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गौरवशाली परंपराओं के साथ रहा स्वर्णिम अतीत
योगेंद्र मिश्र, अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 14 Mar 2016 01:58 AM IST
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हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद उच्च न्यायालय का स्वर्णिम अतीत गौरवशाली परंपराओं से समृद्ध है। यहां की उच्च परंपराओं ने न्याय जगत में मिसाल कायम की है। सादगी और विद्वता यहां के वकीलों की खूबी रही है। वर्ष 1866 में यहां छह न्यायाधीशों और छह अधिवक्ताओं से शुरुआत हुई। आज यहां जजों के 160 पद स्वीकृत हैं जबकि बार में 15,000 अधिवक्ता पंजीकृत है। यह देश भर की न्यायपालिका में वकीलों और जजों की सर्वाधिक संख्या है। हाईकोर्ट के पास अपना संग्रहालय है जिसमें महत्वपूर्ण फैसलों, फोटोग्राफ, ड्रेस, फर्नीचर और महारानी विक्टोरिया की ओर से जारी मूल चार्टर रखा गया है।
हाईकोर्ट का शताब्दी वर्ष 1966 में मनाया गया था जिसमें तत्कालीन राष्ट्रपति सर्वपल्ली डा.राधाकृष्णन बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए थे जबकि जस्टिस नसीरुल्लाह बेग मुख्य न्यायाधीश थे। शताब्दी वर्ष में डाक विभाग ने हाईकोर्ट पर 15 पैसे का डाक टिकट जारी किया था।
नारी सशक्तिकरण की दिशा में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मिसाल कायम की है। इसी हाईकोर्ट में देश की पहली महिला अधिवक्ता करनीलिया सोराबजी का 24 अगस्त 1921 में पंजीकृत किया गया। वह भी तब जब अन्य राज्यों के उच्च न्यायालयों ने किसी महिला को अधिवक्ता के रूप में पंजीकृत करने से इंकार कर दिया था। तत्कालीन प्रशासनिक समिति (इंग्लिश कमेटी) ने चीफ जस्टिस ग्रीमवुड मियरर्स के नेतृत्व में आठ जजों की कमेटी ने प्रथम महिला अधिवक्ता के रूप में करनीलिया के पंजीकरण की अनुमति दी।
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हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस लाइब्रेरी भी अपने आप में बेमिसाल है। लाइब्रेरी में एक लाख 75 हजार कमेंट्री, एक्ट, मैन्युअल, रिपोर्ट और डाइजेस्ट के अलावा एक लाख 20 हजार बाउंड जनरल हैं जो वर्ष 1901 से संग्रहीत किए गए हैं। इसके अलावा पांच हजार बाउंड गजेट के वाल्यूम भी रखे गए हैं। इनके अलावा लॉ रिपोर्ट, पत्रिकाओं और समाचार पत्रों का भी संग्रह है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट इकलौता ऐसा न्यायालय है जिसने किसी पदासीन प्रधानमंत्री के खिलाफ फैसला सुनाते हुए उनको अपदस्थ करने का आदेश दिया था। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ राजनारायण द्वारा दाखिल चुनाव याचिका पर हाईकोर्ट ने इंदिरा गांधी का निर्वाचन रद्द कर करते हुए उनके चुनाव लड़ने पर छह वर्ष तक के लिए रोक लगा दी थी।
कल्याण सिंह सरकार को रातोंरात अपदस्थ करके तत्कालीन राज्यपाल रोमेश भंडारी ने जगदंबिका पाल को मुख्यमंत्री बना दिया था। राज्यपाल के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्यपाल के फैसले को रद्द करते हुए कल्याण सिंह को दोबारा मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंपी।
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हाईकोर्ट का शताब्दी वर्ष 1966 में मनाया गया था जिसमें तत्कालीन राष्ट्रपति सर्वपल्ली डा.राधाकृष्णन बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए थे जबकि जस्टिस नसीरुल्लाह बेग मुख्य न्यायाधीश थे। शताब्दी वर्ष में डाक विभाग ने हाईकोर्ट पर 15 पैसे का डाक टिकट जारी किया था।
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नारी सशक्तिकरण की दिशा में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मिसाल कायम की है। इसी हाईकोर्ट में देश की पहली महिला अधिवक्ता करनीलिया सोराबजी का 24 अगस्त 1921 में पंजीकृत किया गया। वह भी तब जब अन्य राज्यों के उच्च न्यायालयों ने किसी महिला को अधिवक्ता के रूप में पंजीकृत करने से इंकार कर दिया था। तत्कालीन प्रशासनिक समिति (इंग्लिश कमेटी) ने चीफ जस्टिस ग्रीमवुड मियरर्स के नेतृत्व में आठ जजों की कमेटी ने प्रथम महिला अधिवक्ता के रूप में करनीलिया के पंजीकरण की अनुमति दी।
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हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस लाइब्रेरी भी अपने आप में बेमिसाल है। लाइब्रेरी में एक लाख 75 हजार कमेंट्री, एक्ट, मैन्युअल, रिपोर्ट और डाइजेस्ट के अलावा एक लाख 20 हजार बाउंड जनरल हैं जो वर्ष 1901 से संग्रहीत किए गए हैं। इसके अलावा पांच हजार बाउंड गजेट के वाल्यूम भी रखे गए हैं। इनके अलावा लॉ रिपोर्ट, पत्रिकाओं और समाचार पत्रों का भी संग्रह है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट इकलौता ऐसा न्यायालय है जिसने किसी पदासीन प्रधानमंत्री के खिलाफ फैसला सुनाते हुए उनको अपदस्थ करने का आदेश दिया था। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ राजनारायण द्वारा दाखिल चुनाव याचिका पर हाईकोर्ट ने इंदिरा गांधी का निर्वाचन रद्द कर करते हुए उनके चुनाव लड़ने पर छह वर्ष तक के लिए रोक लगा दी थी।
कल्याण सिंह सरकार को रातोंरात अपदस्थ करके तत्कालीन राज्यपाल रोमेश भंडारी ने जगदंबिका पाल को मुख्यमंत्री बना दिया था। राज्यपाल के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्यपाल के फैसले को रद्द करते हुए कल्याण सिंह को दोबारा मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंपी।