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Amethi News: हुनर को रोजगार में बदलकर बढ़ाएं आय
Sun, 19 Jul 2026 12:48 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Sun, 19 Jul 2026 12:48 AM IST
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आरसेटी में आयोजित संवाद कार्यक्रम में मौजूद महिलाएं व अतिथि। -संवाद
अमेठी सिटी। गौरीगंज स्थित आरसीटी केंद्र में शनिवार को अमर उजाला संवाद कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें ई-सखी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहीं महिलाओं को प्रशिक्षण पूरा होने के बाद रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों पर विशेषज्ञों ने उपयोगी जानकारी दी। वक्ताओं ने कहा कि डिजिटल कौशल के साथ आत्मविश्वास महिलाओं की सबसे बड़ी पूंजी है। इससे वे आय बढ़ाने के साथ परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर आत्मनिर्भर बन सकती हैं। महिलाएं हुनर को रोजगार में बदलकर अपनी आय बढ़ाएं।
राजकीय आईटीआई के प्रधानाचार्य महेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल प्रमाणपत्र देना नहीं, बल्कि उसे रोजगार से जोड़ना है। ई-सखी के रूप में प्रशिक्षित महिलाएं गांवों में डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराकर अपनी अलग पहचान बना सकती हैं। उन्होंने निरंतर सीखने, नई तकनीक अपनाने और हर अवसर का लाभ उठाने की सलाह दी।
आरसीटी की निदेशक पूजा लाल ने कहा कि प्रशिक्षण के बाद महिलाएं ऑनलाइन आवेदन, डिजिटल भुगतान, बैंकिंग सेवाएं, सरकारी योजनाओं से जुड़ी सुविधाएं और अन्य डिजिटल कार्यों के माध्यम से नियमित आय अर्जित कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से सशक्त महिला परिवार तथा समाज दोनों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। विशेषज्ञों ने व्यावहारिक सुझाव देते हुए महिलाओं को कौशल का निरंतर अभ्यास करने, ग्राहक भरोसा बनाने और उपलब्ध योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया। इस मौके पर महिमा सिंह, प्रकाश जायसवाल, दिनेश सिंह और हेमंत कुमार आदि मौजूद रहे।
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सवाल-जवाब
सवाल : ई-सखी प्रशिक्षण के बाद रोजगार कहां मिलेगा। सीमा
जवाब : डिजिटल सेवा केंद्र, निजी संस्थानों और स्वरोजगार के माध्यम से अवसर मिलेंगे।
सवाल : गांव में आय कैसे बढ़ाएं। शारदा
जवाब : डिजिटल सेवाएं, स्वयं सहायता समूह और छोटे उद्यम बेहतर विकल्प हैं।
सवाल : व्यवसाय कैसे शुरू करें। अनुपम
जवाब : कौशल के अनुरूप काम चुनें, फिर बैंक और सरकारी योजनाओं का सहयोग लें।
सवाल : आगे क्या करें। तन्नु
जवाब : नई तकनीक सीखते रहें, अभ्यास बढ़ाएं और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं दें।
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राजकीय आईटीआई के प्रधानाचार्य महेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल प्रमाणपत्र देना नहीं, बल्कि उसे रोजगार से जोड़ना है। ई-सखी के रूप में प्रशिक्षित महिलाएं गांवों में डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराकर अपनी अलग पहचान बना सकती हैं। उन्होंने निरंतर सीखने, नई तकनीक अपनाने और हर अवसर का लाभ उठाने की सलाह दी।
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आरसीटी की निदेशक पूजा लाल ने कहा कि प्रशिक्षण के बाद महिलाएं ऑनलाइन आवेदन, डिजिटल भुगतान, बैंकिंग सेवाएं, सरकारी योजनाओं से जुड़ी सुविधाएं और अन्य डिजिटल कार्यों के माध्यम से नियमित आय अर्जित कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से सशक्त महिला परिवार तथा समाज दोनों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। विशेषज्ञों ने व्यावहारिक सुझाव देते हुए महिलाओं को कौशल का निरंतर अभ्यास करने, ग्राहक भरोसा बनाने और उपलब्ध योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया। इस मौके पर महिमा सिंह, प्रकाश जायसवाल, दिनेश सिंह और हेमंत कुमार आदि मौजूद रहे।
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सवाल : ई-सखी प्रशिक्षण के बाद रोजगार कहां मिलेगा। सीमा
जवाब : डिजिटल सेवा केंद्र, निजी संस्थानों और स्वरोजगार के माध्यम से अवसर मिलेंगे।
सवाल : गांव में आय कैसे बढ़ाएं। शारदा
जवाब : डिजिटल सेवाएं, स्वयं सहायता समूह और छोटे उद्यम बेहतर विकल्प हैं।
सवाल : व्यवसाय कैसे शुरू करें। अनुपम
जवाब : कौशल के अनुरूप काम चुनें, फिर बैंक और सरकारी योजनाओं का सहयोग लें।
सवाल : आगे क्या करें। तन्नु
जवाब : नई तकनीक सीखते रहें, अभ्यास बढ़ाएं और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं दें।