NASA Artemis 2: इंसान 50 साल बाद फिर करेगा चांद का सफर, जानिए नासा की इस एतिहासिक मिशन से जुड़ी हर बात

Suyash Pandey
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीSuyash Pandey
Wed, 01 Apr 2026 06:54 PM IST
सार

NASA Artemis 2 Mission:

नासा 50 साल बाद 'आर्टेमिस 2' मिशन के जरिए इंसानों को फिर से चांद के सफर पर भेजने की तैयारी कर रहा है। चार अंतरिक्ष यात्रियों वाले इस एतिहासिक 'फ्लाईबाय' मिशन में पहली बार एक महिला और अश्वेत यात्री भी शामिल हैं। जानिए दुनिया के सबसे ताकतवर रॉकेट से शुरू होने वाले इस खास अंतरिक्ष सफर और पृथ्वी पर इसकी शानदार वापसी से जुड़ी हर अहम जानकारी।

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NASA Artemis 2: First Crewed Moon Mission in 50 Years Set for Historic Lunar Flyby
NASA Artemis 2 - फोटो : NASA

    विस्तार

    नासा 50 से भी ज्यादा वर्षों के बाद अपने पहले मानवयुक्त (क्रू) चंद्र मिशन, 'आर्टेमिस 2' की तैयारी कर रहा है। 1972 के बाद यह पहली बार है जब इंसान चांद की ओर उड़ान भरेगा। यह मिशन न सिर्फ नासा के भविष्य के मून मिशन्स की नींव रखेगा, बल्कि इंसानों को पृथ्वी से इतनी दूर ले जाएगा, जितना आज तक कोई नहीं गया। इस लेख में हम आपको इस मिशन से जुड़ी कुछ खास बातें बताने वाले हैं।

    क्या है आर्टेमिस 2 का प्लान?

    आर्टेमिस 2 मिशन का मुख्य उद्देश्य चांद की सतह पर उतरना नहीं, बल्कि इसे भविष्य की मून लैंडिंग के लिए एक टेस्ट मिशन के रूप में तैयार करना है। यह एक 'फ्लाईबाय' मिशन होगा। इसमें 4 अंतरिक्ष यात्री चांद के चारों ओर चक्कर लगाकर सीधे पृथ्वी पर लौट आएंगे। 10 दिन से भी कम समय के इस सफर के दौरान नासा अपने 'ओरियन' स्पेसक्राफ्ट के सिस्टम और सभी जरूरी प्रक्रियाओं का बारीकी से परीक्षण करेगा, ताकि आने वाले समय में इंसानों को सुरक्षित रूप से चांद की सतह पर उतारा जा सके।

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    इतिहास रचने वाला विविधता भरा क्रू

    आर्टेमिस 2 मिशन के लिए चुनी गई टीम न केवल काबिल है, बल्कि यह अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में विविधता की एक नई मिसाल भी पेश करती है। इस एतिहासिक मिशन में पहली बार चांद की यात्रा पर एक महिला, एक अश्वेत और एक गैर-अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री को शामिल किया गया है। टीम की कमान रिटायर्ड नेवी कैप्टन रीड वाइजमैन के हाथों में है, जो पहले भी स्पेस स्टेशन में रह चुके हैं। उनके साथ अनुभवी अंतरिक्ष यात्री क्रिस्टीना कोच हैं। इनके नाम एक महिला के जरिए सबसे लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने का रिकॉर्ड दर्ज है।

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    मिशन की विविधता को आगे बढ़ाते हुए नेवी टेस्ट पायलट विक्टर ग्लोवर इसमें शामिल हैं, जो स्पेस स्टेशन पर रहने वाले पहले अश्वेत यात्री रह चुके हैं। वहीं, कनाडाई स्पेस एजेंसी के पूर्व फाइटर पायलट जेरेमी हेन्सेन इस मिशन के साथ अपना अंतरिक्ष डेब्यू करेंगे। हेन्सेन टीम के इकलौते ऐसे सदस्य हैं जो पहली बार अंतरिक्ष का सफर तय कर रहे हैं, जो इस मिशन को अंतरराष्ट्रीय सहयोग का एक बड़ा प्रतीक बनाता है।

    दुनिया का सबसे ताकतवर रॉकेट: SLS

    आर्टेमिस 2 मिशन की सबसे बड़ी ताकत नासा का स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट है। 322 फीट की ऊंचाई वाला यह महाशक्तिशाली रॉकेट पुराने अपोलो मिशन के 'सैटर्न V' से भी कहीं ज्यादा पावरफुल है। अंतरिक्ष यात्री इसी रॉकेट के सबसे ऊपरी हिस्से में लगे 'ओरियन कैप्सूल' में सवार होकर अपना सफर तय करेंगे। हालांकि, इस सफर की राह में कुछ चुनौतियां भी आई हैं। रॉकेट में लिक्विड हाइड्रोजन लीक और हीलियम से जुड़ी तकनीकी दिक्कतों की वजह से इसके शुरुआती टेस्ट्स में देरी हुई। इसके चलते अब इस मिशन के अप्रैल तक लॉन्च होने की संभावना है।

    कैसा होगा सफर और वापसी?

    आर्टेमिस 2 का यह सफर रोमांच और चुनौतियों से भरा होगा। लॉन्च के बाद शुरुआती 25 घंटों तक टीम पृथ्वी की ऊंची कक्षा में रहकर ओरियन स्पेसक्राफ्ट को मैनुअली कंट्रोल करने की प्रैक्टिस करेगी। इसके बाद, मुख्य इंजन के चालू होते ही अंतरिक्ष यात्रियों का असली सफर चांद की ओर शुरू होगा।

    यह मिशन एक नया कीर्तिमान भी स्थापित करेगा, क्योंकि ओरियन स्पेसक्राफ्ट चांद से करीब 5 हजार मील आगे तक जाएगा, जो अपोलो 13 के जरिए बनाए गए पिछले रिकॉर्ड से भी कहीं ज्यादा दूर है। इस दौरान क्रू के पास चांद के उन अनदेखे हिस्सों की तस्वीरें लेने का भी मौका होगा जिन्हें पृथ्वी से कभी नहीं देखा जा सकता। अंत में, लगभग 2,44,000 मील की लंबी एतिहासिक यात्रा पूरी करने के बाद, यह कैप्सूल सीधे पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करेगा और सैन डिएगो के पास प्रशांत महासागर में पैराशूट के जरिए 'स्प्लैशडाउन' यानी सुरक्षित लैंडिंग करेगा, जहां से नौसेना की टीमें इसे रिकवर कर लेंगी।

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