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Amethi News: बूंदाबांदी से बढ़ी ठिठुरन, सर्द हवा ने ढाया सितम
Sun, 04 Jan 2026 12:25 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Sun, 04 Jan 2026 12:25 AM IST
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अमेठी सिटी। मौसम के बदले मिजाज के बाद शनिवार को हुई बूंदाबांदी से ठिठुरन बढ़ गई। इस दौरान सात किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चली सर्द पछुआ हवा ने ऐसा सितम ढाया कि बाजारों से लेकर सड़कों तक पर सन्नाटा दिखने लगा। शनिवार सुबह से ही आसमान में बादलों की घनी परत छाई रही। ठंड के कारण खुले स्थानों पर काम करने वाले श्रमिकों, राहगीरों और दोपहिया वाहन चालकों को खास तौर पर परेशानी उठाना पड़ी।
मौसम वैज्ञानिक डॉ. अमरनाथ मिश्र ने बताया कि बादलों की आवाजाही और ठंडी पछुआ हवा के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई। अधिकतम तापमान 15 से 18 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान आठ डिग्री सेल्सियस के आसपास बना रहा। नमी अधिक रहने से ठंड का असर तेज महसूस हुआ।
सुबह के समय से ठंडी हवा के साथ हुई बूंदाबांदी ने सड़कों पर दौड़ने वाले वाहनों की रफ्तार पर भी ब्रेक लगा दिया। कार्यालय और दुकान जाने वाले लोग समय से पहले निकलते दिखे। गर्म कपड़ों में लिपटे रहने के बावजूद ठंड का असर कम नहीं हो रहा था। इसके चलते गौरीगंज सहित प्रमुख बाजारों में सामान्य दिनों की अपेक्षा सन्नाटा पसरा दिखा। दुकानों पर खरीदारों के न पहुंचने से दुकानदार भी परेशान दिखे। ठंड से बचने के लिए चाय, कॉफी समोसा और पकोड़ी की दुकानों पर लोगों की भीड़ जुटी दिखी। ग्रामीण इलाकों में भी ठंड के कारण खेतों की ओर जाने वाले किसान देरी से निकले। जगह-जगह लोग अलाव जला कर तापते नजर आए।
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फसल के लिए फायदेमंद बूंदाबांदी
हल्की बूंदाबांदी खेती-किसानी की दृष्टि से लाभकारी मानी जा रही है। गेहूं, सरसों और दलहनी फसलों को आवश्यक नमी मिली है। खेतों में नमी पहुंचने से फसलों की बढ़वार तेज होने की संभावना है। गेहूं की फसल इस समय फुटाव की अवस्था में है, जबकि सरसों में फूल झड़ने के बाद फलियां बननी शुरू हो चुकी हैं। इस मौसम में मिली नमी से सिंचाई का बोझ कम होगा। अगले कुछ दिनों में हल्की बारिश बनी रही तो उत्पादन बेहतर रहने की उम्मीद है।
बढ़ रहा जुखाम, खांसी व बुखार का प्रकोप
मौसम में आए बदलाव से अस्पतालों की ओपीडी में सर्दी, खांसी, जुकाम व बुखार से पीड़ित मरीजों की संख्या भी बढ़ने लगी है। जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ. शुभम पांडेय ने ठंडी हवा और नमी के कारण बुजुर्गों व बच्चों को विशेष तौर पर सावधानी बरतने की जरूरत जताई है। अचानक तापमान गिरने से जोड़ों के दर्द और सांस संबंधी परेशानी वाले लोगों को दिक्कत हो सकती है। साफ-सफाई और संतुलित भोजन से स्वास्थ्य सुरक्षित रखा जा सकता है।
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मौसम वैज्ञानिक डॉ. अमरनाथ मिश्र ने बताया कि बादलों की आवाजाही और ठंडी पछुआ हवा के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई। अधिकतम तापमान 15 से 18 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान आठ डिग्री सेल्सियस के आसपास बना रहा। नमी अधिक रहने से ठंड का असर तेज महसूस हुआ।
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सुबह के समय से ठंडी हवा के साथ हुई बूंदाबांदी ने सड़कों पर दौड़ने वाले वाहनों की रफ्तार पर भी ब्रेक लगा दिया। कार्यालय और दुकान जाने वाले लोग समय से पहले निकलते दिखे। गर्म कपड़ों में लिपटे रहने के बावजूद ठंड का असर कम नहीं हो रहा था। इसके चलते गौरीगंज सहित प्रमुख बाजारों में सामान्य दिनों की अपेक्षा सन्नाटा पसरा दिखा। दुकानों पर खरीदारों के न पहुंचने से दुकानदार भी परेशान दिखे। ठंड से बचने के लिए चाय, कॉफी समोसा और पकोड़ी की दुकानों पर लोगों की भीड़ जुटी दिखी। ग्रामीण इलाकों में भी ठंड के कारण खेतों की ओर जाने वाले किसान देरी से निकले। जगह-जगह लोग अलाव जला कर तापते नजर आए।
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फसल के लिए फायदेमंद बूंदाबांदी
हल्की बूंदाबांदी खेती-किसानी की दृष्टि से लाभकारी मानी जा रही है। गेहूं, सरसों और दलहनी फसलों को आवश्यक नमी मिली है। खेतों में नमी पहुंचने से फसलों की बढ़वार तेज होने की संभावना है। गेहूं की फसल इस समय फुटाव की अवस्था में है, जबकि सरसों में फूल झड़ने के बाद फलियां बननी शुरू हो चुकी हैं। इस मौसम में मिली नमी से सिंचाई का बोझ कम होगा। अगले कुछ दिनों में हल्की बारिश बनी रही तो उत्पादन बेहतर रहने की उम्मीद है।
बढ़ रहा जुखाम, खांसी व बुखार का प्रकोप
मौसम में आए बदलाव से अस्पतालों की ओपीडी में सर्दी, खांसी, जुकाम व बुखार से पीड़ित मरीजों की संख्या भी बढ़ने लगी है। जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ. शुभम पांडेय ने ठंडी हवा और नमी के कारण बुजुर्गों व बच्चों को विशेष तौर पर सावधानी बरतने की जरूरत जताई है। अचानक तापमान गिरने से जोड़ों के दर्द और सांस संबंधी परेशानी वाले लोगों को दिक्कत हो सकती है। साफ-सफाई और संतुलित भोजन से स्वास्थ्य सुरक्षित रखा जा सकता है।