क्वांटम और स्पेस-टेक में बाजी मारेगा कर्नाटक: ग्लोबल टेक कंपनियों को दिया बड़ा न्योता, क्या है सरकार का प्लान?

जागृति शुक्ला
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीजागृति शुक्ला
Tue, 08 Sep 2026 05:21 PM IST
सार

कर्नाटक सरकार ने क्वांटम सिटी बनाने के लिए ग्लोबल टेक कंपनियों, स्टार्टअप्स, निवेशकों और रिसर्चर्स को साथ आने का आमंत्रण दिया है। राज्य का सबसे बड़ा फोकस एआई, स्पेसटेक, ड्रोन टेक और क्वाटम तकनीक है, ताे क्या यह पहल भारत को ग्लोबल डीप-टेक रेस में सबसे आगे खड़ा कर देगी? जानिए क्वांटम सिटी प्रोजेक्ट, अंतरिक्ष नीति 2025-30 के बड़े लक्ष्यों और टेक-इकोसिस्टम के लिए इस पहल के बारे में विस्तार से।

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Karnataka Invites Global Tech Firms Build Quantum City, Aims Create Global Deep-Tech Hub
कर्नाटक सरकार का नया प्लान - फोटो : एआई जनरेटेड

    विस्तार

    सूचना प्रौद्योगिकी और एयरोस्पेस के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना चुका कर्नाटक अब अगली पीढ़ी की तकनीकों क्वांटम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्पेस-टेक में दुनिया का अगुआई करने की तैयारी में है। राज्य सरकार ने रिसर्च, इनोवेशन और इंडस्ट्री के बीच तालमेल बिठाने के लिए क्वांटम सिटी विकसित करने का प्रस्ताव रखा है। बेंगलुरु के शेराटन ग्रैंड में स्पेस, मोबिलिटी और ड्रोन विषय पर आयोजित हाई-लेवल राउंडटेबल बैठक में माइनर इरिगेशन और साइंस एंड टेक्नोलॉजी मिनिस्टर अजय धर्म सिंह ने वैश्विक टेक कंपनियों, स्टार्टअप्स और शोधकर्ताओं को इस इकोसिस्टम का हिस्सा बनने का न्योता दिया। आइए जानते हैं कर्नाटक के इस प्रोजेक्ट और डीप-टेक रोडमैप से जुड़ी हर एक बड़ी बात...

    क्वांटम सिटी बनाने की तैयारी

    • कर्नाटक सरकार ने राज्य में प्रस्तावित क्वांटम सिटी को विकसित करने के लिए ग्लोबल टेक्नोलॉजी कंपनियों, स्टार्टअप्स, निवेशकों City को विकसित करने के लिए ग्लोबल टेक्नोलॉजी कंपनियों, स्टार्टअप्स, निवेशकों और रिसर्चर्स को पार्टनर बनने का न्योता दिया है। सरकार की योजना क्वांटम सिटी को रिसर्च, इनोवेशन और इंडस्ट्री के बीच सहयोग का एक ग्लोबल स्तर का डीप-टेक हब बनाने की है। यह जानकारी मंगलवार को बेंगलुरु में आयोजित Space, Mobility और Drones पर हाई-लेवल राउंडटेबल मीटिंग में सामने आई।
    • कर्नाटक के माइनर इरिगेशन और साइंस एंड टेक्नोलॉजी मंत्री अजय धर्म सिंह ने कहा कि सरकार चाहती है कि इंडस्ट्री और इनोवेटर्स इस प्रोजेक्ट के शुरुआती चरण से ही जुड़े रहें। उनका कहना है कि टेक्नोलॉजी कंपनियां अपने आइडिया, टेक्नोलॉजी और पार्टनरशिप के जरिए राज्य के डीप-टेक इकोसिस्टम को आकार देने में योगदान दे सकती हैं।

    ग्लोबल टेक कंपनियों से क्यों मांगी जा रही है पार्टनरशिप?

    • सरकार क्वांटम सिटी को केवल रिसर्च सेंटर तक की सीमित नहीं रखना चाहती है। इसका मकसद रिसर्चर्स, स्टार्टअप्स, इंडस्ट्री और निवेशकों को एक प्लेटफॉर्म पर लाकर नई टेक्नोलॉजी को विकसित करने के साथ-साथ उसे व्यावसायिक स्तर तक पहुंचाना है।
    • मंत्री ने टेक्नोलॉजी लीडर्स से कर्नाटक के साथ जुड़ने की अपील करते हुए कहा कि क्वांटम सिटी को इंडस्ट्री, रिसर्चर्स, स्टार्टअप्स और निवेशकों के साथ मिलकर बनाया जाएगा। सरकार का फोकस ऐसा डीप-टेक इकोसिस्टम तैयार करने पर है, जो ग्लोबल स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सके।

    एआई से लेकर स्पेसटेक तक कई सेक्टर पर फोकस

    कर्नाटक पहले से ही आईटी और एयरोस्पेस सेक्टर के लिए जाना जाता है। अब राज्य इन क्षेत्रों के साथ कई नई और उभरती टेक्नोलॉजी को भी जोड़ने की तैयारी कर रहा है। सरकार के मुताबिक, कर्नाटक का फोकस क्वांटम टेक्नोलॉजी, स्पेस-टेक, ड्रोन-टेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई, जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी, एयरोस्पेस और आईटी के क्षेत्रों पर रहेगा। सरकार का लक्ष्य टेक कंपनियों के लिए ऐसा माहौल तैयार करना है, जहां वे कर्नाटक में अपनी टेक्नोलॉजी बना, टेस्ट, मैन्युफैक्चर और स्केल कर सकें।

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    स्पेसटेक में भी कर्नाटक का बड़ा लक्ष्य

    • कर्नाटक सरकार क्वांटम तकनीक के साथ स्पेसटेक को भी तेजी से बढ़ाना चाहती है। इसके लिए राज्य ने कर्नाटक स्पेस टेक्नोलॉजी पॉलिसी 2025-30 के तहत बड़े लक्ष्य तय किए हैं।
    • पॉलिसी के मुताबिक, कर्नाटक का लक्ष्य 2033 तक भारत के स्पेस मार्केट में 50 फीसदी हिस्सेदारी हासिल करना और ग्लोबल स्पेस मार्केट में 5 फीसदी हिस्सेदारी तक पहुंचना है। राज्य इस सेक्टर में करीब 3 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित करने और 50,000 प्रोफेशनल्स को ट्रेनिंग देने का लक्ष्य भी रखता है। इसके लिए सरकार स्पेस टेक स्टार्टअप्स, एमएसएमई, रिसर्च संस्थानों और इंडस्ट्री के लिए निवेश, स्किल डेवलपमेंट, टेस्टिंग और मैन्युफैक्चरिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने की योजना पर काम कर रही है।

    किसानों और आम लोगों के काम आएगी एआई-ड्रोन टेक्नोलॉजी

    • सरकार का टेक्नोलॉजी विजन सिर्फ स्पेस और क्वांटम कंप्यूटिंग तक सीमित नहीं है। मंत्री ने टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल जमीन से जुड़ी वास्तविक समस्याओं को हल करने के लिए करने पर भी जोर दिया।
    • उन्होंने ग्राउंडवाटर मैनेजमेंट, टैंक और झीलों की मैपिंग, सिंचाई से जुड़े संसाधनों के मैनेजमेंट और सरकारी प्रोजेक्ट्स की निगरानी में सैटेलाइट इमेजरी, ड्रोन, जीआईएस, रिमोट सेंसिंग और एआई के ज्यादा इस्तेमाल की बात कही।
    • इसका मतलब है कि आने वाले समय में ड्रोन और एआई जैसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल सिर्फ इंडस्ट्री या डिफेंस तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पानी, सिंचाई और जमीन के बेहतर मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में भी किया जा सकता है।

    सरकार का फोकस- कर्नाटक में बनाएं, टेस्ट करें और दुनिया तक पहुंचाएं

    अजय धर्म सिंह ने कहा कि टेक्नोलॉजी तभी सार्थक हो सकती है, जब वह लोगों की वास्तविक समस्याओं का समाधान कर सके। यहां पर सरकार का संदेश है कि कंपनियां कर्नाटक में अपनी टेक्नोलॉजी विकसित करें, उसे टेस्ट करें, मैन्युफैक्चर करें और फिर उसे ग्लोबल मार्केट तक ले जाएं। यह तैयारी राज्य को सिर्फ आईटी सर्विसेज के बड़े केंद्र के बजाय डीप-टेक, हार्डवेयर, रिसर्च और टेक्नोलॉजी मैन्युफैक्चरिंग के हब के तौर पर विकसित करने की कोशिश का हिस्सा है।

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    बैठक में कौन-कौन शामिल हुआ?

    बेंगलुरु के शेराटन ग्रैंड में हुई इस हाई-लेवल राउंडटेबल मीटिंग में पूर्व आईएसआरओ चेयरमैन एस. सोमनाथ, दक्षिण भारत में इजराइल की कॉन्सल जनरल ओर्ली वेट्ज़मैन और कई प्रमुख स्पेसटेक कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड, पिक्सेल, ध्रुव स्पेस, आइडियाफोर्ज, एक्सलस्पेस, ब्लैकस्काई, कैपेला स्पेस, एंडुरोसैट, सरला एविएशन और टेकमी2स्पेस जैसी कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ निवेशक और टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री के लीडर्स भी मौजूद रहे।

    क्वाटम सिटी से क्या बदलेगा?

    • अगर यह पहल योजना के मुताबिक आगे बढ़ जाती है, ताे क्वांटम सिटी कर्नाटक के मौजूदा आईटी और ऐरोस्पेस इकोसिस्टम को नई डीप-टेक क्षमताओं से जोड़ सकती है। क्वांटम कंप्यूटिंग, एआई, स्पेस-टेक, ड्रोन-टेक और जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में स्टार्टअप्स और रिसर्चर्स को इंडस्ट्री और निवेशकों के साथ काम करने का एक साझा प्लेटफॉर्म मिल सकता है।
    • कर्नाटक पहले से ही भारत के स्पेसटेक स्टार्टअप इकोसिस्टम का एक प्रमुख केंद्र है और राज्य की स्पेस टेक्नोलॉजी पॉलिसी भी निवेश, स्किल डेवलपमेंट और रिसर्च पर जोर देती है।
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