सरकार vs व्हाट्सएप: आखिर सरकार WhatsApp से चाहती क्या है, क्यों मचा है इतना बवाल?

प्रदीप पाण्डेय
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीप्रदीप पाण्डेय
Fri, 28 May 2021 02:09 PM IST
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Whatsapp vs Indian Government whats is the dispute over new it guidelines for social media and ott
whatsapp vs indian government - फोटो : amarujala

    सोशल मीडिया के लिए सरकार की ओर से जारी की गई नई गाइडलाइन को लेकर बवाल मचा हुआ है। डेडलाइन खत्म होने के बाद भी सोशल मीडिया कंपनियों ने सरकार के नए कानून को लागू नहीं किया जिसके बाद से इन पर भारत में बैन होने की खबरें वायरल होने लगीं, हालांकि फेसबुक और गूगल ने साफतौर पर कह दिया है कि वे सरकार के मुताबिक ही काम करेंगे, उन्हें नए नियमों से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन ट्विटर और व्हाट्सएप को परेशानी है। ट्विटर और व्हाट्सएप नए नियमों को लागू करने के लिए राजी नहीं हो रहे हैं। व्हाट्सएप ने सरकार के नए आईटी नियमों पर कहा है कि यह असंवैधानिक है और लोगों की निजता के मौलिक अधिकार के खिलाफ है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि सरकार आखिर व्हाट्सएप से चाहती क्या है और व्हाट्सएप की परेशानी क्या है?

    सरकार को व्हाट्सएप से क्या चाहिए?

    सरकार अपने नए नियमों के तहत सबसे पहले भेजे गए किसी मैसेज के बारे में पूरी जानकारी चाहती है। सीधे शब्दों में कहें तो किस मैसेज को सबसे पहले किसने भेजा, उसके बाद उस मैसेज को किस-किसने फॉरवर्ड किया और किसे किया, इन सभी जानकारियों को सरकार व्हाट्सएप से लेना चाहती है। इसे एक उदाहरण से समझते हैं, मान लीजिए कि अ नाम के एक व्यक्ति ने सबसे पहले एक आपत्तिजनक मैसेज लिखा और कई लोगों को भेज दिया। इस मैसेज के कारण कहीं कुछ दंगा या बवाल हो गया तो अब सरकार यह चाहती है कि व्हाट्सएप उसे सबसे पहले मैसेज वाले शख्स यानी अ की पूरी जानकारी व्हाट्सएप उसे दे।

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    मसलन अ का पूरा नाम क्या है, उसकी ई-मेल आईडी क्या है और उसकी लोकेशन आदि। सरकार ने यह भी कहा है कि सरकार अपने हर नागरिक के निजता के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा को भी सुनिश्चित करना है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार सबसे पहले मैसेज शेयर करने वाले यूजर की जानकारी व्हाट्सएप से तभी मांगी जाएगी जब अदालत इसके लिए आर्डर पास करता या फिर केंद्र सरकार IT एक्ट की धारा 69 के तहत भारत के संप्रभुता-अखंडता, रक्षा ,राज्यों की सुरक्षा या पब्लिक ऑर्डर मेंटेन करने के लिए ऐसा कहे।

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    व्हाट्सएप की परेशानी क्या है?

    व्हाट्सएप ने साल 2016 में एंड टू एंड एन्क्रिप्शन को लागू किया था जो कि किसी मैसेज के लिए सबसे पुख्ता सुरक्षा है। एंड टू एंड एन्क्रिप्शन के कारण कोई भी थर्ड पार्टी आपके मैसेज को नहीं पढ़ सकता है, यहां तक कि व्हाट्सएप भी आपके मैसेज को नहीं पढ़ता है। सरकार के नए नियम में प्रावधान है कि कोर्ट के ऑर्डर के बाद व्हाट्सएप को सबसे पहले भेजे गए मैसेज के बारे में सरकार को बताना होगा यानी व्हाट्सएप को अपना एंट टू एंड एन्क्रिप्शन तोड़ना होगा।

    व्हाट्सएप के मुताबिक किसी यूजर के मैसेज को ट्रैक करना या उसका एंड टू एंड एन्क्रिप्शन खत्म करना मानवाधिकार का उल्लंघन है। यदि व्हाट्सएप एंड टू एंड एन्क्रिप्शन खत्म कर देता है तो उसे प्रत्येक मैसेज के लिए एक अलग पहचान देनी होगी और पूरा डाटाबेस तैयार करना होगा, हालांकि यह भी ध्यान देने वाली बात है कि व्हाट्सएप के स्वामित्व वाली कंपनी फेसबुक नए नियमों को लेकर राजी हो गई है, जबकि व्हाट्सएप राजी नहीं हो रहा है।

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