Lockdown Mode: चार साल से 'अभेद' है Apple का लॉकडाउन मोड, आज तक कोई स्पाइवेयर नहीं लगा पाया सेंध
Apple Lockdown Mode:
एपल का 'लॉकडाउन मोड' आईफोन यूजर्स के लिए एक ऐसा मजबूत सुरक्षा कवच है, जिसे आज तक कोई हैकर या स्पायवेयर नहीं तोड़ पाया है। इस लेख में जानिए कि यह खास फीचर कैसे काम करता है, इसे ऑन करने पर आपके फोन में क्या-क्या बड़े बदलाव आते हैं और साइबर हमलों से बचने के लिए यह कितना असरदार है।

विस्तार
इस महीने आईफोन की सिक्योरिटी काफी चर्चा में है। एपल ने हाल ही में कुछ सुरक्षा खामियों को ठीक किया है और पुराने सॉफ्टवेयर इस्तेमाल कर रहे यूजर्स को अपना फोन तुरंत अपडेट करने का अलर्ट भेजा है। इसी बीच, एपल ने आधिकारिक तौर पर यह दावा किया है कि हैकर्स के हमलों को नाकाम करने में उनका 'लॉकडाउन मोड' पूरी तरह से सफल रहा है। कंपनी का कहना है कि लगभग चार साल पहले लॉन्च किए गए उनके खास सिक्योरिटी फीचर 'लॉकडाउन मोड' को ऑन रखने वाले किसी भी डिवाइस को आज तक हैक नहीं किया जा सका है।क्या है यह लॉकडाउन मोड?एपल ने साल 2022 में आईफोन, आईपैड और मैक के लिए 'लॉकडाउन मोड' पेश किया था। कंपनी के मुताबिक, यह उन चुनिंदा लोगों को सुरक्षा देने के लिए बनाया गया है, जिन्हें अपने काम या पहचान की वजह से एडवांस और खतरनाक साइबर हमलों का खतरा रहता है। हालांकि, आम लोगों को आमतौर पर ऐसे हमलों का सामना नहीं करना पड़ता। जब आप इस मोड को चालू करते हैं तो आपका फोन हमेशा की तरह नॉर्मल काम नहीं करता। जासूसी वाले सॉफ्टवेयर से डिवाइस को बचाने के लिए कई एप्स, वेबसाइट्स और फीचर्स पर सख्त रोक लगा दी जाती है।
क्या कहते हैं सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स?
सिर्फ एपल ही नहीं, बल्कि दुनिया के बड़े स्वतंत्र साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने भी इस फीचर की मजबूती का लोहा माना है। एमनेस्टी इंटरनेशनल की सिक्योरिटी लैब के प्रमुख डोनचा ओ'सियरबेल, जिन्होंने दर्जनों स्पाइवेयर हमलों की बारीकी से जांच की है, स्पष्ट रूप से कहते हैं कि उन्हें आज तक ऐसा कोई भी आईफोन हैक होने का सबूत नहीं मिला है जिसमें हमले के समय लॉकडाउन मोड चालू था। इसी तरह, टोरंटो यूनिवर्सिटी की मशहूर 'सिटीजन लैब' ने भी अपनी रिपोर्ट्स में इसकी पुष्टि की है कि इस फीचर ने पूरी दुनिया में अपनी जासूसी के लिए मशहूर स्पाईवेयर पेगासस (Pegasus) और प्रीडेटर (Predator) जैसे दुनिया के सबसे खतरनाक स्पाइवेयर हमलों को सफलतापूर्वक नाकाम किया है। यहां तक कि गूगल के सिक्योरिटी रिसर्चर्स ने अपनी जांच में एक हैरान कर देने वाली बात पाई है- कई स्पाइवेयर तो डिवाइस में लॉकडाउन मोड एक्टिव देखते ही अपनी घुसपैठ की कोशिश बीच में ही छोड़ देते हैं, क्योंकि उन्हें डर होता है कि इस मोड की सख्त सुरक्षा की वजह से वे पकड़े जा सकते हैं।
लॉकडाउन मोड ऑन करने पर क्या बदल जाता है?
जब आप अपने डिवाइस में लॉकडाउन मोड को इनेबल करते हैं तो सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए सिस्टम के काम करने के तरीके में बड़े बदलाव आते हैं। सबसे पहले, आपके मैसेज एप की कार्यक्षमता सीमित हो जाती है, जहां फोटो और वीडियो जैसे चुनिंदा मीडिया को छोड़कर बाकी सभी अटैचमेंट ब्लॉक कर दिए जाते हैं। यहां तक कि मैसेज में मिलने वाले लिंक और उनके प्रिव्यू भी काम करना बंद कर देते हैं।
इसी तरह आपकी इंटरनेट ब्राउजिंग पर भी इसका गहरा असर पड़ता है। वेब ब्राउजर की कई एडवांस और जटिल सेटिंग्स को सुरक्षा वजहों से ब्लॉक कर दिया जाता है। इसके चलते कुछ वेबसाइट्स काफी धीमी लोड हो सकती हैं या ठीक से काम नहीं करतीं। इस दौरान सुरक्षा को प्राथमिकता देने की वजह से आपको वेबसाइट के ओरिजिनल फोंट और कुछ तस्वीरों की जगह 'मिसिंग इमेज' आइकन भी दिख सकते हैं।
इन सब के साथ ही आपकी वायरलेस कनेक्टिविटी में भी सुरक्षा के लिहाज से सख्त बदलाव किए जाते हैं। मोड ऑन होते ही आपका फोन किसी भी असुरक्षित या बिना पासवर्ड वाले पब्लिक वाई-फाई से नहीं जुड़ेगा और अगर आप पहले से ऐसे किसी नेटवर्क से कनेक्टेड हैं तो डिवाइस तुरंत उसे डिसकनेक्ट कर देगा। इसके अलावा, पुराने और कम सुरक्षित नेटवर्क का फायदा उठाकर होने वाले हमलों को रोकने के लिए 2G और 3G सेलुलर सपोर्ट को भी पूरी तरह बंद कर दिया जाता है।आज तक हैक नहीं हुआ कोई डिवाइसयह मोड भले ही फोन चलाने के अनुभव को बदल देता है, लेकिन यह स्पायवेयर और हैकर्स से बचने का सबसे तगड़ा हथियार है। एपल की प्रवक्ता सारा ओ'रूर्के ने बताया, "हमें आज तक किसी भी ऐसे स्पायवेयर हमले की जानकारी नहीं मिली है, जिसने लॉकडाउन मोड चालू होने पर किसी एपल डिवाइस को हैक किया हो।"
आपके लिए क्या है जरूरी?
एपल ने अपना वादा निभाते हुए उन यूजर्स को अलर्ट भेजना शुरू कर दिया है जिनका आईओएस पुराना हो चुका है। अगर किसी भी वजह से आप अपना डिवाइस लेटेस्ट सॉफ्टवेयर पर अपडेट नहीं कर पा रहे हैं तो अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आप इस लॉकडाउन मोड का इस्तेमाल कर सकते हैं।
यह हैकर्स को कैसे रोकता है?
एपल के आलोचक और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ पैट्रिक वार्डेल भी मानते हैं कि लॉकडाउन मोड हैकर्स का काम बेहद मुश्किल और महंगा बना देता है। आसान भाषा में समझें तो यह फीचर आईफोन के 'अटैक सरफेस' (उन रास्तों को जहां से वायरस घुस सकता है) को कम कर देता है। यह मैसेज में आने वाले अटैचमेंट्स को ब्लॉक कर देता है और वेब ब्राउजर के कुछ फीचर्स को सीमित कर देता है। इससे खासकर 'जीरो-क्लिक' हमले नाकाम हो जाते हैं, जिनमें बिना किसी लिंक पर क्लिक किए ही फोन हैक हो जाता है।
क्या आपको इसका इस्तेमाल करना चाहिए?
हालांकि, यह मुमकिन है कि कोई बेहद एडवांस हैकिंग हुई हो जो एपल या एक्सपर्ट्स की पकड़ में न आई हो, लेकिन अब तक का इसका रिकॉर्ड शानदार है। अगर आप इस फीचर को ऑन करते हैं तो आपको बस थोड़ी सी असुविधा हो सकती है। उदाहरण के लिए मैसेज से लिंक कॉपी करके ब्राउजर में पेस्ट करना। लेकिन अगर आपको अपनी डिजिटल सुरक्षा की जरा भी चिंता है या आपको लगता है कि आप साइबर हमलों के निशाने पर आ सकते हैं तो लॉकडाउन मोड को ऑन कर लेना सबसे समझदारी भरा कदम है।