चीनी सरकार को भी नहीं पता खुफिया बिटकॉइन खदान का रहस्य

चलिए आज आपको ले चलते हैं, डिजिटल करेंसी, बिटकॉइन की खदान के अंदर। ये खदान चीन में है। एक खुफिया ठिकाने पर। इसका पता बताना मना है।
खान के मालिक और यहां काम करने वाले लोग, इस खदान को चीनी सरकार की नजर से बचाकर चला रहे हैं। इसीलिए जब उन्होंने हमें इस खदान में आने की इजाजत दी तो शर्त यही थी कि इसका पता ठिकाना बाकी दुनिया को न बताया जाए। बिटकॉइन की ये चीनी खदान, बहुत ऊंचे पहाड़ी ठिकाने पर है। यहां सांस लेने के लिए ऑक्सीजन लेकर जाना पड़ता है। मोबाइल का नेटवर्क भी यहां बहुत कमजोर है।
मगर तेज रफ्तार वाई-फाई की मदद से यहां से वीडियो कॉल और ऑनलाइन चैटिंग हो सकती है। इस खुफिया दौरे में हमारे गाइड हैं शैंडलर गुओ। ये बिटबैंक के मालिक हैं और बिटकॉइन का कारोबार करते हैं। उनका परिवार गोमांस का कारोबार करता था।
परिवार से काफी दौलत उन्हें विरासत में मिली। इसीलिए उन्होंने डिजिटल करेंसी बिटकॉइन में निवेश करने का फैसला किया है।

गुओ कहते हैं कि पहले चीन की फैक्ट्रियों में सामान्य चीजें जैसे कपड़े और जूते बनते थे। मगर अब चीनी लोग तकनीक की मदद से नए-नए प्रोडक्ट बना रहे हैं।
बिटकॉइन की इस खदान के भीतर सैकड़ों कंप्यूटर लगे हैं। इन पर सैकड़ों लोग काम कर रहे हैं। कर्मचारियों में ज्यादातर मर्द हैं। वो यहीं पर रहते हैं। यहां काम करने वालों में कुछ पहले किसान थे तो कुछ नए ग्रेजुएट हैं। एक कमरे में छह लोग रहते हैं। उनके कमरों की फर्श पर कंप्यूटर के पुर्जे बिखरे हुए हैं।
दीवारों पर चीनी बैंड के पोस्टर हैं। ये लोग डॉर्मिटरी जैसी जगह पर अपने अपने बंक बेड में सोते हैं। बिटकॉइन खदान का एक कर्मचारी है फैंग यॉन्ग। फैंग की उम्र महज 21 वर्ष है। उसने हाल ही में अपना ग्रैजुएशन पूरा किया है। वो पिछले एक साल से यहां काम कर रहा है।
वो इस कस्बे में मोपेड पर घूमता है। फैंग, एक किसान परिवार से ताल्लुक रखने के बावजूद, किसी आम चीनी शहरी युवा की तरह रहता है। उसे बिटकॉइन की अहमियत का अच्छे से अंदाजा है। फैंग कहता है कि ये तकनीक आगे चलकर पूरी दुनिया पर गहरा असर डालने वाली है।

यहां काम करने वालों को कंप्यूटर के मुश्किल सवालों को हल करने के एवज में बिटकॉइन दिए जाते हैं। पूरी दुनिया में बिटकॉइन में होने वाले लेन-देन की मुश्किलें यहां सुलझाई जाती हैं। जैसे ही कोई दिक्कत हल होती है, बिटकॉइन की ब्लॉकचेन में एक ब्लॉक जोड़ दिया जाता है।
मतलब ये कि बिटकॉइन के लेनदेन का कोई भी मसला सुलझने पर उसे ऑनलाइन एकाउंट बुक में दर्ज कर लिया जाता है। आज की तारीख में एक बिटकॉइन की कीमत 450 डॉलर है। गुओ कहते हैं कि यहां चौबीसों घंटे काम होता है। कंप्यूटर के गुणा-भाग और पहेलियां हल करके, दिन भर में करीब 50 बिटकॉइन निकाले जाते हैं।
गुओ ने बिटकॉइन का ये धंधा दो बरस पहले ही शुरू किया था। उस वक्त पूरी दुनिया में बिटकॉइन के कारोबार में चीन की हिस्सेदारी महज चालीस फीसद थी। आज ये हिस्सा बढ़कर 70 फीसद पहुंच गया है।

गुओ ने चीन में दो बिटकॉइन खदाने बनाई हैं। अब वो तीसरी और दुनिया की सबसे बड़ी बिटकॉइन खदान बना रहे हैं। पूरी होने के बाद वहां दुनिया का तीस फीसदी बिटकॉइन कारोबार होगा।
शैंडलर गुओ एक मोबाइल एप भी बना रहे हैं। इससे मोबाइल के जरिए बिटकॉइन डिजिटल करेंसी बनाई जा सकेगी। उन्हें यकीन है कि आगे चलकर चीन, बिटकॉइन करेंसी का केंद्र बनने वाला है।
बिटकॉइन के मुकाबले में दूसरी चीनी ऑनलाइन करेंसी भी बाजार में हैं। बहुत से चीनी लोग अलीबाबा की अलीपे या वीचैट वॉलेट नाम की ऑनलाइन करेंसी इस्तेमाल करते हैं। हाल ही में चीन की सरकार ने भी ऑनलाइन करेंसी की शुरुआत करने का इरादा जताया है।
ये भी आशंका है कि गुओ जैसे लोगों की डिजिटल करेंसी बिटकॉइन, आगे चलकर देश की सरकारी करेंसी के लिए चुनौती बन सकती है। बिटकॉइन के जानकार माइक हियर्न ये आशंका जताते हैं। जबकि अभी हाल ही में उन्होंने ये एलान किया था कि दुनिया भर में बिटकॉइन का प्रयोग नाकाम रहा है।

माइक कहते हैं कि आज बिटकॉइन के कारोबार में चीन नंबर एक पर है। बिटकॉइन के जरिए होने वाले ज्यादातर ऑनलाइन लेनदेन की तस्दीक चीन में होती है।
मगर चीन में इंटरनेट की रफ्तार धीमी होने की वजह से इसके मुरीदों को लेन-देन में दिक्कत आती है। इसी वजह से आगे चलकर ये प्रयोग नाकाम होने का डर है।
वहीं, बिटबैंक के मालिक गुओ, इन आशंकाओं को खारिज करते हैं। उन्हें बिटकॉइन को लेकर काफी उम्मीदें हैं। वो मानते हैं कि आगे चलकर बिटकॉइन का लेन-देन ही सब पर भारी पड़ने वाला है।
ये ऐसी करेंसी है जिसे पूरी दुनिया में कोई भी, कहीं भी इस्तेमाल कर सकता है। ये किसी एक देश की मुद्रा नहीं है। तो ये देशों की सरहदों को लांघ रही है। बिटकॉइन किसी एक की नहीं, पूरी दुनिया की करेंसी है।