AI: 'एआई अपनाओ या खत्म हो जाओ'? जानिए गूगल से निकली कंपनी के सीईओ ने क्यों दी चेतावनी?
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब सिर्फ एक तकनीकी विकल्प नहीं, बल्कि अस्तित्व और प्रतिस्पर्धा का सवाल बन चुका है। SandboxAQ के सीईओ जैक हिदारी ने WEF की बैठक के दौरान कहा कि आज का दौर "AI or Die' का है, जो व्यक्ति, कंपनियां और सरकारें एआई अपनाएंगी वही आगे बढ़ेंगी, जबकि इसे नजरअंदाज करने वालों के लिए टिके रहना मुश्किल हो जाएगा।

विस्तार
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि जरूरत बन चुका है। SandboxAQ के सीईओ जैक हिदारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अब समय 'AI or Die' (एआई अपनाओ या खत्म हो जाओ) का है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की वार्षिक बैठक के दौरान पीटीआई से बात करते हुए, जैक हिदारी ने भारत की क्षमता और एआई के भविष्य पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि चाहे व्यक्ति हों, कॉरपोरेट्स हों या सरकारें, जो एआई को अपनाएंगे वही आगे बढ़ेंगे और जो नहीं अपनाएंगे उनका अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।
भारत के लिए बड़ा अवसर
हिदारी का मानना है कि भारत इस दिशा में सही रास्ते पर है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भारतीय कंपनियों को वैश्विक स्तर पर स्केल करने (बढ़ाने) के लिए अपार संभावनाएं प्रदान करता है।
क्या है SandboxAQ?
SandboxAQ की शुरुआत 2016 में गूगल की पेरेंट कंपनी अल्फाबेट में एक मूनशॉट यूनिट (प्रायोगिक विभाग) के रूप में हुई थी। 2022 में यह एक स्वतंत्र कंपनी बन गई। इसके निवेशकों में गूगल के पूर्व सीईओ एरिक श्मिट (जो अब SandboxAQ के चेयरमैन हैं), सेल्सफोर्स के सीईओ मार्क बेनियोफ और टी रो प्राइस शामिल हैं। 'सैंडबॉक्स' बच्चों के खेलने की उस जगह को कहते हैं जहां वे बिना किसी नुकसान के चीजें बना और बिगाड़ सकते हैं। इसी तर्ज पर, यह कंपनी एक सुरक्षित टेस्टिंग माहौल में काम करती है। यह एक B2B कंपनी है जो एआई और क्वांटम तकनीक का इस्तेमाल करके दवा खोज, मटीरियल साइंस, नेविगेशन और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में मदद करती है।
'AI or Die': अस्तित्व का सवाल
हिदारी ने अपनी आगामी पुस्तक 'AI or Die' का जिक्र करते हुए कहा कि हम एक बड़े बदलाव के दौर में हैं। एआई अब केवल 'अच्छा होने' की बात नहीं है, बल्कि यह 'बिजनेस सर्वाइवल' के लिए जरूरी है। पारंपरिक तरीके से नई दवा खोजने में 15 साल लगते हैं लेकिन एआई इसे बहुत तेजी से कर सकता है। एआई उत्प्रेरकों का उपयोग करके तेल और गैस को नए ऊर्जा उत्पादों में बदलने वाली कंपनियां ही भविष्य में टिक पाएंगी।
भारत के लिए प्रमुख चुनौतियां और समाधान
1. शिक्षा और जनसंख्या:
हिदारी ने कहा, 'भारत की 1.4 अरब की आबादी के लिए शिक्षा क्षेत्र में एआई को अपनाना बेहद जरूरी है, नहीं तो वैश्विक स्तर पर मुकाबला करना मुश्किल होगा।'
2. साइबर सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा:
WEF ने साइबर असुरक्षा को भारत के लिए एक बड़ा जोखिम बताया है। हिदारी ने इस पर सहमति जताते हुए कहा कि साइबर सुरक्षा अब राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा है। बैंकिंग, टेलीकॉम और पब्लिक यूटिलिटीज जैसे क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर निशाने पर हो सकते हैं। इंफोसिस, विप्रो और TCS जैसी भारतीय दिग्गज कंपनियों के पास भारी मात्रा में कस्टमर डाटा है, जिसे सुरक्षित रखना अनिवार्य है।
3. 'IP कंज्यूमर' से 'IP क्रिएटर' बनने का मौका:
हिदारी ने कहा कि भारत की 80% अर्थव्यवस्था 'फिजिकल वर्ल्ड' (जैसे रेलवे, ऊर्जा, इंफ्रास्ट्रक्चर) में है। उनका उद्देश्य भारतीय कंपनियों की इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) को बढ़ावा देना है। अभी कई भारतीय फार्मा कंपनियां केवल दूसरों के फॉर्मूले पर दवाएं बनाती हैं। SandboxAQ के टूल्स का उपयोग करके भारत खुद के मॉलिक्यूलर डिजाइन तैयार कर सकता है और दुनिया के लिए IP क्रिएटर बन सकता है।
रीयल वर्ल्ड के लिए एआई
जैक हिदारी ने अंत में स्पष्ट किया कि जहां डिजिटल दुनिया में एआई का उपयोग फोटो, वीडियो और कंटेंट बनाने के लिए हो रहा है, वहीं SandboxAQ का फोकस 'रीयल वर्ल्ड एआई' पर है। यह भौतिकी, रसायन और गणित पर आधारित है जो नई दवाएं और मटीरियल बनाने में मदद करता है। यही वह क्षेत्र है जो भारत की अर्थव्यवस्था को बदल सकता है।