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ऋचा के प्रवेश मामले में गठित हुई जांच कमेटी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 08 Mar 2016 02:28 AM IST
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इलाहाबाद यूनिवर्सिटी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह के दाखिले को लेकर शुरू विवाद की विस्तृत जांच के लिए हाई पावर कमेटी बना दी गई है। कुलपति के निर्देश पर प्रो. जटाशंकर की अध्यक्षता में गठित कमेटी प्रवेश से संबंधित सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच करेगी। कमेटी प्रवेश में गड़बड़ी कैसे और क्यों हुई, दोषी कौन है, कार्रवाई क्या होगी आदि बिंदुओं पर रिपोर्ट तैयार करेगी।
ऋचा सिंह ग्लोबलाइजेशन विभाग में शोधछात्रा हैं। छात्रनेता रजनीश सिंह ऋषू की शिकायत पर कुलपति ने छात्रसंघ अध्यक्ष के प्रवेश पर डीन आर्ट्स से रिपोर्ट मांगी थी। डीन आर्ट्स ने कुलपति को रिपोर्ट सौंपी है कि प्रवेश में आरक्षण नियमों का पालन नहीं हुआ है। आरक्षित सीट पर ऋचा का प्रवेश कर लिया गया है, लेकिन डीन आर्ट्स ने जिस दिन रिपोर्ट सौंपी थी उसी दिन कुलपति शहर से बाहर चले गए। सोमवार को लौटने पर उन्होंने रिपोर्ट पढ़ी और उसकी व्यापक जांच के लिए प्रो. जटाशंकर की अध्यक्षता में कमेटी बना दी है। कमेटी में डीएसडब्ल्यू प्रो. हर्ष कुमार, प्रो. शांति सुंदरम आदि शामिल हैं। कुलपति प्रो. रतनलाल हांगलू ने बताया कि रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने ऋचा सिंह के उत्पीड़न के आरोप का भी खंडन किया। उनका कहना है कि ऋचा के प्रवेश का प्रकरण पहले से चल रहा है। उन्होंने शिकायत पर डीन से रिपोर्ट मांगी थी। डीन ने प्रवेश में नियमों की अनदेखी की बात कही है। उन्होंने छात्र-छात्राओं से भी अपील की कि इस मुद्दे पर बेवजह विवाद न करें।
उधर, छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह ने इस मुद्दे पर कोई भी निर्णय लेने से पहले उनका पक्ष सुनने की मांग की है। ऋचा का कहना है कि उनका प्रवेश सही है तथा विधिक परामर्श के बाद उन्हें दाखिला दिया गया। कहा कि यदि उनका पक्ष नहीं सुना गया तो वह आंदोलन के लिए बाध्य हाेंगी। उन्होंने छात्रसंघ के अन्य पदाधिकारियाें से भी राजनीतिक विद्वेष की भावना से कार्य करने के बजाय छात्र हित में आगे आने की अपील की है।
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छात्रनेता रजनीश सिंह ने छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह के दाखिले के मामले में कुलपति की ओर से हाई पावर जांच कमेटी गठित करने के फैसले को राजनीतिक दबाव में लिया गया फैसला बताया। रजनीश का कहना है कि डीन आर्ट्स जो विश्वविद्यालय के कुलपति भी रह चुके हैं, उन्होंने स्पष्ट लिखा है कि प्रवेश में आरक्षण का पालन नहीं हुआ है। फिर कमेटी बनाया जाना समझ से परे है। राजनीतिक दबाव में पूरे मामले को टालने की कोशिश की जा रही है। रजनीश ने चेतावनी दी कि किसी दबाव में कुलपति ने फैसला लिया तो वह हाईकोर्ट में जाने के लिए बाध्य होंगे। पिछड़ों की राजनीति का आरोप लगाते हुए रजनीश ने सपा नेताओं से भी जवाब मांगा है कि आखिर इस मुद्दे पर वे मौन क्यों हैं।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष के प्रवेश को लेकर शुरू हुआ विवाद तुल पकड़ने लगा है। छात्र युवा संघर्ष समिति की ओर से इस मामले में मंगलवार को कुलपति को ज्ञापन साैंपकर राजनीतिक हस्तक्षेप बंद करने की मांग की जाएगी। ज्ञापन अंजनी कुमार मिश्रा के नेतृत्व में सौंपा जाएगा। छात्र स्वतंत्रता संघर्ष की सोमवार को हुई बैठक में विश्वविद्यालय प्रशासन पर एबीवीपी के दबाव में काम करने का आरोप लगाया गया। सदस्यों का कहना था कि छात्रसंघ अध्यक्ष के प्रवेश में यदि किसी तरह की अनियमितता की बात कही जा रही है तो इसके लिए विश्वविद्यालय प्रशासन दोषी है। ऋचा के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई पर उन्होंने आंदोलन की चेतावनी दी।
बैठक में सौरभ जायसवाल, मोहम्मद जाबिर, अतीश कुमार सिन्हा, रत्नेश शुक्ला आदि मौजूद रहे। एसएफआई के जिला संयोजक विकास स्वरूप ने भी विश्वविद्यालय प्रशासन पर आरएसएस और एबीवीपी से प्रभावित होने का आरोप लगाया। इससे ईतर एबीवीपी की बैठक में ऋचा सिंह तथा अन्य संगठनों के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया गया। कार्यकर्ताओं का कहना था कि ऋचा सिंह के प्रवेश को लेकर शुरू विवाद से एबीवीपी का कोई लेना-देना नहीं है। उनके खिलाफ छात्र नेता रजनीश सिंह ने शिकायत की है, जिनका संगठन से कोई संबंध नहीं है। सदस्यों ने वामपंथी-भ्रष्टाचार के गठजोड़ से परिसर का माहौल बिगड़ने का भी आरोप लगाया। साथ ही विश्वविद्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार, अनियमितता, तानाशाही के खिलाफ संषर्घ की घोषणा की। बैठक में प्रदेश मंत्री देवेंद्र भइया, डॉ.उमेश द्विवेदी, शैलेंद्र मौर्य, अजीव उपाध्याय आदि मौजूद रहे।
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ऋचा सिंह ग्लोबलाइजेशन विभाग में शोधछात्रा हैं। छात्रनेता रजनीश सिंह ऋषू की शिकायत पर कुलपति ने छात्रसंघ अध्यक्ष के प्रवेश पर डीन आर्ट्स से रिपोर्ट मांगी थी। डीन आर्ट्स ने कुलपति को रिपोर्ट सौंपी है कि प्रवेश में आरक्षण नियमों का पालन नहीं हुआ है। आरक्षित सीट पर ऋचा का प्रवेश कर लिया गया है, लेकिन डीन आर्ट्स ने जिस दिन रिपोर्ट सौंपी थी उसी दिन कुलपति शहर से बाहर चले गए। सोमवार को लौटने पर उन्होंने रिपोर्ट पढ़ी और उसकी व्यापक जांच के लिए प्रो. जटाशंकर की अध्यक्षता में कमेटी बना दी है। कमेटी में डीएसडब्ल्यू प्रो. हर्ष कुमार, प्रो. शांति सुंदरम आदि शामिल हैं। कुलपति प्रो. रतनलाल हांगलू ने बताया कि रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने ऋचा सिंह के उत्पीड़न के आरोप का भी खंडन किया। उनका कहना है कि ऋचा के प्रवेश का प्रकरण पहले से चल रहा है। उन्होंने शिकायत पर डीन से रिपोर्ट मांगी थी। डीन ने प्रवेश में नियमों की अनदेखी की बात कही है। उन्होंने छात्र-छात्राओं से भी अपील की कि इस मुद्दे पर बेवजह विवाद न करें।
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उधर, छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह ने इस मुद्दे पर कोई भी निर्णय लेने से पहले उनका पक्ष सुनने की मांग की है। ऋचा का कहना है कि उनका प्रवेश सही है तथा विधिक परामर्श के बाद उन्हें दाखिला दिया गया। कहा कि यदि उनका पक्ष नहीं सुना गया तो वह आंदोलन के लिए बाध्य हाेंगी। उन्होंने छात्रसंघ के अन्य पदाधिकारियाें से भी राजनीतिक विद्वेष की भावना से कार्य करने के बजाय छात्र हित में आगे आने की अपील की है।
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छात्रनेता रजनीश सिंह ने छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह के दाखिले के मामले में कुलपति की ओर से हाई पावर जांच कमेटी गठित करने के फैसले को राजनीतिक दबाव में लिया गया फैसला बताया। रजनीश का कहना है कि डीन आर्ट्स जो विश्वविद्यालय के कुलपति भी रह चुके हैं, उन्होंने स्पष्ट लिखा है कि प्रवेश में आरक्षण का पालन नहीं हुआ है। फिर कमेटी बनाया जाना समझ से परे है। राजनीतिक दबाव में पूरे मामले को टालने की कोशिश की जा रही है। रजनीश ने चेतावनी दी कि किसी दबाव में कुलपति ने फैसला लिया तो वह हाईकोर्ट में जाने के लिए बाध्य होंगे। पिछड़ों की राजनीति का आरोप लगाते हुए रजनीश ने सपा नेताओं से भी जवाब मांगा है कि आखिर इस मुद्दे पर वे मौन क्यों हैं।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष के प्रवेश को लेकर शुरू हुआ विवाद तुल पकड़ने लगा है। छात्र युवा संघर्ष समिति की ओर से इस मामले में मंगलवार को कुलपति को ज्ञापन साैंपकर राजनीतिक हस्तक्षेप बंद करने की मांग की जाएगी। ज्ञापन अंजनी कुमार मिश्रा के नेतृत्व में सौंपा जाएगा। छात्र स्वतंत्रता संघर्ष की सोमवार को हुई बैठक में विश्वविद्यालय प्रशासन पर एबीवीपी के दबाव में काम करने का आरोप लगाया गया। सदस्यों का कहना था कि छात्रसंघ अध्यक्ष के प्रवेश में यदि किसी तरह की अनियमितता की बात कही जा रही है तो इसके लिए विश्वविद्यालय प्रशासन दोषी है। ऋचा के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई पर उन्होंने आंदोलन की चेतावनी दी।
बैठक में सौरभ जायसवाल, मोहम्मद जाबिर, अतीश कुमार सिन्हा, रत्नेश शुक्ला आदि मौजूद रहे। एसएफआई के जिला संयोजक विकास स्वरूप ने भी विश्वविद्यालय प्रशासन पर आरएसएस और एबीवीपी से प्रभावित होने का आरोप लगाया। इससे ईतर एबीवीपी की बैठक में ऋचा सिंह तथा अन्य संगठनों के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया गया। कार्यकर्ताओं का कहना था कि ऋचा सिंह के प्रवेश को लेकर शुरू विवाद से एबीवीपी का कोई लेना-देना नहीं है। उनके खिलाफ छात्र नेता रजनीश सिंह ने शिकायत की है, जिनका संगठन से कोई संबंध नहीं है। सदस्यों ने वामपंथी-भ्रष्टाचार के गठजोड़ से परिसर का माहौल बिगड़ने का भी आरोप लगाया। साथ ही विश्वविद्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार, अनियमितता, तानाशाही के खिलाफ संषर्घ की घोषणा की। बैठक में प्रदेश मंत्री देवेंद्र भइया, डॉ.उमेश द्विवेदी, शैलेंद्र मौर्य, अजीव उपाध्याय आदि मौजूद रहे।