{"_id":"124-53837","slug":"Lucknow-53837-124","type":"story","status":"publish","title_hn":"झोलाछाप डॉक्टर बने ग्रामीणों की मजबूरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
झोलाछाप डॉक्टर बने ग्रामीणों की मजबूरी
Lucknow
Updated Tue, 05 Mar 2013 05:30 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
केस वन- 26 अगस्त 2010 को निगोहां के अहमदपुर खालसा गांव में झोलाछाप डॉक्टर विजय कुमार के इलाज से हंसराज नाम केलड़के की मौत के मामले में निगोहां थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। जिला क्षय रोग अधिकारी कमल किशोर सक्सेना ने दोषी झोलाछाप डॉक्टर के डॉट्स केंद्र की जांच की तो वहां टीबी की दवाओं के अलावा दूसरी बीमारियों की दवाएं भी मिली। विजय कुमार के खिलाफ इंडियन मेडिकल काउंलिस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया है। हंसराज की मौत के झोलाछाप डॉक्टर फरार हो गया।
केस टू- छठा मील, सीतापुर रोड स्थित स्टार नर्सिग होम को बिना पंजीकरण पाया गया। वहां अल्ट्रासाउंड मशीन कराने आई महिलाओं का तांता लगा हुआ था, इतना ही नही अवैध रूप से संचालित में आधा दर्जन से अधिक विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा इलाज उपलब्ध होने की सुविधा सार्वजनिक थी। सीएमओ ने छापा मारा लेकिन कार्रवाई कुछ नहीं।
लखनऊ। राजधानी के लगभग सभी ग्रामीण और घने शहरी इलाके झोलाछाप डॉक्टरों के लिए स्वर्ग बने हुए हैं। इनके खिलाफ वर्षोँ से कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हुआ। हालत ये है कि 2010 में अहमदपुर में हुई घटना की रिपोर्ट भी दर्ज है, लेकिन फरार झोलाछाप डॉक्टर विजय कुमार कहां है न तो इसका पता सीएमओ कार्यालय ने लगाया न ही पुलिस ने। यही कारण है कि एक तरफ स्वास्थ्य विभाग सोता रहता है। वहीं दूसरी तरफ झोलाछाप डॉक्टरों और उनके शिकारों की फेहरिस्त बढ़ती चली जा रही है।
विज्ञापन
सरकार कोई भी हो झोलाछाप डॉक्टरों और स्वास्थ्य विभाग के बीच चोर-चोर मौसेरे भाई का रिश्ता बना रहा। झोलाछाप डॉक्टरों पर स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई नहीं की तो बड़े-बड़े नर्सिंग होम अपने रसूख के दम पर कार्रवाई से बचे रहे। हाईकोर्ट ने झोलाछाप पर कार्रवाई न होने पर प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य को फटकार भी लगायी लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ दिखावा किया गया। हालत ये है कि दखिना शेखपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर न मिलने के कारण लोगों को झोलाछाप डॉक्टर केभरोसे रहना पड़ता है। रत्नापुर गांव में एक झोलाछाप डॉक्टर के इलाज से महिला की मौत हो गई थी। इस मामले में झोलाछाप डॉक्टर को सजा भी हो गई थी। इसके बावजूद क्षेत्र में झोलाछाप डॉक्टरों का जाल फैला हुआ है। बीकेटी के गांव चक बनकट में प्रसव पीड़ा से छटपटा रही बंजारों के समूह की दो महिलाओं के प्रसव के लिए पति और परिवार वालों ने गांव की आशा कार्यकर्त्री से कहा था। लेकिन उसका दिल नहीं पसीजा। परिवार वाले दो घंटे बाद दोनों महिलाओं को लेकर झोलाछाप डॉक्टर की क्लीनिक पर पहुंचे। यहां दोनों ने तड़प-तड़प कर बच्चे को जन्म दिया। फर्जी डॉक्टर ने इसके लिए दो हजार रुपए वसूले। घटना सात और नौ जून 2010 की है। इस मामले में एसडीएम को अपनी पीड़ितों ने लिखित शिकायत की थी। दोनों ने एसडीएम को दिए ज्ञापन में आरोप लगाया था कि उनकी उनकी पत्नियां प्रसव पीड़ा से तड़प रही थी, लेकिन आशा कार्यकत्री उन्हें सरकारी अस्पताल नहीं ले गई थी। इसके बावजूद किसी भी झोलाछाप डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई।
इन पर नहीं हुई कार्रवाई
18 जुलाई 2012- सरोजनीनगर में झोलाछाप डॉक्टर ने मंदबुद्धि व्यक्ति का इलाज करते हुए उसकी एक बीघे जमीन का बैनामा अपने नाम करा लिया।
2 नवंबर 2012- रहीमाबाद गांव में चल रहे फर्जी नर्सिंग होम का पंजीकरण डॉक्टर के नाम लेकिन उसे चला एक फार्मासिस्ट रहा था।
5 नवंबर 2012-तेलीबाग के जावित्री नर्सिंग होम, आलमबाग के राजपूत, स्वदेश नर्सिंग होम और शीला देवी केयर सेंटर पर छापेमारी में गड़बड़ियां मिली।
7 नवंबर 2012- रिंग रोड पर स्थित गरिमा नर्सिंग होम छह महीने से बंद मिला लेकिन सीएमओ को जानकारी नहीं
31 अक्तूबर 2012- सीतापुर रोड स्थित देवकी अस्पताल में एक प्रसूता के इलाज में लापरवाही पर पंजीकरण रद्द करने के आदेश
विज्ञापन
केस टू- छठा मील, सीतापुर रोड स्थित स्टार नर्सिग होम को बिना पंजीकरण पाया गया। वहां अल्ट्रासाउंड मशीन कराने आई महिलाओं का तांता लगा हुआ था, इतना ही नही अवैध रूप से संचालित में आधा दर्जन से अधिक विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा इलाज उपलब्ध होने की सुविधा सार्वजनिक थी। सीएमओ ने छापा मारा लेकिन कार्रवाई कुछ नहीं।
विज्ञापन
लखनऊ। राजधानी के लगभग सभी ग्रामीण और घने शहरी इलाके झोलाछाप डॉक्टरों के लिए स्वर्ग बने हुए हैं। इनके खिलाफ वर्षोँ से कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हुआ। हालत ये है कि 2010 में अहमदपुर में हुई घटना की रिपोर्ट भी दर्ज है, लेकिन फरार झोलाछाप डॉक्टर विजय कुमार कहां है न तो इसका पता सीएमओ कार्यालय ने लगाया न ही पुलिस ने। यही कारण है कि एक तरफ स्वास्थ्य विभाग सोता रहता है। वहीं दूसरी तरफ झोलाछाप डॉक्टरों और उनके शिकारों की फेहरिस्त बढ़ती चली जा रही है।
विज्ञापन
सरकार कोई भी हो झोलाछाप डॉक्टरों और स्वास्थ्य विभाग के बीच चोर-चोर मौसेरे भाई का रिश्ता बना रहा। झोलाछाप डॉक्टरों पर स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई नहीं की तो बड़े-बड़े नर्सिंग होम अपने रसूख के दम पर कार्रवाई से बचे रहे। हाईकोर्ट ने झोलाछाप पर कार्रवाई न होने पर प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य को फटकार भी लगायी लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ दिखावा किया गया। हालत ये है कि दखिना शेखपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर न मिलने के कारण लोगों को झोलाछाप डॉक्टर केभरोसे रहना पड़ता है। रत्नापुर गांव में एक झोलाछाप डॉक्टर के इलाज से महिला की मौत हो गई थी। इस मामले में झोलाछाप डॉक्टर को सजा भी हो गई थी। इसके बावजूद क्षेत्र में झोलाछाप डॉक्टरों का जाल फैला हुआ है। बीकेटी के गांव चक बनकट में प्रसव पीड़ा से छटपटा रही बंजारों के समूह की दो महिलाओं के प्रसव के लिए पति और परिवार वालों ने गांव की आशा कार्यकर्त्री से कहा था। लेकिन उसका दिल नहीं पसीजा। परिवार वाले दो घंटे बाद दोनों महिलाओं को लेकर झोलाछाप डॉक्टर की क्लीनिक पर पहुंचे। यहां दोनों ने तड़प-तड़प कर बच्चे को जन्म दिया। फर्जी डॉक्टर ने इसके लिए दो हजार रुपए वसूले। घटना सात और नौ जून 2010 की है। इस मामले में एसडीएम को अपनी पीड़ितों ने लिखित शिकायत की थी। दोनों ने एसडीएम को दिए ज्ञापन में आरोप लगाया था कि उनकी उनकी पत्नियां प्रसव पीड़ा से तड़प रही थी, लेकिन आशा कार्यकत्री उन्हें सरकारी अस्पताल नहीं ले गई थी। इसके बावजूद किसी भी झोलाछाप डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई।
इन पर नहीं हुई कार्रवाई
18 जुलाई 2012- सरोजनीनगर में झोलाछाप डॉक्टर ने मंदबुद्धि व्यक्ति का इलाज करते हुए उसकी एक बीघे जमीन का बैनामा अपने नाम करा लिया।
2 नवंबर 2012- रहीमाबाद गांव में चल रहे फर्जी नर्सिंग होम का पंजीकरण डॉक्टर के नाम लेकिन उसे चला एक फार्मासिस्ट रहा था।
5 नवंबर 2012-तेलीबाग के जावित्री नर्सिंग होम, आलमबाग के राजपूत, स्वदेश नर्सिंग होम और शीला देवी केयर सेंटर पर छापेमारी में गड़बड़ियां मिली।
7 नवंबर 2012- रिंग रोड पर स्थित गरिमा नर्सिंग होम छह महीने से बंद मिला लेकिन सीएमओ को जानकारी नहीं
31 अक्तूबर 2012- सीतापुर रोड स्थित देवकी अस्पताल में एक प्रसूता के इलाज में लापरवाही पर पंजीकरण रद्द करने के आदेश