Google का नया नियम: प्ले स्टोर के बाहर से एप इंस्टॉल करना हुआ मुश्किल, आया 'Advanced Flow' फीचर

Suyash Pandey
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीSuyash Pandey
Fri, 20 Mar 2026 04:59 PM IST
सार

Google Sideloading New Rules:

क्या आप भी थर्ड-पार्टी वेबसाइट्स से एप्स डाउनलोड करते हैं? गूगल ने अब इसे और ज्यादा सुरक्षित और थोड़ा सा मुश्किल बना दिया है। यूजर्स को धोखेबाजों और फर्जी एप्स से बचाने के लिए नया 'एडवांस्ड फ्लो' सिस्टम लागू किया जा रहा है। इस लेख में जानेंगे कि एंड्रॉयड का यह नया नियम क्या है और यह कैसे काम करेगा।

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Google Tightens Android Sideloading Rules with New ‘Advanced Flow’ Security System
प्ले स्टोर के बाहर एप्स डाउनलोड करने वालों के लिए गूगल ने एडवांस्ड इंस्टॉल फ्लो फीचर जारी किया - फोटो : एआई

    विस्तार

    गूगल ने एंड्रॉयड पर 'साइडलोडिंग' यानी गूगल प्ले स्टोर के बाहर से एप्स इंस्टॉल करने के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। कंपनी एक नया 'एडवांस्ड फ्लो' सिस्टम लेकर आई है। इसका सीधा सा मतलब यह है कि अब किसी अनजान या अनवेरिफाइड डेवलपर के एप को फोन में डालना पहले जितना आसान नहीं होगा। आइए समझते हैं कि क्या है ये नया सिस्टम और कैसे काम करेगा...

    'एडवांस्ड फ्लो' क्या है? क्या अब आप बाहर से एप इंस्टॉल कर पाएंगे?

    आप अभी भी बाहर से एप्स इंस्टॉल कर पाएंगे। गूगल इसे पूरी तरह बंद नहीं कर रहा है, लेकिन इसे थोड़ा मुश्किल और सुरक्षित जरूर बना रहा है। पहले आप किसी भी बाहरी एप को बस एक चेतावनी को इग्नोर करके इंस्टॉल कर लेते थे। लेकिन अब यूजर्स को एडवांस्ड फ्लो नाम के एक खास और लंबे प्रोसेस से गुजरना होगा।

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    गूगल ने ऐसा क्यों किया?

    गूगल का कहना है कि यह नया तरीका यूजर्स को ऑनलाइन ठगों से बचाने के लिए बनाया गया है। अक्सर स्कैमर्स लोगों को डराकर, जैसे बैंक खाता खाली होने या पुलिस केस का डर दिखाकर जल्दबाजी में कोई खतरनाक एप इंस्टॉल करवा देते हैं। यह नया सिस्टम ऐसी ही जल्दबाजी और धोखाधड़ी की चेन को तोड़ने का काम करेगा।

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    एडवांस्ड फ्लो कैसे काम करता है?

    अगर आप अब किसी अनजान सोर्स से एप इंस्टॉल करना चाहते हैं तो आपको इस वन-टाइम प्रोसेस से गुजरना होगा:

    स्टेप 1: डेवलपर मोड चालू करें:

    सबसे पहले आपको फोन की सेटिंग्स में जाकर 'बिल्ड नंबर' पर लगातार 7 बार टैप करना होगा, जिससे 'डेवलपर मोड' ऑन हो जाएगा।

    स्टेप 2: ऑन-स्क्रीन सिक्योरिटी चेक:

    इसके बाद स्क्रीन पर एक छोटा सा टेस्ट होगा। यह यह सुनिश्चित करेगा कि कोई ठग फोन पर बात करते हुए आपको ये सब करने के लिए मजबूर तो नहीं कर रहा है।

    स्टेप 3: फोन रिस्टार्ट करें:

    इसके बाद आपको अपना डिवाइस रिस्टार्ट करना होगा। इससे अगर कोई स्कैमर छुपकर आपकी स्क्रीन देख रहा होगा तो उसका कनेक्शन टूट जाएगा।

    स्टेप 4: 24 घंटे का इंतजार:

    इन सभी स्टेप्स को पूरा करने के बाद भी आप तुरंत एप इंस्टॉल नहीं कर पाएंगे। आपको 24 घंटे का इंतजार करना होगा और फिर अपना पासवर्ड या फिंगरप्रिंट/फेस लॉक डालकर अपनी पहचान साबित करनी होगी।

    स्टूडेंट्स और नए डेवलपर्स के लिए अच्छी खबर

    सुरक्षा कड़े करने के साथ-साथ गूगल ने स्टूडेंट्स और शौक के लिए एप बनाने वालों को एक बड़ी राहत दी है। गूगल अब एक फ्री लिमिटेड डिस्ट्रीब्यूशन अकाउंट दे रहा है। इसका फायदा यह है कि अब आप बिना कोई फीस दिए या सरकारी आईडी दिए अपने बनाए गए एप्स को 20 डिवाइस तक आसानी से शेयर और टेस्ट कर सकते हैं।

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