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एआरटीओ के बेटे ने खुद को गोली से उड़ाया
Lucknow
Updated Fri, 12 Apr 2013 05:30 AM IST
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लखनऊ। गाजीपुर के सर्वोदयनगर मोहल्ले में डिप्रेशन के शिकार एआरटीओ के बेटे ने लाइसेंसी रिवाल्वर से खुद को गोली से उड़ा दिया। बृहस्पतिवार रात उसके वातानुकूलित कमरे से उसका शव मिला है। गोली दाहिनी कनपटी को चीरते हुए बाएं कनपटी से पार होकर दीवार में जा धंसी है। पुलिस की मानें तो मृतक कुर्सी पर बैठा था। फर्श पर रिवाल्वर पड़ी थी। सामने मेज पर आधी बोतल शराब, गिलास, सिगरेट व माचिस मिला है। पुलिस ने रिवाल्वर व अन्य सामग्री कब्जे में लेकर सील कर दिया है। पुलिस को कमरे से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। सीओ गाजीपुर के मुताबिक, एआरटीओ के बेटे ने दो शादी की थी और दोनों से तलाक हो चुका था। एमसीए की पढ़ाई के बाद उसे नौकरी भी नहीं मिली थी जिससे प्रापर्टी का काम कर रहा था। गाजीपुर के सर्वोदयनगर निवासी रफीक सिद्दीकी रायबरेली में एआरटीओ हैं। रफीक के तीन बेटों में मझला बेटा आफताब अहमद सिद्दीकी (30) एमसीए पास कर नौकरी की तलाश कर रहा था। नौकरी न मिलने पर उसने प्रापर्टी डीलिंग का काम शुरू किया था। इसी बीच घर वालों ने वर्ष 2011 में शादी कर दी। मगर, कुछ ही दिन बाद दोनों का तलाक हो गया। उसके बाद अभी दो माह पूर्व उसकी दूसरी शादी की। मगर, घरेलू कलह के चलते आफताब की दूसरी पत्नी ने भी तलाक ले लिया। उसके बाद आफताब डिप्रेशन का शिकार हो गया। वह जमकर शराब पीने लगा। आफताब के दो भाइयों में मो सिराज गेस्ट हाउस चलाते हैं। सबसे छोटा भाई मो सरफराज दिल्ली से एमबीए कर रहा है। भाई सिराज की मानें तो व्यक्ति परेशानियों के चलते आफताब डिप्रेशन का शिकार हो गया था। बीती रात वह घर आया और दो मंजिला मकान के ग्राउंड फ्लोर के वातानुकूलित कमरे में बैठकर शराब पी रहा था। मेरी पत्नी ने उसका खाना ढककर रख दिया। मगर, उसने खाना नहीं खाया। सुबह हम सभी काम पर चले गए। मगर, वह फिर भी निकला। वैसे वह अक्सर देर से उठता था। जिससे लोगों से सोचा कि वह आराम कर रहा है। शाम को घर लौटने के बाद भी पता चला सुबह से आफताब कमरे से बाहर ही निकला। तब मो सिराज ने आवाज लगाई और दरवाजा खटखटाया। अंदर से हरकत न होने पर भाई ने झांककर देखा तो उसके होश उड़ गए। आफताब कुर्सी खून से लथपथ बैठा था। सिराज ने तत्काल इसकी जानकारी पुलिस को दी। पुलिस ने दरवाजा तोड़ा और अंदर घुसे। अंदर का नजारा देखकर सभी के पैरों तले जमीन खिसक गई। खून से लथपथ आफताब कुर्सी पर अधलेटे थे। फर्श पर रिवाल्वर पड़ी थी। सामने मेज पर आधी बोतल शराब, गिलास, सिगरेट व माचिस रखा था। शराब का गिलास खाली था। पुलिस की मानें तो आफताब ने जमकर शराब पी रखी थी। पुलिस ने रिवाल्वर व अन्य सामग्री कब्जे में लेकर सील कर दिया। जामा तलाशी में कमरे से पुलिस को सुसाइड नोट नहीं मिला। पुलिस ने पंचनामा कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। सीओ विशाल पांडेय का कहना है कि आफताब पारिवारिक समस्यों से अवसाद ग्रस्त हो गया।
घर में मातम का माहौल ः आफताब की मौत से घर में मातम का माहौल छाया रहा। माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल था। हर तरह रोने चीखने चिल्लाने की आवाजें गूंज रही थी। धीरे-धीरे मोहल्ले के सैकड़ों लोग एकत्र हो गए। सभी परिवार के लोगों को संभालने में जुटे थे। भाइयों के बच्चों का भी बुरा हाल था। उनके अंाखों से अंासू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। पिता रफीक का कहना था उन्होंने ने अपना पूरा जीवन बच्चों की भलाई के लिए समर्पित कर दिया। पढ़ाया लिखाया और संस्कार दिए। मगर, आफताब को पता नहीं क्या सूझी, जो उसने यह कदम उठाया। उसने मुझे जीवन भर कुठ कुठ कर मरने के लिए छोड़ दिया। जबकि, मैंने उसे इतना समझाया कि हर व्यक्ति के जीवन में समस्याएं आती है। मगर, हार नहीं मनानी चाहिए।
काल बने लाइसेंसी असलहे ः लाइसेंसी असलहे काल बन रहे हैं। स्टेटस सिंबल बन चुके लाइसेंसी असलहे अब खुदकुशी करने के ही काम आ रहे हैं। पिछले हप्ते कृष्णानगर में दरोगा की बेटी ने अपने पिता की सर्विस रिवाल्वर से खुद को उड़ा लिया। इससे पहले भी लाइसेंसी असलहे से खुदकुशी करने के कई मामले हो चुके हैं। मगर, पुलिस इस पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।
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घर में मातम का माहौल ः आफताब की मौत से घर में मातम का माहौल छाया रहा। माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल था। हर तरह रोने चीखने चिल्लाने की आवाजें गूंज रही थी। धीरे-धीरे मोहल्ले के सैकड़ों लोग एकत्र हो गए। सभी परिवार के लोगों को संभालने में जुटे थे। भाइयों के बच्चों का भी बुरा हाल था। उनके अंाखों से अंासू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। पिता रफीक का कहना था उन्होंने ने अपना पूरा जीवन बच्चों की भलाई के लिए समर्पित कर दिया। पढ़ाया लिखाया और संस्कार दिए। मगर, आफताब को पता नहीं क्या सूझी, जो उसने यह कदम उठाया। उसने मुझे जीवन भर कुठ कुठ कर मरने के लिए छोड़ दिया। जबकि, मैंने उसे इतना समझाया कि हर व्यक्ति के जीवन में समस्याएं आती है। मगर, हार नहीं मनानी चाहिए।
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काल बने लाइसेंसी असलहे ः लाइसेंसी असलहे काल बन रहे हैं। स्टेटस सिंबल बन चुके लाइसेंसी असलहे अब खुदकुशी करने के ही काम आ रहे हैं। पिछले हप्ते कृष्णानगर में दरोगा की बेटी ने अपने पिता की सर्विस रिवाल्वर से खुद को उड़ा लिया। इससे पहले भी लाइसेंसी असलहे से खुदकुशी करने के कई मामले हो चुके हैं। मगर, पुलिस इस पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।
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