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सड़क निर्माण में करोड़ों का घपला
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Wed, 09 Mar 2016 02:08 AM IST
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एजी आफिस
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत इलाहाबाद सहित कई जिलों में करोड़ों रुपये का घोटाला किया गया। मानकों की धज्जियां उड़ाकर सड़कें बनाई गईं। भारतीय रोड कांग्रेस के नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया गया। सड़कों को निर्माण इस हिसाब से होना था कि कम से कम दस साल तक उनकी आयु हो। इसी हिसाब से रकम भी जारी की गई लेकिन लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अफसर और ठेकेदार इस रकम का बड़ा हिस्सा पचा गए। नतीजा कि सड़कों पर एक साल के भीतर ही बड़े-बड़े गड्ढे हो गए। यह खुलासा मंगलवार को जनरल एवं सोशल सेक्टर ऑडिट उत्तर प्रदेश के प्रधान महालेखाकार पीके कटारिया ने सत्यनिष्ठा भवन में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में किया।
प्रधान महालेखाकार ओर से मार्च 2015 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के लि पेश की गई ऑडिट रिपोर्ट में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। जिन सड़कों के निर्माण में घोटाला हुआ, उनमें इलाहाबाद की सड़कें भी शामिल हैं। भारतीय रोड कांग्रेस की विशिष्टि-एसपी 72-2007 के अनुसार सड़क पर बिछाए जाने वाले पेवमेंट की मोटाई का निर्धारण व्यावसायिक वाहनों की अपेक्षित संख्या एवं उनके कुल भार के आधार पर होता है। साथ ही कैलिफोर्निया बीयरिंग अनुपात के रूप में प्रदर्शित सब ग्रेड (मिट्टी) की शक्ति के आधार पर भी पेवमेंट की मोटाई तय की जानी थी। ऑडिट के दौरान प्रदेश में एक अरब 37 करोड़ एक लाख रुपये की लागत से निर्मित 111 सड़कों की जांच की गई। इनमें इलाहाबाद की भी 11 सड़कें शामिल हैं, जिनके निर्माण पर 19 करोड़ 21 लाख 80 हजार रुपये की लागत आई।
ऑडिट जांच में पाया गया कि नॉन बिटुमिनस क्रस्ट की मोटाई भारतीय रोड कांग्रेस के निर्धारित मानक के मुकाबले चार से 35 फीसदी तक कम थी। इसके अलावा सड़क निर्माण में वाटर बाउंड मैकडम की तीन परतें बिछाई जानी थीं लेकिन सिर्फ दो परतें बिछाई गईं। इस पर ऑडिट आपत्ति लगी तो शासन की ओर से जवाब दिया गया कि राष्ट्रीय ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण ने अपनी बैठक में वाटर बाउंड मैकडम की मात्र दो परतें बिछाने के निर्देश दिए थे लेकिन जांच आगे बढ़ी तो सामने आया कि राष्ट्रीय ग्र्रामीण सड़क विकास अभिकरण की ओर से वाटर बाउंड मैकडम की तीसरी परत बिछाने पर कोई रोक नहीं लगाई गई थी। सीएजी की ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि मानकों के विपरीत निर्माण होने के कारण सड़कों का दस वर्ष पूरा करना मुश्किल होगा।
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प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत विभिन्न जिलों में ऑडिट जांच के दौरान मानकों के विपरीत पेवमेंट की मोटाई चार से 35 फीसदी तक कम पाई गई। इलाहाबाद में सभी 11 सड़कों पर पेवमेंट की मोटाई 35 फीसदी कम मिली। इनमें जीटी रोड लाल बाजार से दुल्हेपुर (एक से छह किमी), बड़ागांव से मऊआइमा (सात से 12 किमी), बड़ागांव से मऊआइमा (एक से छह किमी), रिखीपुर से शुकुलपुर (सात से 13 किमी), किशोरा से लाक्षागृह (सात किमी), सोरांव होलागढ़ रोड से शास्त्री नगर (9.25 किमी), रिखीपुर से शकुलपुर (एक से छह किमी), अमोलवा रोड से सिरसा (आठ से 15 किमी), एसपीएच रोड-अमोलवा से सिरसा (एक से सात किमी), बासुपुर से टोडरपुर (एक से नौ किमी) और जीटी रोड (लाला बाजार) से दुल्हेपुर (7 से 12 किमी) तक की सड़क शामिल है।
ऑडिट रिपोर्ट में इस बात भी खुलासा किया गया है कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनाई गईं सड़कों की गुणवत्ता जांच में भी घपला किया गया। गुणवत्ता की जांच 60 प्रकार से किए जाने का प्रावधान है लेकिन सड़क निर्माण की गणवत्ता की जांच महज 13 प्रकार से की गई। यानी सड़कों की 85 फीसदी जांच हुई ही नहीं।
ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक जिन जनपदों में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनाई गई सड़कों में भारी अनियमितता मिली है, उनमें इलाहाबाद सहित आगरा, चंदौली, देवरिया, इटावा, फतेहपुर, जालौन, कासगंज, कुशीनगर, महाराजगंज, मुरादाबाद, सीतापुर, शाहजहांपुर जिला शामिल है।
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प्रधान महालेखाकार ओर से मार्च 2015 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के लि पेश की गई ऑडिट रिपोर्ट में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। जिन सड़कों के निर्माण में घोटाला हुआ, उनमें इलाहाबाद की सड़कें भी शामिल हैं। भारतीय रोड कांग्रेस की विशिष्टि-एसपी 72-2007 के अनुसार सड़क पर बिछाए जाने वाले पेवमेंट की मोटाई का निर्धारण व्यावसायिक वाहनों की अपेक्षित संख्या एवं उनके कुल भार के आधार पर होता है। साथ ही कैलिफोर्निया बीयरिंग अनुपात के रूप में प्रदर्शित सब ग्रेड (मिट्टी) की शक्ति के आधार पर भी पेवमेंट की मोटाई तय की जानी थी। ऑडिट के दौरान प्रदेश में एक अरब 37 करोड़ एक लाख रुपये की लागत से निर्मित 111 सड़कों की जांच की गई। इनमें इलाहाबाद की भी 11 सड़कें शामिल हैं, जिनके निर्माण पर 19 करोड़ 21 लाख 80 हजार रुपये की लागत आई।
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ऑडिट जांच में पाया गया कि नॉन बिटुमिनस क्रस्ट की मोटाई भारतीय रोड कांग्रेस के निर्धारित मानक के मुकाबले चार से 35 फीसदी तक कम थी। इसके अलावा सड़क निर्माण में वाटर बाउंड मैकडम की तीन परतें बिछाई जानी थीं लेकिन सिर्फ दो परतें बिछाई गईं। इस पर ऑडिट आपत्ति लगी तो शासन की ओर से जवाब दिया गया कि राष्ट्रीय ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण ने अपनी बैठक में वाटर बाउंड मैकडम की मात्र दो परतें बिछाने के निर्देश दिए थे लेकिन जांच आगे बढ़ी तो सामने आया कि राष्ट्रीय ग्र्रामीण सड़क विकास अभिकरण की ओर से वाटर बाउंड मैकडम की तीसरी परत बिछाने पर कोई रोक नहीं लगाई गई थी। सीएजी की ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि मानकों के विपरीत निर्माण होने के कारण सड़कों का दस वर्ष पूरा करना मुश्किल होगा।
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प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत विभिन्न जिलों में ऑडिट जांच के दौरान मानकों के विपरीत पेवमेंट की मोटाई चार से 35 फीसदी तक कम पाई गई। इलाहाबाद में सभी 11 सड़कों पर पेवमेंट की मोटाई 35 फीसदी कम मिली। इनमें जीटी रोड लाल बाजार से दुल्हेपुर (एक से छह किमी), बड़ागांव से मऊआइमा (सात से 12 किमी), बड़ागांव से मऊआइमा (एक से छह किमी), रिखीपुर से शुकुलपुर (सात से 13 किमी), किशोरा से लाक्षागृह (सात किमी), सोरांव होलागढ़ रोड से शास्त्री नगर (9.25 किमी), रिखीपुर से शकुलपुर (एक से छह किमी), अमोलवा रोड से सिरसा (आठ से 15 किमी), एसपीएच रोड-अमोलवा से सिरसा (एक से सात किमी), बासुपुर से टोडरपुर (एक से नौ किमी) और जीटी रोड (लाला बाजार) से दुल्हेपुर (7 से 12 किमी) तक की सड़क शामिल है।
ऑडिट रिपोर्ट में इस बात भी खुलासा किया गया है कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनाई गईं सड़कों की गुणवत्ता जांच में भी घपला किया गया। गुणवत्ता की जांच 60 प्रकार से किए जाने का प्रावधान है लेकिन सड़क निर्माण की गणवत्ता की जांच महज 13 प्रकार से की गई। यानी सड़कों की 85 फीसदी जांच हुई ही नहीं।
ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक जिन जनपदों में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनाई गई सड़कों में भारी अनियमितता मिली है, उनमें इलाहाबाद सहित आगरा, चंदौली, देवरिया, इटावा, फतेहपुर, जालौन, कासगंज, कुशीनगर, महाराजगंज, मुरादाबाद, सीतापुर, शाहजहांपुर जिला शामिल है।