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‘गुरुर से भरे हैं नए कलाकार, कैसे चलेंगे’
Lucknow
Updated Mon, 08 Jul 2013 05:30 AM IST
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लखनऊ। आज के दौर में जो लोग फिल्मों में कलाकार बन रहे हैं, उनमें और कुछ हो न हो गुरुर कूट-कूट कर भरा है। इसका असर सिनेमा रूपी कला पर भी पड़ रहा है। यह कहना है देश के जाने माने रंगमंच और फिल्मों के कलाकार टॉम ऑल्टर का। वे रविवार को सुहैल काकोरवी की पुस्तक ‘आमनामा’ का विमोचन के सिलसिले में लखनऊ में थे। इस मौके पर पत्रकारों से हुई बातचीत में उन्हाेंने कहा कि खुद उनमें भी कभी गुरुर आ जाता है, लेकिन वे इसे खत्म कर देते हैं।
नए जमाने के फिल्मी कलाकारों पर उन्होेंने कहा कि अगर वे गुरुर करते भी हैं तो इसका कम से कम कोई आधार तो होना चाहिए, जबकि वह आधारहीन होते हैं। उन्हाेंने अमिताभ बच्चन से बाकियों को सीखने की सलाह दी और कहा कि अमिताभ बच्चन अगर आज भी लोकप्रिय हैं और काम कर रहे हैं तो इसकी वजह है कि उन्हाेंने अपने काम को अपने गुरुर की वजह बनाया। टॉम ने बताया कि वे अपने काम के प्रति समर्पित रहे हैं, सुबह 9 बजे का शेड्यूल होता है तो वे 8:45 बजे ही सैट पर पहुंच जाते हैं। ऐसे में वे अपना रुतबा बनाकर उस पर बात करें तो समझ आता है। टॉम ऑल्टर ने फिल्मों में ही नहीं, साहित्य, राजनीति और कला जगत में भी यही स्थिति होने और इसकी वजह से इन क्षेत्रों पर पड़ रहे दुष्प्रभावों पर चिंता जताई। साथ ही उन्हाेंने बताया कि वे खुद भी अपने पर अहंकार करने लगते हैं, लेकिन वे ऐसी पीढ़ी से आते हैं जहां अहंकार करना खराब बात मानी जाती थी। ऐसे में नए जमाने के कलाकारों और अन्य क्षेत्रों के लोगों को भी समझना होगा कि उनकी स्वीकार्यता तभी बढ़ेगी जब वे आम लोगों से जुड़ने का कौशल रखेंगे।
दूसरी ओर जयशंकर प्रसाद सभागार में सुहैल काकोरवी द्वारा अवध, आम, शायरी और गालिब का संगम कराने की कोशिश करते हुए तैयार किए ‘आमनामा’ का टॉम ऑल्टर व लखनऊ विवि के वीसी प्रो. एसबी निमसे से विमोचन किया। कार्यक्रम का आगाज सभी अतिथियों के अभिनंदन से हुआ। अजीम हैदर जाफरी ने उन्हें कैलीग्राफी के नमूने भेंट किए। अदबी संस्थान के अध्यक्ष तरुण प्रकाश श्रीवास्तव ने बताया कि 7 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय आम दिवस और काकोरवी का जन्म दिवस भी है। कार्यक्रम में प्रो. मंजूर अहमद, संयोजक अनवर हबीब अल्वी, डॉ. साबरा हबीब, डॉ. मसीहउद्दीन आदि ने भी इस दौरान अपने विचार रखे।
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कसीदे-मसनवीं सहेजे
प्रो. शारिक रुदौलवी ने बताया कि उर्दू शायरी की कसीदा, मर्सिया, मसनवीं जैसी शैलियां तेजी से खत्म हो रही हैं। काकोरवी का आमनामा इन्हें मजबूती देता है। इन शेरों में कल्बे सादिक से लेकर सीएम अखिलेश यादव, पीएम मनमोहन सिंह और गालिब तक को शामिल किया गया है। आमनामा में 600 से अधिक शेर हैं। काकोरवी ने इस मौके पर बताया कि प्रशासनिक अधिकारी सुबूर उस्मानी ने आमनामा लिखने के लिए प्रेरित किया। इसमें गालिब के आम पर आधारित शेरों को जगह दी गई है। वहीं, अपने लिखे शेरों से आमों की प्रजातियों और ऐसे लोगों पर कसीदे और मसनवीं रचे हैं जो आमों को पसंद करते हैं।
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नए जमाने के फिल्मी कलाकारों पर उन्होेंने कहा कि अगर वे गुरुर करते भी हैं तो इसका कम से कम कोई आधार तो होना चाहिए, जबकि वह आधारहीन होते हैं। उन्हाेंने अमिताभ बच्चन से बाकियों को सीखने की सलाह दी और कहा कि अमिताभ बच्चन अगर आज भी लोकप्रिय हैं और काम कर रहे हैं तो इसकी वजह है कि उन्हाेंने अपने काम को अपने गुरुर की वजह बनाया। टॉम ने बताया कि वे अपने काम के प्रति समर्पित रहे हैं, सुबह 9 बजे का शेड्यूल होता है तो वे 8:45 बजे ही सैट पर पहुंच जाते हैं। ऐसे में वे अपना रुतबा बनाकर उस पर बात करें तो समझ आता है। टॉम ऑल्टर ने फिल्मों में ही नहीं, साहित्य, राजनीति और कला जगत में भी यही स्थिति होने और इसकी वजह से इन क्षेत्रों पर पड़ रहे दुष्प्रभावों पर चिंता जताई। साथ ही उन्हाेंने बताया कि वे खुद भी अपने पर अहंकार करने लगते हैं, लेकिन वे ऐसी पीढ़ी से आते हैं जहां अहंकार करना खराब बात मानी जाती थी। ऐसे में नए जमाने के कलाकारों और अन्य क्षेत्रों के लोगों को भी समझना होगा कि उनकी स्वीकार्यता तभी बढ़ेगी जब वे आम लोगों से जुड़ने का कौशल रखेंगे।
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दूसरी ओर जयशंकर प्रसाद सभागार में सुहैल काकोरवी द्वारा अवध, आम, शायरी और गालिब का संगम कराने की कोशिश करते हुए तैयार किए ‘आमनामा’ का टॉम ऑल्टर व लखनऊ विवि के वीसी प्रो. एसबी निमसे से विमोचन किया। कार्यक्रम का आगाज सभी अतिथियों के अभिनंदन से हुआ। अजीम हैदर जाफरी ने उन्हें कैलीग्राफी के नमूने भेंट किए। अदबी संस्थान के अध्यक्ष तरुण प्रकाश श्रीवास्तव ने बताया कि 7 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय आम दिवस और काकोरवी का जन्म दिवस भी है। कार्यक्रम में प्रो. मंजूर अहमद, संयोजक अनवर हबीब अल्वी, डॉ. साबरा हबीब, डॉ. मसीहउद्दीन आदि ने भी इस दौरान अपने विचार रखे।
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कसीदे-मसनवीं सहेजे
प्रो. शारिक रुदौलवी ने बताया कि उर्दू शायरी की कसीदा, मर्सिया, मसनवीं जैसी शैलियां तेजी से खत्म हो रही हैं। काकोरवी का आमनामा इन्हें मजबूती देता है। इन शेरों में कल्बे सादिक से लेकर सीएम अखिलेश यादव, पीएम मनमोहन सिंह और गालिब तक को शामिल किया गया है। आमनामा में 600 से अधिक शेर हैं। काकोरवी ने इस मौके पर बताया कि प्रशासनिक अधिकारी सुबूर उस्मानी ने आमनामा लिखने के लिए प्रेरित किया। इसमें गालिब के आम पर आधारित शेरों को जगह दी गई है। वहीं, अपने लिखे शेरों से आमों की प्रजातियों और ऐसे लोगों पर कसीदे और मसनवीं रचे हैं जो आमों को पसंद करते हैं।