Action: साइबर फ्रॉड को रोकने के लिए सरकार का बड़ा कदम, दूसरों के नाम SIM खरीदने वाले होंगे ब्लैकलिस्ट

नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीनीतीश कुमार
Fri, 27 Dec 2024 07:36 PM IST
सार

सरकार अब उन लोगों को ब्लैकलिस्ट करने जा रही है, जो दूसरों के नाम पर सिम कार्ड खरीदते हैं या फिर धोखाधड़ी वाले मैसेज भेजते हैं। इस लिस्ट में वे लोग शामिल होंगे, जो धोखाधड़ी या साइबर अपराधों में लिप्त पाए गए हैं।

Government To Blacklist Those Purchasing SIM On Other Persons Name To Curb Cyber Fraud
सिम कार्ड - फोटो : संवाद

    विस्तार

    श में साइबर अपराधों की बढ़ती संख्या के बीच, सरकार ने एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम उठाने की तैयारी की है। सरकार अब उन लोगों को ब्लैकलिस्ट करने जा रही है, जो दूसरों के नाम पर सिम कार्ड खरीदते हैं या फिर धोखाधड़ी वाले मैसेज भेजते हैं। ऐसे व्यक्तियों को साइबर सुरक्षा के लिहाज से खतरे के रूप में देखा जाएगा और उन्हें ब्लैकलिस्ट में डाला जाएगा। इसके बाद, इन लोगों पर सिम कार्ड खरीदने पर रोक लगाई जा सकती है और यह प्रतिबंध 3 साल तक जारी रह सकता है।

    क्या है सरकार की योजना?

    भारत सरकार के दूरसंचार विभाग ने इस ब्लैकलिस्ट को बनाना शुरू कर दिया है। इस लिस्ट में वे लोग शामिल होंगे, जो धोखाधड़ी या साइबर अपराधों में लिप्त पाए गए हैं, जैसे दूसरों के नाम पर सिम कार्ड लेना या फ्रॉड मैसेज भेजना। जिनका नाम इस लिस्ट में होगा, उनके मौजूदा सिम कार्ड ब्लॉक कर दिए जाएंगे और उन्हें किसी भी नए सिम कार्ड की खरीदारी करने से 6 महीने से लेकर 3 साल तक के लिए रोका जा सकता है।

    ब्लैकलिस्ट करने से पहले भेजा जाएगा नोटिस

    सरकार ने इस प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने का भी प्रयास किया है। ब्लैकलिस्ट में किसी भी व्यक्ति को शामिल करने से पहले सरकार उसे नोटिस भेजेगी और उसके जवाब की मांग करेगी। नोटिस का जवाब देने के लिए संबंधित व्यक्ति को 7 दिनों का समय दिया जाएगा। हालांकि, यदि मामला गंभीर और व्यापक जनहित से जुड़ा हुआ है, तो बिना नोटिस दिए भी किसी व्यक्ति को ब्लैकलिस्ट में शामिल किया जा सकता है।

    साइबर क्राइम को रोकने के लिए सरकार के प्रयास

    यह कदम साइबर अपराधों को नियंत्रित करने के लिए सरकार द्वारा उठाए जा रहे व्यापक प्रयासों का हिस्सा है। हाल ही में, सरकार ने टेलीकॉम कंपनियों को साइबर क्राइम से बचाव के उपायों के बारे में जागरूकता फैलाने के निर्देश दिए थे। इसके तहत, टेलीकॉम कंपनियों को कोलर-ट्यून के माध्यम से उपभोक्ताओं को साइबर अपराधों से बचाव के तरीके बताने का आदेश दिया गया है। यह अभियान 3 महीने तक जारी रहेगा।

    इसके अलावा, सरकार ने संसद में यह भी बताया कि उसने साइबर अपराधों को नियंत्रित करने के प्रयास में 6.69 लाख सिम कार्ड और 1,32,000 आईएमईआई नंबर को ब्लॉक कर दिया गया है। यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि साइबर अपराधियों को उनकी गतिविधियों के लिए आसान साधन न मिल सकें।

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