WhatsApp: डेटा लीक पर उठे सवालों पर मेटा ने दी सफाई, कहा- व्हाट्सएप चैट्स पूरी तरह सुरक्षित
WhatsApp के बग बाउंटी प्रोग्राम के तहत एक खतरनाक सिक्योरिटी खामी का खुलासा हुआ है। अगर इस खामी को दूर नहीं किया जाता तो करोड़ों व्हाट्सपएप यूजर्स का डेटा लीक होने का डर था। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस खामी के बारे में Meta को 2017 से जानकारी थी, लेकिन कार्रवाई देर से हुई।

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आपने भी कभी गौर किया होगा कि WhatsApp पर आपको कई बार अंजान नंबरों से सिर्फ "Hi" वाले मैसेज आते हैं और रिप्लाई देने के बाद भी उधर से कोई जवाब नहीं मिलता। भारत में शायद हर व्हाट्सएप यूजर को कभी न कभी ऐसे मैसेज जरूर मिले होंगे। लेकिन व्हाट्सएप में ऐसे मैसेज आपको यूं ही नहीं मिल रहे थे, बल्कि इसके पीछे एप की एक ऐसी सुरक्षा खामी थी जिसके वजह से लगभग करोड़ों व्हाट्सएप यूजर्स का डेटा पर खतरे में पड़ सकता था।
रिसर्च में पकड़ी गई बड़ी सुरक्षा खामी
दरअसल, ऑस्ट्रिया की यूनिवर्सिटी ऑफ विएना की रिसर्च टीम ने एक रिसर्च के आधार पर दावा किया कि वे 57% व्हाट्सएप यूजर्स की प्रोफाइल फोटो और 29% यूजर्स के “About” टेक्स्ट तक पहुंचने में कामयाब रहे। यह खोज कंपनी की बग बाउंटी प्रोग्राम के तहत की गई थी, जिसमें कंपनी अपने सॉफ्टवेयर में खामी निकालने का मौका देती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, व्हाट्सएप की इस सुरक्षा खामी के बारे में मेटा को 2017 में ही जानकारी दी जा चुकी थी। इसके बावजूद WhatsApp और Meta ने समय पर उचित कदम नहीं उठाए, जिससे खतरा वर्षों तक बना रहा।
शोधकर्ताओं के मुताबिक, यदि कोई हैकर इस डेटा को हासिल कर लेता, तो यह इतिहास का सबसे बड़ा डेटा लीक बन जाता और यह 2021 के फेसबुक डेटा लीक को भी पीछे छोड़ देता। रिसर्च टीम ने बताया कि अब तक इस स्तर का डेटा एक्सपोजर पहले कभी दर्ज नहीं हुआ।
WhatsApp में कहां ये लूपहोल?
WhatsApp में Contact Discovery नाम का एक बेसिक फीचर है, जो आपकी कॉन्टैक्ट लिस्ट सिंक करने पर बताता है कि कौन WhatsApp यूज करता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि एप में “रेट-लिमिटिंग” नहीं होने के कारण, कोई भी दिन में कितने बार भी इस फीचर का इस्तेमाल करके मोबाइल नंबरों की बड़ी रेंज स्कैन कर सकता है। इस प्रक्रिया को स्क्रेपिंग कहते हैं, जिसमें लोगों की पब्लिकली उपलब्ध जानकारियों की मदद से उनकी पर्सनल जानकारी निकालने की कोशिश की जाती है।
एक बार नंबर WhatsApp पर कन्फर्म हो जाने के बाद, इसी तकनीक से यूजर की पब्लिक प्रोफाइल जानकारी, जैसे डिस्प्ले पिक, About टेक्स्ट, डिवाइस टाइप और नंबर से जुड़े कम्पैनियन डिवाइस का भी पता लगाया जा सकता था। नंबर एक्टिव है या नहीं यह जानने के लिए उसपर "Hi" या "How Are You" जैसे मैसेज भेजे जाते थे। रिप्लाई आने पर कन्फर्म हो जाता था कि नंबर एक्टिव है। रिसर्चर्स ने यह भी अंदाजा लगाया है कि सुरक्षा खामी के वजह से शायद करोड़ों व्हाट्सएप यूजर्स के मोबाइल नंबर डार्क वेब पर भी उपलब्ध हो सकते हैं।
2025 में रिपोर्ट करने पर हरकत में आई WhatsApp
शोधकर्ताओं ने अप्रैल 2025 में इस बग के बारे में WhatsApp को दुबारा बताया। शुरू में कंपनी ने इस मुद्दे पर ज्यादा रुचि नहीं दिखाई। लेकिन कई बार संवाद और विस्तृत रिपोर्ट मिलने के बाद उसने शोधकर्ताओं के साथ मिलकर सुधार शुरू किया। आखिर में अक्टूबर 2025 में WhatsApp ने कॉन्टैक्ट डिस्कवरी पर सख्त रेट लिमिटिंग लागू की, जिससे बड़े पैमाने पर डेटा स्क्रेपिंग अब संभव नहीं होगी।
WhatsApp ने कहा- डेटा है सुरक्षित
इस मामले पर व्हाट्सएप की पेरेंट कंपनी मेटा ने एक्स पर स्पष्टिकरण भी जारी किया है। कंपनी ने बताया कि किसी भी तरह का डेटा लीक या सिक्योरिटी में कमी नहीं पाई गई है। मेटा ने बताया कि खामी का पता लगाने और दूर करने के लिए बग बाउंटी प्रोग्राम के तहत अकादमिक सहयोग की गई थी। रिसर्चर्स ने किसी भी गैर-सार्वजनिक जानकारी का उपयेग नहीं किया और स्टडी में इकट्ठा किए गए डेटा को सुरक्षित रूप से डिलीट कर दिया है। इस खामी का किसी हैकर द्वारा दुरुपयोग किए जाने का कोई सबूत नहीं मिला। मेटा ने लिखा, "एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन से पर्सनल मैसेज सुरक्षित हैं। हम हमेशा बग बाउंटी प्रोग्राम के तहत रिसर्चर्स का स्वागत करते हैं।"