Sanchar Saathi APP: सरकार ने संचार साथी एप के प्री-इंस्टॉलेशन की अनिवार्यता हटाई, कहा-इसकी स्वीकार्यता बढ़ रही

नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीनीतीश कुमार
Wed, 03 Dec 2025 05:10 PM IST
सार

Sanchar Saathi App: केंद्र सरकार ने संचार साथी एप पर बढ़ते विवादों के बीच एप के प्री-इंस्टॉलेशन की अनिवार्यता को हटाने का फैसला किया है। दूरसंचार मंत्रालय ने इसकी जानकारी एक्स पोस्ट के जरिए दी है।

Govt says pre installation of Sanchar Saathi app on phones not mandatory details
सरकार ने फोन में संचार साथी एप की अनिवार्यता हटाई - फोटो : अमर उजाला

    विस्तार

    संचार साथी एप कर केंद्र सरकार का बड़ा बयान सामने आया है। सरकार ने फोन में इस एप के प्री-इंस्टॉलेशन को जरूरी नहीं बताया है। दूरसंचार मंत्रालय ने एक्स (X) पर एक पोस्ट जारी कर इस एप की प्री-इंस्टॉलेशन की अनिवार्यता को हटाने की जानकारी दी है।

    मंत्रालय ने एक्स पोस्ट में कहा, "सभी नागरिकों को साइबर सुरक्षा का लाभ देने के उद्देश्य से सरकार ने सभी स्मार्टफोन्स में संचार साथी एप को प्री-इंस्टॉल करना अनिवार्य किया था। यह एप पूरी तरह सुरक्षित है और इसका मकसद सिर्फ नागरिकों को साइबर दुनिया के अपराधियों से बचाना है... संचार साथी की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए, सरकार ने मोबाइल निर्माताओं के लिए अनिवार्य प्री-इंस्टॉलेशन को हटाने का फैसला लिया है।"

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    एपल ने जताई थी असहमती

    बता दें कि केंद्र सरकार के इस कदम को एपल के फैसले से भी जोड़कर देखा जा रहा है। 28 नवंबर को सरकार से आदेश मिलने के बाद स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनी एपल (Apple) ने इसका पालन करने से इंकार कर दिया था। कंपनी ने कहा था कि यह कदम iPhone यूजर्स के निजी डेटा को खतरे में डाल सकता है। एपल ने रॉयटर्स के हवाले से कहा था कि कंपनी अपनी चिंताएं सरकार के सामने रखेगी।

    सरकार ने कहा- जन भागीदारी बढ़ाना था उद्देश्य

    मंत्रायल के मुताबिक यह एप "जन भागीदारी" को बढ़ावा देता है, क्योंकि नागरिक किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि की रिपोर्ट कर सकते हैं और खुद को सुरक्षित रख सकते हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस एप का कोई अन्य उद्देश्य नहीं है और यदि उपयोगकर्ता चाहें तो वे इसे कभी भी अनइंस्टॉल कर सकते हैं।

    एप पर बढ़ रहा था राजनीतिक घमासान

    बता दें कि स्मार्टफोन में एप के प्री-इंस्टॉलेशन को 90 दिनों के भीतर अनिवार्य बनाने के आदेश के बाद विपक्ष ने संसद में कड़ा विरोध दर्ज कराया था। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने दूरसंचार विभाग के निर्देश पर कड़ी प्रतिक्रिया दर्ज कराते हुए इसे तानाशाही करार दिया था। विपक्ष के कई नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार फ्रॉड को रोकने के नाम पर नागरिकों की जासूसी करना चाहती है। वहीं, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी आरोप लगाते हुए कहा था कि मोदी सरकार का फोन में संचार सारथी एप इंस्टॉल करने का आदेश लोगों की निजता और आजादी पर खुला हमला है।

    हालांकि, विपक्ष के सभी आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बुधवार को लोकसभा में कहा कि 'संचार साथी' एप के जरिए जासूसी बिल्कुल भी संभव नहीं है। यह एप लोगों की सुरक्षा और मदद के लिए बनाया गया है। उन्होंने कहा कि इस एप से लोगों की गतिविधियों पर नजर रखने की सरकार की कोई मंशा नहीं है। बता दें नोटिफिकेशन के मुताबिक पहले सरकार ने कहा था कि एप फोन में अनिवार्य होगा और इसे डिलीट नहीं किया जा सकेगा। हालांकि, विवाद बढ़ने पर दूरसंचार मंत्री ने ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मीडिया को बताया था कि जरूरत न होने पर एप को फोन से डिलीट किया जा सकता है।

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    अब तक 1.4 करोड़ डाउनलोड

    सरकार द्वारा एक्स पर जारी बयान के मुताबिक, अब तक 1.4 करोड़ लोग यह एप डाउनलोड कर चुके हैं और रोजाना लगभग 2000 ऑनलाइन फ्रॉड मामलों की जानकारी भेज रहे हैं। बयान में कहा गया, "एप डाउनलोड करने वाले उपयोगकर्ताओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। एप को अनिवार्य बनाने का उद्देश्य अधिक से अधिक जागरूकता फैलाना था, ताकि कम तकनीक-जानकार लोग भी इसे आसानी से इस्तेमाल कर सकें। केवल पिछले एक दिन में ही 6 लाख लोगों ने एप डाउनलोड करने के लिए रजिस्ट्रेशन किया है, जो कि सामान्य से 10 गुना अधिक है। यह दर्शाता है कि लोग अपनी सुरक्षा के लिए इस ऐप पर भरोसा कर रहे हैं।"

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