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दस फीसदी युवा माइग्रेन से पीड़ित
Lucknow
Updated Sun, 24 Feb 2013 05:30 AM IST
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लखनऊ। भागदौड़ भरी जिंदगी से होने वाला तनाव युवाओं को माइग्रेन का रोगी बना रहा है। अधेड़ उम्र में शुरू होने वाली इस बीमारी का युवाओं में होना चिंताजनक है। यह संख्या बढ़ती ही जा रही है। सौ में से दस युवा माइग्रेन से पीड़ित हैं। यह बातें केजीएमयू में डॉ. केबी कुंवर फाउंडेशन की ओर से आयोजित कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने कहीं हैं।
केजीएमयू के न्यूरोलॉजी के प्रो. राकेश शुक्ला ने बताया कि माइग्रेन की बीमारी में मरीज के सिर में लगातार दर्द रहता है। कई बार तो दर्द इतना तेज उठता है कि मरीज आत्महत्या का प्रयास करता है। अव्यवस्थित दिनचर्या व जिंदगी की भागदौड़ से होने वाले तनाव का असर सीधे दिमाग की कोशिकाओं पर पड़ता है। इन कोशिकाओं में संतुलन बिगड़ जाने से माइग्रेन की समस्या शुरू हो जाती है। सौ में से दस युवा माइग्रेन का शिकार हैं। यह आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। इसे रोकने के लिए ठोस प्रयासों की जरूरत है। पहले यह बीमारी अधेड़ व वृद्धों में होती थी। युवाओं में इसकी संख्या काफी कम हुआ करती थी। डॉ. एसएस अग्रवाल ने बताया कि पार्किंसन की बीमारी बढ़ रही है। इसमें शरीर के अंगों में कंपन, शारीरिक गतिविधियों में धीमापन, हाथ व पैरों में जकड़न, उठने-बैठने में असुविधा। यह लक्षण शुरुआत में कभी-कभी और बाद में लगातार होने लगते हैं। यह रोग मस्तिष्क के गहरे केंद्रीय भाग में स्थित सबस्टेंशिया नीग्रा (काला पदार्थ) की डोपोमीन स्रावित करने वाली कोशिकाओं की संख्या में कमी से होता है। इन कोशिकाओं की कमी से इनके द्वारा बनने वाला रसायन डोपोमीन कम बनता है। इससे सब्स्टेंशिया नीग्रा में डोपोमीन रसायन का संतुलन बिगड़ जाता है। इससे रोगी की समस्त गतिविधियां धीमी पड़ जाती हैं। इसके बाद दिमाग की कई बीमारियां पनप जाती हैं। कार्यशाला में केजीएमयू के कुलपति डॉ. डी के गुप्ता ने बताया कि क्रोमोसोम में परिवर्तन कर कई बीमारियों से छुटकारा पाया जा सकता है। न्यूरोलॉजी में आनुवांशिकी के द्वारा विभिन्न शोध हो रहे हैं, कई करने बाकी हैं।
दो वर्षों में बढ़े पांच गुना माइग्रेन रोगी ः उत्तर प्रदेश में दो वर्षों में पांच गुना माइग्रेन के रोगी बढ़े हैं। केजीएमयू में हुए एक शोध में इस बात का खुलासा हुआ है। इनमें सबसे ज्यादा रोगी शहरी इलाकों से है। ग्रामीण क्षेत्रों में दो प्रतिशत युवा इस बीमारी की चपेट में हैं। शहरी क्षेत्र के वह युवा हैं जिनकी जीवन शैली अव्यवस्थित मिली है। ऑफिस वर्क करने वाली महिलाओं से लगाकर गृहणी भी माइग्रेन की चपेट में है। इन महिलाओं में अधिक सोचने की वजह से बीमारी पनपती है। इसे साधारण सिर दर्द समझ के महिलाएं बीमारी को बढ़ा लेती हैं। जब बीमारी गंभीर हो जाती है। तब महिलाएं डॉक्टर से संपर्क करती हैं।
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लक्षण और बचाव ः माइग्रेन में सिरदर्द , उल्टी आना, बेहोशी व कमजोरी महसूस होती है। सिर दर्द काफी दिनों तक लगातार बना रहता है। यह दर्द सिर के अलग-अलग हिस्सों में बारी-बारी से होता है। कई दिनों तक इलाज कराने पर फायदा नहीं हो तो तत्काल जांच करानी चाहिए। इसके बचाव के लिए सही समय पर इलाज जरूरी है।
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केजीएमयू के न्यूरोलॉजी के प्रो. राकेश शुक्ला ने बताया कि माइग्रेन की बीमारी में मरीज के सिर में लगातार दर्द रहता है। कई बार तो दर्द इतना तेज उठता है कि मरीज आत्महत्या का प्रयास करता है। अव्यवस्थित दिनचर्या व जिंदगी की भागदौड़ से होने वाले तनाव का असर सीधे दिमाग की कोशिकाओं पर पड़ता है। इन कोशिकाओं में संतुलन बिगड़ जाने से माइग्रेन की समस्या शुरू हो जाती है। सौ में से दस युवा माइग्रेन का शिकार हैं। यह आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। इसे रोकने के लिए ठोस प्रयासों की जरूरत है। पहले यह बीमारी अधेड़ व वृद्धों में होती थी। युवाओं में इसकी संख्या काफी कम हुआ करती थी। डॉ. एसएस अग्रवाल ने बताया कि पार्किंसन की बीमारी बढ़ रही है। इसमें शरीर के अंगों में कंपन, शारीरिक गतिविधियों में धीमापन, हाथ व पैरों में जकड़न, उठने-बैठने में असुविधा। यह लक्षण शुरुआत में कभी-कभी और बाद में लगातार होने लगते हैं। यह रोग मस्तिष्क के गहरे केंद्रीय भाग में स्थित सबस्टेंशिया नीग्रा (काला पदार्थ) की डोपोमीन स्रावित करने वाली कोशिकाओं की संख्या में कमी से होता है। इन कोशिकाओं की कमी से इनके द्वारा बनने वाला रसायन डोपोमीन कम बनता है। इससे सब्स्टेंशिया नीग्रा में डोपोमीन रसायन का संतुलन बिगड़ जाता है। इससे रोगी की समस्त गतिविधियां धीमी पड़ जाती हैं। इसके बाद दिमाग की कई बीमारियां पनप जाती हैं। कार्यशाला में केजीएमयू के कुलपति डॉ. डी के गुप्ता ने बताया कि क्रोमोसोम में परिवर्तन कर कई बीमारियों से छुटकारा पाया जा सकता है। न्यूरोलॉजी में आनुवांशिकी के द्वारा विभिन्न शोध हो रहे हैं, कई करने बाकी हैं।
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दो वर्षों में बढ़े पांच गुना माइग्रेन रोगी ः उत्तर प्रदेश में दो वर्षों में पांच गुना माइग्रेन के रोगी बढ़े हैं। केजीएमयू में हुए एक शोध में इस बात का खुलासा हुआ है। इनमें सबसे ज्यादा रोगी शहरी इलाकों से है। ग्रामीण क्षेत्रों में दो प्रतिशत युवा इस बीमारी की चपेट में हैं। शहरी क्षेत्र के वह युवा हैं जिनकी जीवन शैली अव्यवस्थित मिली है। ऑफिस वर्क करने वाली महिलाओं से लगाकर गृहणी भी माइग्रेन की चपेट में है। इन महिलाओं में अधिक सोचने की वजह से बीमारी पनपती है। इसे साधारण सिर दर्द समझ के महिलाएं बीमारी को बढ़ा लेती हैं। जब बीमारी गंभीर हो जाती है। तब महिलाएं डॉक्टर से संपर्क करती हैं।
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लक्षण और बचाव ः माइग्रेन में सिरदर्द , उल्टी आना, बेहोशी व कमजोरी महसूस होती है। सिर दर्द काफी दिनों तक लगातार बना रहता है। यह दर्द सिर के अलग-अलग हिस्सों में बारी-बारी से होता है। कई दिनों तक इलाज कराने पर फायदा नहीं हो तो तत्काल जांच करानी चाहिए। इसके बचाव के लिए सही समय पर इलाज जरूरी है।