I4C-RBIH Partnership: साइबर ठगी रोकने के लिए सरकार का बड़ा कदम, अब AI बताएगा कौन-सा बैंक अकाउंट है फ्रॉड
Online Financial Scam Prevention:
भारत में डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसी के साथ बढ़ रहे हैं ऑनलाइन फ्रॉड। फर्जी लोन एप्स, फिशिंग स्कैम, बैकिंग फ्रॉड और म्यूल अकाउंट जैसे साइबर अपराध अब बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। इसी से निपटने के लिए अब सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। I4C और RBI Innovation Hub ने मिलकर AI आधारित सिस्टम तैयार करने की दिशा में साझेदारी की है, जो संदिग्ध बैंक खातों और फ्रॉड ट्रांजैक्शन की पहचान करेगा।

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MuleHunter.ai India:
भारत में जैसे-जैसे डिजिटल लेन-देन बढ़ रहा है, वैसे-वैसे स्कैमर्स ऑनलाइन फ्रॉड करने के नए-नए तरीके अपना रहे हैं, लेकिन अब इनके पैंतरे पर लगाम लगाने का काम शुरू हो चुका है। गृह मंत्रालय के अधीन काम करने वाले भारतीय साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) और रिजर्व बैंक इनोवेशन हब (RBIH) ने एक एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि आने वाले दिनों के यूजर्स के डिजिटल पेमेंट्स और सुरक्षित हो सकते हैं। इस बड़े फैसले की जानकारी खुद I4C ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल CyberDost के जरिए देश के साथ साझा की है।
4C और RBIH मिलकर क्या करेंगे?
इस नई साझेदारी का मुख्य उद्देश्य भारत में बढ़ते साइबर क्राम पर लगाम लगााना है। इसके अंदर बैंकिंग सिस्टम, डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म और कानून प्रवर्तन एजेंसी के बीच बेहतर तालमेल बैठाया जाएगा। इसके बाद ये ऐसे संदिग्ध बैंक खातों की पहचान करने पर फोकस करेंगे, जिन्हें कभी साइबर अपराधी चाेरी या अवैध पैसे को ट्रांसफर करने के लिए इस्तेमाल किया गया हो, या अभी भी किया जा रहा हो।

इसे ही म्यूल अकाउंट भी कहा जाता है। या फिर और आसान तरीके से समझें तो अक्सर साइबर अपराधी आम लोगों से ठगा हुआ पैसा सीधे अपने खाते में न मंगाकर, फर्जी या किसी तीसरे व्यक्ति के बैंक खाते में ट्रांसफर करते हैं। बैंकिंग की भाषा में इन्हें 'म्यूल खाते' कहा जाता है। इस नई साझेदारी का मुख्य फोकस ही इन्हीं संदिग्ध खातों को पहचानना और तुरंत ब्लॉक करना है।

एआई आधारित फ्रॉड डिटेक्शन सिस्टम पर होगा फोकस
इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी की कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद भी ली जाएगी। ये दोनों यानी की I4C और RBIH मिलकर AI आधारित फ्रॉड डिटेक्शन सिस्टम को मजबूत करेंगे, ताकि संदिग्ध ट्रांजैक्शन को शुरुआती स्तर पर ही पकड़ा जा सके। इसके लिए I4C-MHA सस्पेक्ट रजिस्ट्री के डेटा का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे फ्रॉड पैटर्न को बेहतर तरीके से समझने और ट्रैक करने में मदद मिलेगी।
MuleHunter.ai कैसे करेगा काम?
आपको बता दें कि इस साझेदारी में MuleHunter.ai जैसे टूल्स की भी मदद ली जाएगी। यह AI सिस्टम बैंकिंग ट्रांजैक्शन में असामान्य गतिविधियों को पहचानने के लिए डिजाइन किया गया है। अगर किसी खाते में संदिग्ध तरीके से बार-बार पैसे आ-जा रहे हों या फ्रॉड से जुड़े संकेत मिलें, तो सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी कर सकता है। इससे बड़े साइबर फ्रॉड को शुरुआती स्तर पर ही रोकने में मदद मिल सकती है। हालांकि अभी इस टूल की शुरूआत नहीं हुई है।

क्यों बढ़ रही है ऐसी टेक्नोलॉजी की जरूरत?
जानकारों का कहना है देश में यूपीआई और डिजिटल पेमेंट सिस्टम का विस्तार तेजी से बढ़ रहा है। करोडों की संख्या में यूजर्स इसका इस्तेमाल कर रहे हैं, जो सुविधा के साथ स्कैमर्स को ठगी का रास्ता भी देते हैं। आजकल आए दिन फिशिंग अटैक, फर्जी लोन एप, ऑनलाइन बैंकिंग धोखाधड़ी और अकाउंट मिसयूज जैसी घटनाएं आम होती जा रही हैं। ऐसे में सरकार अब टेक्नोलॉजी आधारित समाधान पर जोर दे रही है, ताकि डिजिटल इकोसिस्टम को ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद बनाया जा सके।

क्या इससे साइबर अपराध खत्म हो जाएंगे?
खत्म हो जाएंगे, ऐसा कहना मुमकिन नहीं है, लेकिन सरकार का मानना है कि अगर बैंक, फिनटेक कंपनियां और कानून प्रवर्तन एजेंसियां डेटा और इंटेलिजेंस साझा करें, तो साइबर अपराधों पर ज्यादा प्रभावी तरीके से नियंत्रण पाया जा सकता है। गृह मंत्रालय के अधीन इंडिया साइअर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर पहले से साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल, जागरूकता अभियान और फ्रॉड रोकथाम कार्यक्रम चला रहा है। अब आरबीआई इनोवेशन हम भी इनके साथ जुड़ चुकी है। ऐसे में कहा जा रहा है कि यह साझेदारी डिजिटल सुरक्षा को मजबूत कर सकती है।