ChatGPT: पांच महीने तक चैटजीपीटी से बात करता रहा शख्स, फिर मां को मारकर दी जान; कोर्ट पहुंचा मामला

सुयश पांडेय
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीसुयश पांडेय
Tue, 20 Jan 2026 12:10 PM IST
सार

अमेरिका में अगस्त 2025 की एक दर्दनाक घटना ने एआई की सुरक्षा और जिम्मेदारी को लेकर नई बहस छेड़ दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक 56 वर्षीय स्टीन-एरिक सोलबर्ग ने अपनी 83 साल की मां की हत्या करने के बाद आत्महत्या कर ली। अब परिवार ने इस मामले में ओपनएआई, उसके सीईओ सैम ऑल्टमैन और माइक्रोसॉफ्ट के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। परिवार का आरोप है कि स्टीन-एरिक पिछले कई महीनों से रोज घंटों चैटजीपीटी का इस्तेमाल कर रहे थे और एआई से लगातार बातचीत ने उनके मानसिक भ्रम को और बढ़ा दिया।

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Family Sues OpenAI After US Murder-Suicide Case, Alleging ChatGPT Reinforced Mental Delusions
ChatGPT - फोटो : X

    विस्तार

    अमेरिका में एक बेहद दुखद घटना सामने आई है, जिसने एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की सुरक्षा को लेकर नई चिंता बढ़ा दी है। अगस्त 2025 में 56 साल के स्टीन-एरिक सोलबर्ग ने अपनी 83 साल की मां सुजैन एबरसन एडम्स की हत्या कर दी और फिर खुद भी आत्महत्या कर ली। अब इस मामले में परिवार ने चैटजीपीटी की पैरेंट कंपनी ओपनएआई के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। परिवार का कहना है कि चैटजीपीटी ने स्टीन-एरिक के मानसिक भ्रम को और बढ़ा दिया, जिससे यह खौफनाक घटना हुई।

    क्या हुआ था?

    'पीपल' मैगजीन के जरिए सामने आए कोर्ट डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक, स्टीन-एरिक ने अपनी मां पर हमला किया, उनका गला घोंटा और फिर खुद को चाकू मारकर जान दे दी। मुकदमे में यह भी कहा गया है कि घटना से पहले स्टीन-एरिक पिछले 5 महीनों से रोज घंटों चैटजीपीटी इस्तेमाल कर रहे थे। उनके बेटे एरिक सोलबर्ग का दावा है कि लगातार एआई से बातचीत करने से उनके पिता की मानसिक हालत और बिगड़ती गई।

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    परिवार का आरोप क्या है?

    एरिक सोलबर्ग का कहना है कि चैटजीपीटी ने उनके पिता को धीरे-धीरे असली दुनिया से काट दिया। उनके मुताबिक, उनके पिता एक 'काल्पनिक दुनिया' में जीने लगे थे, जो चैटजीपीटी से बातचीत के जरिए बन रही थी। इसी वजह से उन्होंने अपनी मां की हत्या कर दी। एरिक और उनकी बहन ने ओपनएआई, उसके सीईओ सैम ऑल्टमैन और माइक्रोसॉफ्ट के खिलाफ मुकदमा दायर किया है।

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    मुकदमे में चैटजीपीटी पर क्या आरोप लगाए गए?

    परिवार का आरोप है कि ओपनएआई का GPT-4o मॉडल 'चापलूस' जैसा व्यवहार कर रहा था। यानी वह गलत और भ्रमित बातों का विरोध करने के बजाय उन्हें सही मानकर जवाब देता रहा। आरोप यह भी है कि जब एक मानसिक रूप से अस्थिर व्यक्ति ने चैटजीपीटी से बात की तो बॉट ने उसकी बातों को और ज्यादा 'सही' और 'पक्के भरोसे' के साथ दोहराया, जिससे उसका भ्रम और बढ़ गया।

    ओपनएआई और एलन मस्क की प्रतिक्रिया

    ओपनएआई ने कहा कि यह घटना बेहद दिल तोड़ने वाली है। कंपनी ने बताया कि वह मामले के दस्तावेजों की जांच कर रही है और चैटजीपीटी को इस तरह ट्रेन किया जा रहा है कि वह मानसिक या भावनात्मक संकट के संकेत पहचान सके और बातचीत को शांत करने में मदद कर सके।

    एलन मस्क ने एक्स पर लिखा कि यह बहुत डरावना है और एआई को ऐसा होना चाहिए जो सच्चाई खोजे, न कि भ्रम को बढ़ावा दे।

    आगे क्या हो सकता है?

    यह मामला एआई कंपनियों की जिम्मेदारी, यूजर्स की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर एआई के असर को लेकर एक बड़ी कानूनी और नैतिक बहस शुरू कर सकता है।

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