Google को नहीं मिली राहत: EU की शीर्ष अदालत ने बरकरार रखा 4.1 अरब यूरो का जुर्माना, जानें क्या है पूरा मामला
EU Court Google Fine:
दिग्गज कंपनी गूगल को यूरोप में बड़ा कानूनी झटका लगा है। यूरोपीय संघ की सर्वोच्च अदालत ने एंड्रॉयड से जुड़े एंटी-ट्रस्ट मामले में गूगल पर जुर्माना बरकरार रखा है। आइए जानते हैं आखिर क्या है पूरा मामला?

विस्तार
Google Android Antitrust Fine:
गूगल और उसकी पैरेंट कंपनी अल्फाबेट को यूरोप में अब तक का सबसे बड़ा कानूनी झटका लगा है। आज यानी बृहस्पतिवार को यूरोपीय संघ (EU) की शीर्ष अदालत, यूरोपीय कोर्ट ऑफ जस्टिस (ECJ) ने कंपनी की ओर से की गई अंतिम अपील को भी पूरी तरह खारिज कर दिया। आपको बता दें यह अपील गूगल ने ईयू की जनरल कोर्ट के उस पुराने फैसले के खिलाफ की थी, जिसमें उस पर एंटी-ट्रस्ट यानी एकाधिकार विरोधी नियमों के उल्लंघन को दोषी पाया गया था। अदालत के आज के आदेश के बाद यूरोपीय आयोग की ओर से तय अरबों डॉलर के जुर्माने पर ही अंतिम मुहर लग गई है।
आखिर पूरा मामला क्या है?
दरअसल, यह विवाद 2018 में शुरू हुआ था, जब यूरोपीय आयोग ने गूगल पर उस समय का सबसे बड़ा एंटी-ट्रस्ट जुर्माना लगाया था। आयोग का आरोप था कि कंपनी ने एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम का इस्तेमाल करके अपने सर्च इंजन और क्रोमा ब्राउजर को बढ़ावा दिया है। साथ ही प्रतिस्पर्धा काे नुकसान भी पहुंचाया है।
यूरोपीय कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया?
यूरोपीय कोर्ट ऑफ जस्टिस (ECJ) ने गूगल और उसकी पैरेंट कंपनी अल्फाबेट की अपील को खारिज कर दिया। अदालत ने पहले दिए गए फैसले को सही माना और 4.1 अरब यूरो के जुर्माने को बरकरार रखा। अदालत के अनुसार, गूगल ने एंड्रॉयड इकोसिस्टम में अपनी मजबूत स्थिति का गलत इस्तेमाल किया।
गूगल पर क्या आरोप लगाए गए थे?
यूरोपीय आयोग की जांच में गूगल के कामकाज के तरीकों को लेकर तीन बेहद गंभीर और बड़े खुलासे हुए थे:
अनिवार्य प्री-इंस्टॉलेशन
: गूगल ने स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों (ओईएम) के सामने शर्त रखी थी कि अगर वे अपने फोन में गूगल का प्ले स्टोर चाहते हैं, तो उन्हें गूगल सर्च इंजन और क्रोम ब्राउजर को फोन में पहले से ही इंस्टॉल करना अनिवार्य होगा।
सीक्रेट पेमेंट का आरोप:
कंपनी पर यह भी आरोप लगा कि उसने कुछ चुनिंदा मोबाइल निर्माताओं और नेटवर्क ऑपरेटरों को गुप्त रूप से वित्तीय भुगतान (पैसा) किया, बशर्ते वे अपने डिवाइस में सिर्फ और सिर्फ गूगल सर्च को ही डिफॉल्ट रूप से प्री-इंस्टॉल रखें।
वैकल्पिक वर्शन्स पर पाबंदी:
गूगल ने डिवाइस निर्माताओं पर यह कड़ा प्रतिबंध लगा रखा था कि वे बाजार में ऐसे फोन नहीं बेच सकते जो एंड्रॉयड के दूसरे वैकल्पिक वर्शन्स पर चलते हों, जिन्हें गूगल की ओर से आधिकारिक मंजूरी नहीं मिली थी।
यह फैसला क्यों अहम है?
एंड्राॅयड से जुड़ा यह मामला यूरोपीय आयोग की ओर से गूगल के खिलाफ शुरू की गई सबसे बड़ी प्रतिस्पर्धा जांचों में से एक रहा है। एक्सपर्ट्स के अनुसार यह फैसला बताता है कि बड़ी टेक कंपनियों पर बाजार में दबदबे के दुरुपयोग को लेकर यूरोप का रुख अब भी सख्त बना हुआ है और भविष्य में भी ऐसे मामलों में कड़ी निगरानी जारी रह सकती है।