Tech: ट्रंप सरकार ने शुरू की ‘यूएस टेक फोर्स’, जानिए क्यों एक हजार टेक एक्सपर्ट्स की भर्ती कर रहा अमेरिका?
ट्रंप सरकार ने ‘यूएस टेक फोर्स’ नाम से एक नई योजना शुरू की है। इसके तहत करीब 1,000 इंजीनियरों और टेक एक्सपर्ट्स की भर्ती की जाएगी। ये दो साल के अनुबंध पर विभिन्न सरकारी एजेंसियों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक तकनीकी प्रोजेक्ट्स पर काम करेंगे।

विस्तार
अमेरिका की ट्रंप सरकार ने एक नई और बड़ी पहल की शुरुआत की है। इसका नाम है ‘यूएस टेक फोर्स’। इस योजना के तहत सरकार करीब 1,000 इंजीनियरों और टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट्स को भर्ती करेगी। ये लोग पूरे देश की सरकारी एजेंसियों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और दूसरे आधुनिक टेक्नोलॉजी प्रोजेक्ट्स पर काम करेंगे।
क्या है यूएस टेक फोर्स?
इस प्रोग्राम में चुने गए लोग दो साल के अनुबंध पर काम करेंगे। ये सीधे संबंधित सरकारी विभागों के प्रमुखों को रिपोर्ट करेंगे। साथ ही, इन्हें बड़ी और नामी टेक कंपनियों के साथ मिलकर काम करने का मौका मिलेगा। इस पहल का उद्देश्य अमेरिका में एआई इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में चीन को कड़ी चुनौती देना है। यह घोषणा राष्ट्रपति ट्रंप के जरिए राष्ट्रीय एआई नीति से जुड़े आदेश पर हस्ताक्षर करने के कुछ ही दिन बाद की गई है।
मिशन के लिए कौनसी टेक कंपनियां होंगी शामिल?
इस मिशन में सरकार ने कई दिग्गज टेक कंपनियों के साथ साझेदारी की है। इनमें अमेजन वेब सर्विसेज, एपल, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, डेल, एनवीडिया शामिल हैं। साथ ही ओपनएआई, ओरेकल, पालंतिएर और सेल्सफोर्स जैसी कंपनियां भी इस प्रोग्राम का हिस्सा होंगी।
क्या होंगी सैलरी और सुविधाएं?
यूएस टेक फोर्स में चुने गए एक्सपर्ट्स को $1.5 लाख से $2 लाख सालाना (करीब 1.25 करोड़ से 1.7 करोड़ रुपये) तक की सैलरी मिल सकती है। इसके अलावा उन्हें कई अन्य सुविधाएं और फायदे भी दिए जाएंगे।
करियर के शानदार मौके
दो साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद, टेक फोर्स के सदस्य इन पार्टनर कंपनियों में पूर्णकालिक नौकरी के लिए आवेदन कर सकते हैं। कंपनियों ने भरोसा दिया है कि वे इस प्रोग्राम से जुड़े लोगों को नौकरी के लिए प्राथमिकता देंगी। इतना ही नहीं, ये कंपनियां अपने कर्मचारियों को भी सरकारी सेवा के लिए भेज सकती हैं।
किन कामों पर होगा फोकस?
यह टीम ऐसे बड़े और अहम टेक प्रोजेक्ट्स पर काम करेगी, जिनका सीधा असर सरकारी सेवाओं पर पड़ेगा। इनमें सरकारी सिस्टम में एआई का इस्तेमाल, नए एप्लिकेशन बनाना, डाटा सिस्टम को आधुनिक बनाना और नागरिकों तक डिजिटल सेवाएं बेहतर तरीके से पहुंचाना शामिल है।