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सड़कों की ‘रीढ़’ तोड़ रहे ओवरलोडेड वाहन
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 07 Mar 2016 02:05 AM IST
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सड़क पर जानवर
- फोटो : amar ujala
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शहर की सड़कों पर दौड़ रहे भारी वाहनों में निर्धारित मानक से ढाई से तीन गुना अधिक माल ढोया जा रहे हैं। जिन सड़कों की क्षमता 10 से 15 टन का भार सहने की है उन सड़कों पर दौड़ रहने वाहनों में 30 से 35 टन माल ढोया जा रहा है, इससे सड़कों का बुरा हाल है। शहर की कई सड़कें जगह-जगह धंस गई हैं। सड़कें समय से पहले ही उखड़ रही हैं। लोगों का आनाजाना मुश्किल हो गया है। लोग इसकी शिकायत भी लगातार कर रहे हैं। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधिकारी भी इस बात को मान रहे हैं। उनका कहना है कि शहर की सड़कों पर 30 से 35 टन भार क्षमता केवाहन गुजर रहे हैं। इससे सड़कें जल्दी उखड़ रही हैं।
पीडब्ल्यूडी की ओर से बनाई जा रही सड़कों पर अधिकतम 15 टन भार की क्षमता वाले वाहन ले जाए जा सकते हैं। यही उसका निर्धारित और उच्चतम मानक है। विभाग सड़कों का निर्माण उस पर चलने वाले ट्रैफिक को देखते हुए करता है। जैसे गांवों में बनाई जाने वाली 27.50 सेमी की सड़कों पर भी 15 टन की क्षमता वाले वाहन ले जाए जा सकते हैं लेकिन ऐसे भारी वाहन दो-चार बार ही आएंगे-जाएंगे तभी सड़क बची रहेगी लेकिन जैसे ही भारी वाहनों की संख्या बढ़ेगी। उनका आना-जाना बढ़ेगा सड़क टूट जाएगी, बैठ जाएगी। ऐसे ही शहर की सड़कों का भी हाल है।
अधिशासी अभियंता एके अत्री कहते हैं शहर की सड़कों पर भी 10 से 15 टन की क्षमता के भार वाले वाहन ही ले जाए जा सकते हैं। इससे अधिक लोड ले जाने पर सड़कें टूट जाएंगी। शहर की सड़कों पर 15 टन से अधिक भार वाले वाहन ले जाए जा रहे हैं। इससे सड़कें बुरी तरह से टूट रही हैं। सड़कों पर गड्ढा हो रहा है। चीफ इंजीनियर एचएन पांडेय कहते हैं कि इस बारे में आरटीओ से कई बार कहा गया है कि ओवरलोडिंग बंद कराएं लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
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पीडब्ल्यूडी की ओर से सड़कों के निर्माण का मानक वर्ष 1980 के पहले बनाया गया है। सहायक अभियंता मनीष यादव, अखिलेश कुमार कहते हैं कि जिस तरह से नए वाहन बढ़े हैं और उस पर माल ले जाने की भार क्षमता बढ़ी है, उस तरह से सड़कों के निर्माण के मानक नहीं बदले गए है। पुराने नियम बहाल रहने से भी नए वाहनों के अनुरूप सड़कें नहीं बन पा रही हैं।
शेरशाह सूरी मार्ग जिसे अब हम जीटी रोड के नाम से जानते हैं, देश के सर्वाधिक व्यस्त मार्गों में से एक है। इलाहाबाद से गुजरने वाले इस हाईवे पर कई स्थानों पर सड़क की एक लेन बड़े वाहनों की आवाजाही से काफी धंस गई है। हर साल लाखों की संख्या में इस मार्ग से गुजरने वाले वाहनों से टोल टैक्स भी लिया जाता है ताकि समय-समय पर इस हाइवे की मरम्मत आदि के कार्य किए जा सके। बावजूद इसके सवाल यह है कि सड़क बनने के कुछ दिनों बाद ही हाइवे की एक लेन धंस जा रही है। यह स्थिति सिर्फ कानपुर-इलाहाबाद-वाराणसी मार्ग की ही नहीं, बल्कि इलाहाबाद-रीवां, इलाहाबाद-फैजाबाद आदि राष्ट्रीय राजमार्ग की भी है।
जानकारों की मानें तो ओवरलोड वाहनों की आवाजाही की रोकथाम न होने की वजह नेशनल हाइवे का यह हाल है। दरअसल बहुत से कारोबारी ट्रकों की क्षमता से काफी ज्यादा माल उसमें लोड कर देते हैं। संभागीय परिवहन विभाग के कुछ कर्मचारियों की सांठगांठ से हाइवे पर इन वाहनों की चेकिंग नहीं होती और ये धड़ल्ले से तमाम स्थानों पर सुविधा शुल्क देते हुए अपने गंतव्य तक पहुंच जाते हैं। अधिकांश समय भारी वाहन सभी तरह के हाइवे पर एक ही लेन में चलते है। इस वजह से उस लेन पर सड़क का वह भाग धंस जाता है जहां टायरों का दबाव रहता है। दूर से देखने पर वह किसी रेल पटरी की तरह ही लगता है।
संभागीय परिवहन निगम के आंकड़ों पर गौर करें तो सभी तरह के वाहनों पर माल लोड करने की एक निर्धारित सीमा होती है। मसलन अगर किसी ट्रक में छह पहिये हैं तो उसमें अधिकतम 15 टन तक का माल लोड किया जा सकता है। इसी तरह 10 चक्के वाले में 25 टन, 12 चक्के वाले वाहन में 31 टन का माल लोड किया जा सकता है। लेकिन तमाम ट्रकों में क्षमता से दो गुना वाहन लोड कर किए जाने से सड़कों के धंसने का सिलसिला रुक नहीं पा रहा है।
‘ इलाहाबाद में समय-समय पर आरटीओ के अफसरों एवं कर्मचारियों द्वारा ओवरलोड वाहनों की धरपकड़ की जाती रहती है। औसतन हर माह 200 से 250 के बीच ओवरलोड वाहनों को पकड़ा जाता है। ’
0 आरके सिंह, एआरटीओ इलाहाबाद।
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पीडब्ल्यूडी की ओर से बनाई जा रही सड़कों पर अधिकतम 15 टन भार की क्षमता वाले वाहन ले जाए जा सकते हैं। यही उसका निर्धारित और उच्चतम मानक है। विभाग सड़कों का निर्माण उस पर चलने वाले ट्रैफिक को देखते हुए करता है। जैसे गांवों में बनाई जाने वाली 27.50 सेमी की सड़कों पर भी 15 टन की क्षमता वाले वाहन ले जाए जा सकते हैं लेकिन ऐसे भारी वाहन दो-चार बार ही आएंगे-जाएंगे तभी सड़क बची रहेगी लेकिन जैसे ही भारी वाहनों की संख्या बढ़ेगी। उनका आना-जाना बढ़ेगा सड़क टूट जाएगी, बैठ जाएगी। ऐसे ही शहर की सड़कों का भी हाल है।
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अधिशासी अभियंता एके अत्री कहते हैं शहर की सड़कों पर भी 10 से 15 टन की क्षमता के भार वाले वाहन ही ले जाए जा सकते हैं। इससे अधिक लोड ले जाने पर सड़कें टूट जाएंगी। शहर की सड़कों पर 15 टन से अधिक भार वाले वाहन ले जाए जा रहे हैं। इससे सड़कें बुरी तरह से टूट रही हैं। सड़कों पर गड्ढा हो रहा है। चीफ इंजीनियर एचएन पांडेय कहते हैं कि इस बारे में आरटीओ से कई बार कहा गया है कि ओवरलोडिंग बंद कराएं लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
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पीडब्ल्यूडी की ओर से सड़कों के निर्माण का मानक वर्ष 1980 के पहले बनाया गया है। सहायक अभियंता मनीष यादव, अखिलेश कुमार कहते हैं कि जिस तरह से नए वाहन बढ़े हैं और उस पर माल ले जाने की भार क्षमता बढ़ी है, उस तरह से सड़कों के निर्माण के मानक नहीं बदले गए है। पुराने नियम बहाल रहने से भी नए वाहनों के अनुरूप सड़कें नहीं बन पा रही हैं।
शेरशाह सूरी मार्ग जिसे अब हम जीटी रोड के नाम से जानते हैं, देश के सर्वाधिक व्यस्त मार्गों में से एक है। इलाहाबाद से गुजरने वाले इस हाईवे पर कई स्थानों पर सड़क की एक लेन बड़े वाहनों की आवाजाही से काफी धंस गई है। हर साल लाखों की संख्या में इस मार्ग से गुजरने वाले वाहनों से टोल टैक्स भी लिया जाता है ताकि समय-समय पर इस हाइवे की मरम्मत आदि के कार्य किए जा सके। बावजूद इसके सवाल यह है कि सड़क बनने के कुछ दिनों बाद ही हाइवे की एक लेन धंस जा रही है। यह स्थिति सिर्फ कानपुर-इलाहाबाद-वाराणसी मार्ग की ही नहीं, बल्कि इलाहाबाद-रीवां, इलाहाबाद-फैजाबाद आदि राष्ट्रीय राजमार्ग की भी है।
जानकारों की मानें तो ओवरलोड वाहनों की आवाजाही की रोकथाम न होने की वजह नेशनल हाइवे का यह हाल है। दरअसल बहुत से कारोबारी ट्रकों की क्षमता से काफी ज्यादा माल उसमें लोड कर देते हैं। संभागीय परिवहन विभाग के कुछ कर्मचारियों की सांठगांठ से हाइवे पर इन वाहनों की चेकिंग नहीं होती और ये धड़ल्ले से तमाम स्थानों पर सुविधा शुल्क देते हुए अपने गंतव्य तक पहुंच जाते हैं। अधिकांश समय भारी वाहन सभी तरह के हाइवे पर एक ही लेन में चलते है। इस वजह से उस लेन पर सड़क का वह भाग धंस जाता है जहां टायरों का दबाव रहता है। दूर से देखने पर वह किसी रेल पटरी की तरह ही लगता है।
संभागीय परिवहन निगम के आंकड़ों पर गौर करें तो सभी तरह के वाहनों पर माल लोड करने की एक निर्धारित सीमा होती है। मसलन अगर किसी ट्रक में छह पहिये हैं तो उसमें अधिकतम 15 टन तक का माल लोड किया जा सकता है। इसी तरह 10 चक्के वाले में 25 टन, 12 चक्के वाले वाहन में 31 टन का माल लोड किया जा सकता है। लेकिन तमाम ट्रकों में क्षमता से दो गुना वाहन लोड कर किए जाने से सड़कों के धंसने का सिलसिला रुक नहीं पा रहा है।
‘ इलाहाबाद में समय-समय पर आरटीओ के अफसरों एवं कर्मचारियों द्वारा ओवरलोड वाहनों की धरपकड़ की जाती रहती है। औसतन हर माह 200 से 250 के बीच ओवरलोड वाहनों को पकड़ा जाता है। ’
0 आरके सिंह, एआरटीओ इलाहाबाद।