Cyber Scam: लोगों को ठगने में Facebook से लेकर Google तक का इस्तेमाल, बेरोजगार और हाउसवाइफ बने आसान टार्गेट
MHA Report On Cyber Scam: गृह मंत्रालय ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में देश में साइबर अपराध से जुड़े कुछ गंभीर आंकड़े पेश किए हैं। फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम और गूगल जैसे बिग टेक प्लेटफॉर्म्स का साइबर अपराधी धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं। इन प्लेटफॉर्म्स के जरिए बेरोजगारों, छात्रों और गृहिणियों को निशाना बनाया जा रहा है।

विस्तार
नई दिल्ली: गृह मंत्रालय ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में देश में साइबर अपराध से जुड़े कुछ गंभीर आंकड़े पेश किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक देश में "पिग बचरिंग स्कैम" या "इन्वेस्टमेंट स्कैम" जैस नए स्कैम तेजी से फैल रहे हैं। इस तरह के साइबर स्कैम में बेरोजगार युवाओं, गृहिणियों, छात्रों और जरूरतमंद लोगों को बड़े पैमाने पर निशाना बनाया जा रहा है। गृह मंत्रालय की ताजा वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, इस स्कैम में लोग रोजाना बड़ी रकम गंवा रहे हैं।

कैसे काम करता है "पिग बचरिंग स्कैम"?
इस धोखाधड़ी की शुरुआत 2016 में चीन में हुई थी। इसमें साइबर अपराधी पहले पीड़ित का विश्वास जितते हैं और फिर उन्हें क्रिप्टोकरेंसी या किसी अन्य आकर्षक योजना में निवेश करने के लिए तैयार करते हैं। इसके बाद उनकी जमा पूंजी ठग ली जाती है। इसे "पिग बचरिंग" इसलिए कहा जाता है क्योंकि अपराधी पीड़ित को "मोटा" (अधिक निवेश) करने के लिए प्रेरित करते हैं और फिर उनकी पूरी राशि ठग लेते हैं।
गूगल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का उपयोग
रिपोर्ट में बताया गया है कि साइबर अपराधी गूगल के एडवर्टाइजमेंट प्लेटफॉर्म का उपयोग कर सीमाओं के पार से लोगों को निशाना बना रहे हैं। साथ ही, अवैध लोन एप्लिकेशन के प्रचार के लिए स्पॉन्सर्ड फेसबुक लिंक का भी दुरुपयोग किया जा रहा है।

WhatsApp, Telegram, Instagram, Facebook, और YouTube जैसे प्लेटफॉर्म्स भी साइबर अपराधियों द्वारा व्यापक रूप से उपयोग किए जा रहे हैं। 2024 तक दर्ज शिकायतों के आंकड़ों के अनुसार, WhatsApp पर 14,746, Telegram पर 7,651, Instagram पर 7,152, Facebook पर 7,051 और YouTube पर 1,135 शिकायतें दर्ज की गईं।
साइबर अपराध रोकने के लिए सरकार के कदम
इन बढ़ते अपराधों को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के तहत कई उपाय किए हैं। साइबर अपराधियों की पहचान कर उन पर तुरंत कार्रवाई के लिए गूगल और फेसबुक जैसे बड़े तकनीकी प्लेटफॉर्म्स के साथ साझेदारी की गई है। राष्ट्रीय साइबर क्राइम थ्रेट एनालिटिकल यूनिट (NCTAU) साइबर अपराध के तरीकों का विश्लेषण कर बैंकों, पेमेंट गेटवे और ई-कॉमर्स कंपनियों को जरूरी जानकारी प्रदान कर रही है।