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ठगी के आरोप में नगर निगम कर्मचारी गिरफ्तार
Lucknow
Updated Sun, 03 Feb 2013 05:30 AM IST
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लखनऊ। कई बार अनियमितताओं केआरोप में निलंबित हो चुका नगर निगम का एक कर्मचारी अब ठगी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। उस पर दर्जनों लोगों से नौकरी दिलाने केनाम पर लाखों रुपये ऐंठने का आरोप है। उसका एक साथी भी गिरफ्तार किया गया है। नगर निगम प्रशासन ने जानकारी के बाद कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी है। वाराणसी पुलिस उसे 29 जनवरी को ही गिरफ्तार कर ले गई थी। ठगी के आरोप में गिरफ्तार नरेंद्र देव त्रिवेदी जोन-एक में मोहर्रिर पद पर तैनात है। नगर निगम में उसका अब तक का कार्यकाल दागदार रहा है। करीब 30 साल की सेवा में वह कई बार अनियमितताओं के आरोप में निलंबित किया जा चुका है। इसकी नियुक्ति पहले चुंगी विभाग में मोहर्रिर पद हुई थी लेकिन चुंगी समाप्त होने के बाद वह अन्य विभागों में तैनात रहा है। इस समय यह यह नगर निगम जोन-एक के कर विभाग में तैनात है। सूत्रों के मुताबिक काफी समय से वह कार्यालय नहीं आ रहा था। कई महीनों से उसका नाम भी रजिस्टर में नहीं चढ़ रहा था। इसके बाद भी जुगाड़ से वेतन जारी करवा लेता था। कर्मचारी के ठगी के आरोप में गिरफ्तारी क ी जानकारी भी नगर निगम को तब हुई जब किसी कर्मचारी ने समाचार पत्र में छपी उसकी तस्वीर देखी। उसने इसकी जानकारी अधिकारियों को दी। इसके बाद कर्मचारी का वेतन रोक प्रभारी नगर आयुक्त विशाल भारद्वाज को रिपोर्ट भेजी गई। इसमें इस बात का उल्लेख विशेष तौर पर किया गया है कि उसका सर्विस रिकॉर्ड खराब रहा है।
पैसे वापसी का दबाव बढ़ा तो थमा दिए जाली चेक ः जनवरी 2009 में नगर निगम कर्मचारी नरेंद्र देव त्रिवेदी ने सुनील कुमार श्रीवास्तव के साथ मिलकर वाराणसी के चौक थाना क्षेत्र के ठठेरी बाजार में कमरा लेकर रहने लगा। इस दौरान इन सबने लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए यह बताना शुरू किया कि उनके रिश्तेदार सचिवालय में हैं। स्वास्थ्य विभाग में तृतीय श्रेणी पदों पर नियुक्ति का भरोसा देकर दर्जनों लोगों से दोनों ने तीन-तीन लाख रुपये ऐंठ लिए। इतना ही नहीं कुछ लोगों को इन दोनों ने स्वास्थ्य विभाग का फर्जी नियुक्ति पत्र भी थमा दिया। लोगों को ठगे जाने का एहसास हुआ तो दोनों चम्पत हो गए। कुछ लोग पता लगाते हुए जब लखनऊ तक पहुंचे तो आरोपियों ने उनको जाली चेक थमा दिए। इसके बाद वाराणसी के लंका के रहने वाले हृदयानंद उपाध्याय ने जुलाई में वाराणसी केचौक थाने में मुकदमा दर्ज कराया था।
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पैसे वापसी का दबाव बढ़ा तो थमा दिए जाली चेक ः जनवरी 2009 में नगर निगम कर्मचारी नरेंद्र देव त्रिवेदी ने सुनील कुमार श्रीवास्तव के साथ मिलकर वाराणसी के चौक थाना क्षेत्र के ठठेरी बाजार में कमरा लेकर रहने लगा। इस दौरान इन सबने लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए यह बताना शुरू किया कि उनके रिश्तेदार सचिवालय में हैं। स्वास्थ्य विभाग में तृतीय श्रेणी पदों पर नियुक्ति का भरोसा देकर दर्जनों लोगों से दोनों ने तीन-तीन लाख रुपये ऐंठ लिए। इतना ही नहीं कुछ लोगों को इन दोनों ने स्वास्थ्य विभाग का फर्जी नियुक्ति पत्र भी थमा दिया। लोगों को ठगे जाने का एहसास हुआ तो दोनों चम्पत हो गए। कुछ लोग पता लगाते हुए जब लखनऊ तक पहुंचे तो आरोपियों ने उनको जाली चेक थमा दिए। इसके बाद वाराणसी के लंका के रहने वाले हृदयानंद उपाध्याय ने जुलाई में वाराणसी केचौक थाने में मुकदमा दर्ज कराया था।
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