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लोस चुनाव से पहले अखिलेश करेंगे एक और विस्तार!

Fri, 19 Jul 2013 11:28 AM IST
लखनऊ/ब्यूरो
लखनऊ/ब्यूरो Updated Fri, 19 Jul 2013 11:28 AM IST
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akhilesh cabinet expansion before lok sabha election

लोकसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की मंत्रिपरिषद का एक और विस्तार हो सकता है। इसमें क्षेत्रीय और जातीय संतुलन दूर करने की कोशिश हो सकती है।

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बहुत संभव है कि अगले कैबिनेट विस्तार और फेरबदल में कुछ लोगों की छुट्टी हो जाए और कुछ नए चेहरों को मौका दिया जाए। मंत्रिपरिषद में मुस्लिमों और अति पिछड़ों की नुमाइंदगी बढ़ने की भी संभावना है।
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अखिलेश ने किया मंत्रिमंडल का विस्तार
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समाजवादी पार्टी ने लोकसभा चुनाव की तैयारियों के लिए पूरी ताकत झोंक रखी है। पार्टी और सरकार के स्तर पर सारे फैसले चुनावी संभावनाओं को देखकर ही लिए जा रहे हैं।

बड़े स्तर पर लालबत्तियां बांटना भी इसी रणनीति का हिस्सा है। सूबे के कई जिलों में सपा के विधायक या विधान परिषद सदस्य नहीं है। ऐसे जिले पश्चिमी यूपी में ज्यादा है।

वहां कई प्रमुख नेताओं को लालबत्ती देकर राज्यमंत्री या कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया है। पूर्व मंत्री अनुराधा चौधरी और वीरेन्द्र सिंह ऐसे नेताओं में शुमार है। कैबिनेट मंत्री के दर्जे से नवाजे गए ये दोनों नेता वेस्ट यूपी के प्रभावशाली जाट और गुर्जर समाज से हैं।

यूपीः मंत्रिमंडल विस्तार में छिपी ये सियासत

लोकसभा चुनाव के नजरिये से पार्टी की मजबूती के लिए मुरादाबाद, बागपत, हापुड़, बिजनौर समेत पश्चिम के कई जिलों में पार्टी नेताओं को राज्यमंत्री स्तर के ओहदे दिए गए हैं। यही स्थिति मध्य यूपी और पूर्वांचल की है, जहां एक दर्जन से ज्यादा नेताओं को लालबत्तियां दी गई हैं।

इनमें पिछड़े, अति पिछड़ों से लेकर अल्पसंख्यक और सवर्ण तक शामिल हैं। इसके बावजूद अभी भी जातीय और क्षेत्रीय संतुलन बरकरार है। अच्छी खासी तादाद होने के बावजूद पश्चिमी यूपी में आजम खां के अलावा कोई मुस्लिम कैबिनेट मंत्री नहीं है।

कई राज्यमंत्री तरक्की पाकर कैबिनेट मिनिस्टर बनने के दावेदार हैं। हो सकता है कि अगले फेरबदल में मेरठ के शाहिद मंजूर, पीलीभीत के रियाज अहमद, अमरोहा के महबूब अली, संभल के इकबाल महमूद, बाराबंकी के फरीद महफूज किदवई जैसे नेताओं में एक-दो लोगों की कैबिनेट मंत्री बनने की मुराद पूरी हो जाए।


महिलाओं की हुई अनदेखी, यूथ एजेंडा भी भूले

दर्जन भर जिलों में खासा असर रखने वाली गुर्जर बिरादरी से रामसकल गुर्जर अकेले राज्यमंत्री हैं। हो सकता है कि लोकसभा चुनाव से पहले गुर्जर समाज में बेहतर संदेश के लिए उन्हें प्रमोट कर कैबिनेट मंत्री बना दिया जाए।

महिला कोटे से अभी कानपुर की अरुणा कोरी एकमात्र मंत्री है। बहुत संभव है कि शादाब फातिमा, मधु गुप्ता और डॉ. सरोजिनी अग्रवाल जैसी महिला विधायकों में किसी को मंत्री पद मिल जाए।

सपा की यह भी कोशिश होगी कि मंत्रिपरिषद में बुंदेलखंड को पर्याप्त नुमाइंदगी मिल जाए। अति पिछड़ों से भी एक-दो चेहरे शामिल किए जा सकते हैं। यह तभी संभव होगा जब कुछ लोगों को चुनाव से पहले संगठन में लगाया जाए और नए लोगों को सरकार चलाने का मौका दिया जाए।

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