{"_id":"6a953404dac67b6a320a6f44","slug":"supreme-court-dismisses-pleas-challenging-high-court-order-refuse-bail-accused-of-goa-nightclub-fire-2026-08-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"गोवा नाइटक्लब अग्निकांड: आरोपियों को सुप्रीम झटका, बरकरार रखा बॉम्बे हाईकोर्ट का जमानत रद्द करने का आदेश","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
गोवा नाइटक्लब अग्निकांड: आरोपियों को सुप्रीम झटका, बरकरार रखा बॉम्बे हाईकोर्ट का जमानत रद्द करने का आदेश
Mon, 31 Aug 2026 01:28 PM IST
Devesh Tripathi
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: Devesh Tripathi
Updated Mon, 31 Aug 2026 01:28 PM IST
सार
गोवा के चर्चित नाइटक्लब अग्निकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों को राहत देने से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज कर दीं, जिसमें तीन आरोपियों की जमानत समाप्त कर दी गई थी। अदालत ने तीनों को दो सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया और निचली अदालत से मुकदमे की कार्यवाही तेज करने को कहा।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 2025 के गोवा नाइटक्लब अग्निकांड मामले में तीन आरोपियों को दी गई जमानत रद्द करने के बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज कर दीं। इस अग्निकांड में 25 लोगों की मौत हुई थी।
न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने नाइटक्लब के मालिक सौरव लूथरा, गौरव लूथरा और उनके कारोबारी साझेदार अजय गुप्ता को दो सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत को दिए क्या निर्देश?
शीर्ष अदालत ने निचली अदालत को मामले की सुनवाई में तेजी लाने का भी निर्देश दिया। छह दिसंबर 2025 को अर्पोरा स्थित बिर्च बाय रोमियो लेन नाइटक्लब में भीषण आग लग गई थी। हादसे में 25 लोगों की मौत हो गई थी और 50 अन्य घायल हुए थे।
विज्ञापन
18 अगस्त को बॉम्बे हाईकोर्ट ने तीनों आरोपियों की जमानत रद्द कर दी थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि निचली अदालत ने जांच के दौरान जुटाई गई सामग्री पर उचित तरीके से विचार नहीं किया और यह मानने में गलती की कि अपराध हत्या या डकैती जितना गंभीर नहीं था।
हाईकोर्ट ने किस आधार पर रद्द की थी आरोपियों की जमानत?
हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री से संकेत मिलता है कि रेस्तरां बिना जरूरी लाइसेंस के संचालित हो रहा था और उसका ढांचा अनधिकृत था। अदालत ने यह भी कहा था कि आरोपियों और उनके साझेदारों को परिसर में पर्याप्त सुरक्षा उपायों के बिना आग से जुड़े प्रदर्शन करने के जोखिम की कथित तौर पर जानकारी थी।
लूथरा बंधु और अजय गुप्ता 'एम/एस बीइंग जीएस हॉस्पिटैलिटी अर्पोरा एलएलपी' में साझेदार थे। यही कंपनी नाइटक्लब का संचालन करती थी। तीनों को इस साल अप्रैल में निचली अदालत ने जमानत दी थी। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में तीनों आरोपियों को दो सप्ताह के भीतर सत्र अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था। गोवा सरकार ने आरोपियों को जमानत देने के सत्र अदालत के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
विज्ञापन
न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने नाइटक्लब के मालिक सौरव लूथरा, गौरव लूथरा और उनके कारोबारी साझेदार अजय गुप्ता को दो सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत को दिए क्या निर्देश?
शीर्ष अदालत ने निचली अदालत को मामले की सुनवाई में तेजी लाने का भी निर्देश दिया। छह दिसंबर 2025 को अर्पोरा स्थित बिर्च बाय रोमियो लेन नाइटक्लब में भीषण आग लग गई थी। हादसे में 25 लोगों की मौत हो गई थी और 50 अन्य घायल हुए थे।
विज्ञापन
18 अगस्त को बॉम्बे हाईकोर्ट ने तीनों आरोपियों की जमानत रद्द कर दी थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि निचली अदालत ने जांच के दौरान जुटाई गई सामग्री पर उचित तरीके से विचार नहीं किया और यह मानने में गलती की कि अपराध हत्या या डकैती जितना गंभीर नहीं था।
हाईकोर्ट ने किस आधार पर रद्द की थी आरोपियों की जमानत?
हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री से संकेत मिलता है कि रेस्तरां बिना जरूरी लाइसेंस के संचालित हो रहा था और उसका ढांचा अनधिकृत था। अदालत ने यह भी कहा था कि आरोपियों और उनके साझेदारों को परिसर में पर्याप्त सुरक्षा उपायों के बिना आग से जुड़े प्रदर्शन करने के जोखिम की कथित तौर पर जानकारी थी।
लूथरा बंधु और अजय गुप्ता 'एम/एस बीइंग जीएस हॉस्पिटैलिटी अर्पोरा एलएलपी' में साझेदार थे। यही कंपनी नाइटक्लब का संचालन करती थी। तीनों को इस साल अप्रैल में निचली अदालत ने जमानत दी थी। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में तीनों आरोपियों को दो सप्ताह के भीतर सत्र अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था। गोवा सरकार ने आरोपियों को जमानत देने के सत्र अदालत के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।