Digital Addiction: एक क्लिक पर कनेक्टेड लोग, फिर भी बढ़ रहा अकेलापन; जानें कैसे टेक कंपनियां उठा रही हैं फायदा

जागृति शुक्ला
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीजागृति शुक्ला
Thu, 06 Aug 2026 02:26 PM IST
सार

Social Media Addiction:

इंटरनेट और सोशल मीडिया के इस दौर में जहां पूरी दुनिया एक क्लिक पर जुड़ी हुई दिखती है, वहीं दूसरी तरफ लोग पहले से ज्यादा अकेले महसूस कर रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस अकेलेपन को वैश्विक महामारी मान रहे हैं, तो कई एक्सपर्ट्स का कहना है कि टेक कंपनियां लोगों के अकेलेपन से काफी मुनाफा कमा रही हैं। आइए जानते हैं कैसे।

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Tech Giants Profit From Loneliness: How Social Media Making People Isolated
लोगों के अकेलेपन से मुनाफा कमा रहीं कंपनियां - फोटो : एआई जनरेटेड

    विस्तार

    Tech Companies and Loneliness:

    आज के दौर में लोग देश-दुनिया के किसी भी कोने से एक-दूसरे से जुड़ और कनेक्ट हो सकते हैं। लेकिन इसके विपरीत, बड़ी संख्या में लोग अकेलेपन का शिकार भी हो रहे हैं। स्वास्थ्य आंकड़ों के अनुसार, अकेलापन सेहत के लिए प्रतिदिन 15 सिगरेट पीने जितना खतरनाक माना जाता है।

    ऑस्ट्रेलिया के जाने-माने लेखक पॉल डेली इसी कड़वे सच की ओर इशारा करते हुए कहते हैं कि टेक कंपनियां इंसानी दिमाग को खोखला करके लगातार अमीर होती जा रही हैं। पॉल डेली के अनुसार, लोग यह जानते हुए भी कि सोशल मीडिया उनके मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रहा है, उससे दूर नहीं हो पा रहे हैं।

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    अकेलेपन से कैसे मुनाफा कमा रहीं टेक कंपनियां?

    • पॉल डेली का कहना है कि टेक कंपनियां इंसानी दिमाग को स्क्रीन से जोड़कर अपनी कमाई बढ़ा रही हैं। उनके मुताबिक, लोग यह जानते हुए भी कि सोशल मीडिया उनके मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रहा है, उससे दूरी नहीं बना पा रहे हैं।
    • एक्सपर्ट्स का मानना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ऐसे एल्गोरिदम का इस्तेमाल करते हैं, जो लोगों को लंबे समय तक एप पर बनाए रखते हैं। लगातार नोटिफिकेशन, लाइक्स और नए कंटेंट की वजह से यूजर्स बार-बार फोन चेक करते रहते हैं।
    • रिपोर्ट के अनुसार, एक व्यक्ति रोजाना औसतन 2 घंटे 23 मिनट सोशल मीडिया पर बिताता है। इसका मतलब है कि जिंदगी के लगभग पांच से छह साल सिर्फ सोशल मीडिया स्क्रॉल करने में निकल जाते हैं।
    • सबसे ज्यादा असर युवा पीढ़ी पर देखा जा रहा है। 25 साल से कम उम्र के लोग लगातार ऑनलाइन रहने की आदत की वजह से अकेलेपन की समस्या से ज्यादा जूझ रहे हैं।

    युवाओं में बढ़ रहा डिप्रेशन और एंग्जाइटी का खतरा

    • रिपोर्ट के अनुसार, किशोरों में तीन घंटे से ज्यादा सोशल मीडिया इस्तेमाल करने से डिप्रेशन और एंग्जाइटी का खतरा 50 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।
    • 70 प्रतिशत से ज्यादा युवा फोमो यानी पीछे छूट जाने के डर से देर रात तक स्क्रीन पर समय बिताते हैं। इससे न सिर्फ मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है, बल्कि नींद और सामाजिक जीवन पर भी असर पड़ता है।

    डोपामाइन का खेल कैसे काम करता है?

    • न्यूरोसाइंस के मुताबिक, सोशल मीडिया नोटिफिकेशन, लाइक्स और कमेंट्स दिमाग में डोपामाइन नामक हार्मोन रिलीज करते हैं। यही हार्मोन नशीले पदार्थों की लत में भी सक्रिय होता है। इसी वजह से यूजर्स बार-बार फोन चेक करने लगते हैं और धीरे-धीरे सोशल मीडिया की आदत एक लत में बदल सकती है।
    • हालांकि पॉल डेली यह भी कहते हैं कि यह समस्या केवल युवाओं तक ही सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछले 20 वर्षों में उन्होंने अपना ज्यादातर समय किताबों और कंप्यूटर के साथ बिताया, लेकिन असली अकेलापन उन्हें तब महसूस हुआ जब उन्होंने सोशल मीडिया का इस्तेमाल शुरू किया।
    • इससे साफ है कि इंटरनेट और सोशल मीडिया का असर हर उम्र के लोगों पर पड़ रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया कंपनियों का बिजनेस मॉडल यूजर्स के स्क्रीन टाइम पर निर्भर करता है। जितना ज्यादा समय लोग प्लेटफॉर्म पर बिताते हैं, उतना ही ज्यादा विज्ञापन और कमाई बढ़ती है।यही वजह है कि कंपनियां ऐसे फीचर्स और एल्गोरिदम तैयार करती हैं, जो लोगों को लंबे समय तक स्क्रीन से जोड़े रखें।

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