से हर महीने करीब आठ से 10 हजार रुपये की शुद्ध बचत हो रही है। आशा देवी की योजना कारोबार को धीरे-धीरे आगे बढ़ाने और अधिक ग्राहकों तक उत्पाद पहुंचाने की है।
समूह की सदस्य गीत ने बताया कि काम से होने वाली कमाई परिवार की जरूरतें पूरी करने में मददगार है। संजू ने बताया कि नियमित भुगतान मिलने से वह घरेलू खर्च में हाथ बंटा पा रही हैं। गिरजा के अनुसार समूह के साथ काम करने से नया हुनर सीखने और अपनी कमाई करने का अवसर मिला है। सीमा ने बताया कि काम से आत्मविश्वास बढ़ा है और परिवार को आर्थिक सहारा देने में मदद मिल रही है।
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आशा देवी ने बताया कि गौरीगंज में स्वयं सहायता समूह के प्रशिक्षण कार्यक्रम में उन्हें हार्पिक और फिनाइल बनाने का प्रशिक्षण मिला था। इसके बाद उन्होंने अपनी बचत से कारोबार शुरू किया। शुरुआती दौर में पूंजी की कमी और उत्पादों की बिक्री को लेकर चिंता थी। समूह से ऋण मिलने पर कारोबार बढ़ाने में मदद मिली।
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कानपुर से कच्चा माल मंगाकर उत्पाद तैयार किए जाते हैं। निर्माण से लेकर बोतलों में भरने, पैकिंग और बिक्री तक की जिम्मेदारी महिलाएं मिलकर संभालती हैं। अब उनके साथ गीत, संजू, गिरजा और सीमा भी काम कर रही हैं। पांचों महिलाएं मिलकर हर महीने करीब 3000 लीटर उत्पाद तैयार करती हैं।
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सभी खर्च निकालने के बाद कारोबार से हर महीने करीब आठ से 10 हजार रुपये की शुद्ध बचत हो रही है। आशा देवी की योजना कारोबार को धीरे-धीरे आगे बढ़ाने और अधिक ग्राहकों तक उत्पाद पहुंचाने की है।
समूह की सदस्य गीत ने बताया कि काम से होने वाली कमाई परिवार की जरूरतें पूरी करने में मददगार है। संजू ने बताया कि नियमित भुगतान मिलने से वह घरेलू खर्च में हाथ बंटा पा रही हैं। गिरजा के अनुसार समूह के साथ काम करने से नया हुनर सीखने और अपनी कमाई करने का अवसर मिला है। सीमा ने बताया कि काम से आत्मविश्वास बढ़ा है और परिवार को आर्थिक सहारा देने में मदद मिल रही है।