Google Doodle: गूगल ने पाई डे 2026 पर बनाया ये खास डूडल, आर्किमिडीज के गणितीय योगदान को दी श्रद्धांजलि

Suyash Pandey
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीSuyash Pandey
Sat, 14 Mar 2026 01:39 PM IST
सार

Pi Day 2026 Google Doodle:

हर साल 14 मार्च को दुनिया भर में पाई डे का उत्साह देखने को मिलता है और इस बार गूगल ने एक खास डूडल के जरिए इस दिन को और भी यादगार बना दिया है। यह डूडल महान ग्रीक गणितज्ञ आर्किमिडीज और उनकी उस क्रांतिकारी 'ज्यामितीय विधि' को समर्पित है...

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Google Celebrates Pi Day 2026 with Doodle Honouring Archimedes
गूगल 'पाई डे' डूडल - फोटो : गूगल

    विस्तार

    आज 14 मार्च है, जिसे दुनिया भर में पाई डे के रूप में मनाया जाता है। इस मौके पर गूगल ने एक बेहद खास और ज्ञानवर्धक डूडल पेश किया है। यह डूडल प्राचीन ग्रीक गणितज्ञ आर्किमिडीज को समर्पित है। इन्होंने 2000 साल पहले दुनिया को बताया था कि पाई की सटीक वैल्यू कैसे निकाली जा सकती है।

    गूगल डूडल की इतिहास और वजह

    गूगल डूडल गूगल के लोगो में किया जाने वाला एक अस्थायी और कलात्मक बदलाव है। इसे खास मौकों, महान हस्तियों और ऐतिहासिक घटनाओं को सम्मान देने के लिए बनाया जाता है। इसकी शुरुआत वर्ष 1998 में एक मजेदार 'आउट ऑफ ऑफिस' मैसेज के तौर पर हुई थी। तब संस्थापक लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन ने बर्निंग मैन फेस्टिवल में जाने की जानकारी देने के लिए पहला डूडल बनाया था। आज ये केवल एक तस्वीर न रहकर इंटरएक्टिव गेम्स, क्विज और वीडियो का रूप ले चुका है। इसे 'डूडलर्स' नाम की एक विशेषज्ञ टीम तैयार करती है। इसका मुख्य उद्देश्य दुनिया भर की महत्वपूर्ण जानकारियों और सांस्कृतिक उत्सवों को मनोरंजक तरीके से लोगों तक पहुंचाना है, ताकि यूजर्स हर दिन कुछ नया और दिलचस्प सीख सकें।

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    14 मार्च को ही क्यों मनाते हैं पाई डे?

    गणित में पाई का मान लगभग 3.14 माना जाता है। अगर आप गौर करें तो कैलेंडर में मार्च तीसरा महीना है और आज तारीख 14 है, जो मिलकर 3/14 बनता है। यही वजह है कि हर साल इसी दिन को पाई के सम्मान में चुना गया है। दिलचस्प बात यह भी है कि आज महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन का जन्मदिन भी है।

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    क्या है इस बार के गूगल डूडल में खास?

    इस साल का गूगल डूडल आर्किमिडीज की उस 'जादुई' ज्यामितीय विधि को खूबसूरती से दर्शाता है, जिसके जरिए उन्होंने सदियों पहले पाई का सटीक अनुमान लगाया था। आर्किमिडीज ने अपनी इस तकनीक में एक वृत्त के अंदर और बाहर बहुभुज बनाकर पाई का मान निकालने की अनोखी विधि विकसित की थी। उन्होंने 96 भुजाओं वाली आकृतियों का उपयोग करते हुए यह गणितीय प्रमाण दिया कि पाई की वैल्यू किन दो निश्चित संख्याओं के बीच आती है। उनकी यही ऐतिहासिक खोज आगे चलकर आधुनिक कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग के लिए एक मजबूत आधार बनी। इसी सी आज की जटिल गणनाएं संभव हो सकी हैं।

    आखिर क्या होता है 'पाई' (π)?

    आसान भाषा में कहें तो किसी भी गोल आकृति (वृत्त) की लंबाई और उसकी चौड़ाई के बीच के अनुपात को पाई कहते हैं। यह एक अपरिमेय संख्या है, यानी दशमलव के बाद इसके अंक कभी खत्म नहीं होते (3.14159...) और न ही कभी रिपीट होते हैं। इसका इस्तेमाल नासा के स्पेस मिशन से लेकर आपके स्मार्टफोन के जीपीएस तक, हर जगह होता है।

    पाई डे का इतिहास और सफर

    पाई डे के सफर की शुरुआत साल 1988 में हुई थी, जब भौतिक विज्ञानी लैरी शॉ ने सैन फ्रांसिस्को के एक्सप्लोरेटोरियम में इसे पहली बार मनाया था। इसके महत्व को देखते हुए साल 2009 में अमेरिकी सरकार ने 14 मार्च को आधिकारिक तौर पर 'नेशनल पाई डे' घोषित कर दिया। धीरे-धीरे इसकी लोकप्रियता इतनी बढ़ गई कि आज इसे दुनिया भर में UNESCO के जरिए 'अंतर्राष्ट्रीय गणित दिवस' के रूप में मनाया जाता है।

    भारत समेत अमेरिका, जापान, ब्राजील और ब्रिटेन जैसे कई देशों में आज गूगल के होमपेज पर यह डूडल दिखाई दे रहा है। लोग इस दिन को मैथ पजल्स सुलझाकर और पाई की वैल्यू याद करने की प्रतियोगिताओं के साथ सेलिब्रेट कर रहे हैं।

    क्या आप जानते हैं?

    कंप्यूटर के जरिए अब तक पाई के ट्रिलियन (लाखों-करोड़ों) अंकों की गणना की जा चुकी है, लेकिन आज भी इसका कोई अंत नहीं मिला है।

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