रिसर्च में दावा: स्मार्टफोन एप्लिकेशन की मदद से लगाया जा सकता है पुल की मजबूती का पता
अध्ययन के अनुसार, स्मार्टफोन एप्लिकेशन यह जानने के लिए मददगार हो सकता है कि सैन फ्रांसिस्को का गोल्डन गेट ब्रिज या इसी तरह का कोई अन्य पुल अच्छी तरह से पकड़ में है या नहीं।

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आजकल स्मार्टफोन पर निर्भरता बढ़ती जा रही है। स्मार्टफोन से कैमरे से लेकर कम्प्यूटर तक के काम किए जा सकते हैं। अब एक अध्ययन में पता चलता है कि विशेष सॉफ्टवेयर से लैस मोबाइल फोन वाहन की मदद से पुलों को पार करते समय उपयोगी संरचनात्मक डाटा एकत्र कर सकते हैं। ऐसा करने पर मोबाइल एप स्वयं पुलों से जुड़े सेंसर के सेट के लिए एक कम खर्चीला विकल्प बन सकते हैं।
अध्ययन के अनुसार, स्मार्टफोन एप्लिकेशन यह जानने के लिए मददगार हो सकता है कि सैन फ्रांसिस्को का गोल्डन गेट ब्रिज या इसी तरह का कोई अन्य पुल अच्छी तरह से पकड़ में है या नहीं। अध्ययन के को-ऑथर कार्लो रत्ती कहते हैं कि अध्ययन की मुख्य खोज यह है कि पुलों के संरचनात्मक स्वास्थ्य या उसकी मजबूती के बारे में जानकारी स्मार्टफोन से एकत्रित एक्सेलेरोमीटर डाटा से निकाली जा सकती है।
दरअसल, गोल्डन गेट ब्रिज पर यह रिसर्च आंशिक रूप से आयोजित किया गया था। मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी), यूएस की रिसर्च के अध्ययन से पता चला है कि मोबाइल डिवाइस ब्रिज कंपन के बारे में उसी तरह की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं जो स्थिर सेंसर एकत्रित करते हैं। रिसर्चस का यह भी अनुमान है कि मोबाइल-उपकरण मॉनिटरिंग की मदद से सड़क पुल की उम्र को भी 15 प्रतिशत से 30 प्रतिशत अधिक वर्ष के लिए बढ़ाया जा सकता है।
नेचर कम्युनिकेशंस इंजीनियरिंग में प्रकाशित अपने नए पेपर में लेखकों ने लिखा कि इन परिणामों से पता चलता है कि स्मार्टफोन द्वारा एकत्र किए गए बड़े और सस्ते डाटासेट मौजूदा परिवहन बुनियादी ढांचे के स्वास्थ्य की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। रिसर्चर के अनुसार पुल स्वाभाविक रूप से कंपन करते हैं और कई दिशाओं में उन कंपनों की आवश्यक मोडल आवृत्तियों का अध्ययन करने के लिए इंजीनियर आमतौर पर एक्सेलेरोमीटर जैसे सेंसर को पुलों पर लगाते हैं। समय के साथ मोडल आवृत्तियों में परिवर्तन पुल की संरचनात्मक अखंडता में परिवर्तन का संकेत दे सकता है।