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National Panchayati Raj Day 2024: क्या जानते हैं पंचायती राज दिवस के बारे में आप? यहां जानें महत्व और इतिहास
Mon, 01 Apr 2024 01:06 PM IST
प्रकाश चंद जोशी
यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: प्रकाश चंद जोशी
Updated Mon, 01 Apr 2024 01:06 PM IST
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पंचयती राज दिवस 2024
- फोटो : Amar Ujala
National Panchayati Raj Day 2024: हमारे देश में हर एक दिन की अपनी खास बात और महत्व होता है। जहां एक दिन किसी दिन को हम किसी की जयंती के रूप में मनाते हैं, तो किसी दिन को बेहद ही खुशी से। इसी कड़ी में 24 अप्रैल का दिन भी बेहद खास है। दरअसल, इस दिन राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस मनाया जाता है। इस दिन का अपना महत्व और अपना इतिहास है। तो चलिए बिना देरी के इस दिन के बारे में जानने की कोशिश करते हैं...
दरअसल, आपको शायद न पता हो लेकिन पंचायती राज प्रणाली देश के सबसे पुराने शासी संगठनों में से एक है। वहीं, भारत देश में ये लगभग 6 लाख समुदायों को नियंत्रित करती है।
क्या है इस दिन का इतिहास?
बात अगर इस दिन के इतिहास की करें, तो पंचायती राज व्यवस्था का जनक जिन्हें माना जाता है उनका नाम लॉर्ड रिपन है। इन्होंने वर्ष 1882 में स्थानीय संस्थाओं को उनका लोकतांत्रिक ढांचा प्रदान किया था।
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बलवंत राय मेहता समिति ने कुछ सुझाव दिए, जिसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने सबसे पहले 2 अक्तूबर 1959 को राजस्थान के नागौर जिले में पंचायती राज व्यवस्था को लागू किया था। फिर इसके ही कुछ दिनों के बाद आंध्र प्रदेश में भी इसकी शुरुआत हुई थी।
इस दिन का महत्व क्या है?
अगर देश में किसी गांव में कोई दिक्कत है या उस गांव की हालत खराब है, तो उस गांव की इस समस्या को दूर करने और उसे सशक्त एवं विकसित बनाने के लिए ग्राम पंचायत ही उचित कदम उठाती है। वर्ष 1957 में केंद्रीय बिजली व्यवस्था में सुधार लाने के लक्ष्य के साथ ही बलवंतराय मेहता की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था।
इस समिति ने अध्ययन किया और इनके अनुसार, समिति ने एक विकेंद्रीकृत पंचायती राज पदानुक्रम का सुझाव दिया। इसमें समिति की तरफ से बताया गया कि ग्राम स्तर पर ग्राम पंचायतें हों, ब्लॉक स्तर पर पंचायत समिति हो और जिला स्तर पर जिला परिषद हो।
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दरअसल, आपको शायद न पता हो लेकिन पंचायती राज प्रणाली देश के सबसे पुराने शासी संगठनों में से एक है। वहीं, भारत देश में ये लगभग 6 लाख समुदायों को नियंत्रित करती है।
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क्या है इस दिन का इतिहास?
बात अगर इस दिन के इतिहास की करें, तो पंचायती राज व्यवस्था का जनक जिन्हें माना जाता है उनका नाम लॉर्ड रिपन है। इन्होंने वर्ष 1882 में स्थानीय संस्थाओं को उनका लोकतांत्रिक ढांचा प्रदान किया था।
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बलवंत राय मेहता समिति ने कुछ सुझाव दिए, जिसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने सबसे पहले 2 अक्तूबर 1959 को राजस्थान के नागौर जिले में पंचायती राज व्यवस्था को लागू किया था। फिर इसके ही कुछ दिनों के बाद आंध्र प्रदेश में भी इसकी शुरुआत हुई थी।
इस दिन का महत्व क्या है?
अगर देश में किसी गांव में कोई दिक्कत है या उस गांव की हालत खराब है, तो उस गांव की इस समस्या को दूर करने और उसे सशक्त एवं विकसित बनाने के लिए ग्राम पंचायत ही उचित कदम उठाती है। वर्ष 1957 में केंद्रीय बिजली व्यवस्था में सुधार लाने के लक्ष्य के साथ ही बलवंतराय मेहता की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था।
इस समिति ने अध्ययन किया और इनके अनुसार, समिति ने एक विकेंद्रीकृत पंचायती राज पदानुक्रम का सुझाव दिया। इसमें समिति की तरफ से बताया गया कि ग्राम स्तर पर ग्राम पंचायतें हों, ब्लॉक स्तर पर पंचायत समिति हो और जिला स्तर पर जिला परिषद हो।