Google: अमेरिका में H-1B वीजा की मुश्किलों के बीच गूगल की भारत पर बढ़ी निर्भरता, कंपनी देश में बनाएगी कैंपस

सुयश पांडेय
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीसुयश पांडेय
Wed, 04 Feb 2026 01:31 PM IST
सार

Google Shifts Focus to India: अमेरिका में H-1B वीजा की बढ़ती सख्ती और भारी लागत के चलते गूगल ने अपनी ग्लोबल हायरिंग रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। अब कंपनी अमेरिका के बजाय भारत, खासतौर पर बंगलूरू में तेजी से विस्तार कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक गूगल व्हाइटफील्ड में लगभग 24 लाख स्क्वायर फीट का विशाल कैंपस तैयार कर रहा है, जहां करीब 20,000 कर्मचारियों के काम करने की क्षमता होगी। इसके बाद भारत में गूगल की कुल वर्कफोर्स मौजूदा संख्या से दोगुनी से भी ज्यादा हो जाएगी।

Google Shifts Focus to India as H-1B Visas Get Costly, Plans Massive Hiring in Bengaluru
Google - फोटो : X

    विस्तार

    अमेरिका में H-1B वीजा मिलना अब मुश्किल और बहुत महंगा होता जा रहा है। इसी वजह से गूगल ने अपनी योजना बदल दी है। अब गूगल अमेरिका के बजाय भारत (खासकर बंगलूरू) में ज्यादा लोगों को नौकरी देने और अपना काम यहां बढ़ाने पर जोर दे रहा है।

    बंगलूरू में विशाल विस्तार की तैयारी

    ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, गूगल बंगलूरू के व्हाइटफील्ड में एक बहुत बड़ा कैंपस तैयार कर रहा है, जिसके लिए उसकी पेरेंट कंपनी 'अल्फाबेट' ने एक पूरी बिल्डिंग किराये पर ले ली है और दो और इमारतों का विकल्प भी रखा है। करीब 24 लाख स्क्वायर फीट में फैले इस विशाल ऑफिस में 20,000 कर्मचारियों के बैठने की जगह होगी। खास बात यह है कि अभी भारत में गूगल के कुल 14,000 कर्मचारी ही हैं, लेकिन इस नए कैंपस के शुरू होने के बाद भारत में गूगल की टीम पहले के मुकाबले दोगुनी से भी ज्यादा हो जाएगी।

    एच-1बी वीजा की मुश्किलें और भारत को फायदा

    अमेरिका के इमिग्रेशन नियमों में बदलाव और सख्ती की वजह से अब विदेशी पेशेवरों को वहां बुलाकर काम देना काफी मुश्किल हो गया है। रिपोर्ट्स की मानें तो एक H-1B वीजा का खर्च करीब 84 लाख रुपये ($100,000) तक पहुंच सकता है। इसी बढ़ते खर्च और वीजा की देरी से बचने के लिए कंपनियों ने अपनी रणनीति बदल ली है। अब वे भारतीय इंजीनियरों को अमेरिका बुलाने के बजाय भारत में ही बड़ी टीमें तैयार कर रही हैं, ताकि कम लागत में बेहतरीन टैलेंट के साथ काम जारी रखा जा सके।

    एआई की रेस में भारत की अहमियत

    भारत अब केवल छोटे-मोटे सपोर्ट के कामों के लिए नहीं, बल्कि एआई जैसे अत्याधुनिक तकनीकी कामों का ग्लोबल हब बन चुका है। एंथ्रोपिक इंडिया की प्रमुख इरिना घोष का भी मानना है कि भारत के पास बड़े पैमाने पर एआई बनाने और उसे दुनिया में लागू करने का शानदार मौका है। यही वजह है कि गूगल के साथ-साथ माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी कंपनियां भी भारत में अपना विस्तार कर रही हैं। गूगल ने तो हाल ही में क्लाउड कंप्यूटिंग, चिप डिजाइन और एडवांस्ड रिसर्च जैसे ऊंचे पदों के लिए भर्तियां भी शुरू कर दी हैं और यहां तक कि यूट्यूब की टीमें भी भारत में बैठकर एआई के नए टूल्स पर काम कर रही हैं।

    आंकड़ों में टेक उछाल

    एक स्टाफिंग फर्म 'एक्सफेनो (Xpheno)' के आंकड़े बताते हैं कि पिछले एक साल में गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, अमेज़न और मेटा जैसी दिग्गज अमेरिकी कंपनियों ने भारत में अपनी टीम में 16% की बढ़ोतरी की है, जो पिछले तीन वर्षों में सबसे ज्यादा है। अगर हम इस पूरे बदलाव को संक्षेप में देखें तो गूगल बंगलूरू के व्हाइटफील्ड में अपना नया कैंपस खोल रहा है जहां 20,000 नई भर्तियों की संभावना है। कुल मिलाकर इन कंपनियों का फोकस अब भारत में बैठकर एआई, क्लाउड और चिप डिजाइन जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम करने का है।

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